राजस्थान के अजमेर जिले में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले को इस बार तकनीक की मदद से नया स्वरूप दिया जा रहा है। आयोजन की तारीखें नजदीक आते ही प्रशासनिक तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। आधुनिक डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए मेले के प्रबंधकों ने इस बार क्यूआर कोड आधारित एक खास तकनीकी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद मेले में भाग लेने के लिए देश और दुनिया से पहुंचने वाले लाखों पर्यटकों और पशुपालकों को मेला क्षेत्र की तमाम जरूरी जानकारियां सीधे उनके मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराना है।
स्मार्ट तकनीक से जुड़ेगा पारंपरिक आयोजन
मेला अधिकारी डॉ नवीन परिहार के अनुसार वर्तमान दौर पूरी तरह डिजिटल तकनीकों का रूप ले चुका है, जिसमें सामान्य जानकारियों से लेकर वित्तीय लेन-देन तक सब कुछ मोबाइल स्कैनिंग पर निर्भर है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए इस साल के आयोजन को तकनीकी रूप से सक्षम और स्मार्ट बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विशाल भूभाग पर फैले इस पारंपरिक मेले में अक्सर बाहरी आगंतुकों को अलग-अलग जगहों की दिशा और दूरी समझने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई पहल से पर्यटकों और पशुपालकों दोनों का समय बचेगा और उन्हें किसी से बार-बार रास्ता पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हेल्प डेस्क पर लगाए जाएंगे विशाल फ्लेक्स बोर्ड
मेले के दौरान हेल्प डेस्क पर अक्सर ऐसे सवाल पूछे जाते हैं कि सबसे ऊंचा या सबसे छोटा घोड़ा किस जगह बंधा है अथवा प्रमुख पशु प्रतियोगिताएं कहां आयोजित की जा रही हैं। इन सभी सामान्य और बार-बार पूछे जाने वाले सवालों का समाधान करने के लिए हेल्प डेस्क पर एक बहुत बड़ा फ्लेक्स बोर्ड स्थापित किया जाएगा। इस बोर्ड पर मेले के अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों, प्रमुख पशु शिविरों और आकर्षणों के अलग-अलग क्यूआर कोड अंकित होंगे। कोई भी आगंतुक अपने स्मार्टफोन कैमरे से संबंधित कोड स्कैन करके उस खास जगह की सटीक भौगोलिक स्थिति और वहां तक पहुंचने का सीधा रास्ता तुरंत हासिल कर सकेगा।
चारा डिपो से लेकर प्रतियोगिताओं तक की सीधी राह
विशाल रेतीले मैदान में आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचना कई बार पशुपालकों के लिए कठिन चुनौती बन जाता था। नए डिजिटल नक्शे की मदद से सूखा चारा, हरा चारा और दाना बिक्री केंद्रों की सही स्थिति एक पल में सामने आ जाएगी। इसके अलावा सरस डेयरी पार्लर, हॉर्स डांस प्रतियोगिता, ऊंट सजावट समारोह और पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन स्थलों की सटीक लोकेशन भी इसी तकनीक के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मेला परिसर में अनावश्यक भटकने की समस्या खत्म होगी और जरूरी प्रबंध तय समय पर किए जा सकेंगे।
दूरी और दिशा का रियल-टाइम अनुमान
यह तकनीकी सुविधा केवल मेला स्थल पर मौजूद लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि बाहर से आने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी मददगार साबित होगी। कोड स्कैन करते ही हेल्प डेस्क से उस विशेष गंतव्य की वास्तविक दूरी और वहां तक पहुंचने का उपयुक्त मार्ग स्क्रीन पर दिखाई देगा। इससे पर्यटकों को यह तय करने में आसानी होगी कि वे पैदल चलकर वहां जा सकते हैं या उन्हें किसी अन्य दिशा में आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर यह नवाचार पारंपरिक मेले को सहज और आधुनिक अनुभव में बदलने जा रहा है।























