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अजमेर के पुष्कर मेले में इस बार क्यूआर कोड की पहल, स्मार्टफोन से मिलेगी हर प्रतियोगिता और स्थल की सटीक लोकेशनराजस्थान
31 अक्तू॰ 2026, 5:26 pm (1 घंटे पहले)· 0

अजमेर के पुष्कर मेले में इस बार क्यूआर कोड की पहल, स्मार्टफोन से मिलेगी हर प्रतियोगिता और स्थल की सटीक लोकेशन

राजस्थान के पुष्कर मेले को आधुनिक बनाते हुए प्रशासन ने क्यूआर कोड व्यवस्था शुरू करने का फैसला किया है। इसकी मदद से पर्यटक और पशुपालक मोबाइल स्कैन करके पशुओं, चारा डिपो और प्रतियोगिताओं तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

राजस्थान के अजमेर जिले में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले को इस बार तकनीक की मदद से नया स्वरूप दिया जा रहा है। आयोजन की तारीखें नजदीक आते ही प्रशासनिक तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। आधुनिक डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए मेले के प्रबंधकों ने इस बार क्यूआर कोड आधारित एक खास तकनीकी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद मेले में भाग लेने के लिए देश और दुनिया से पहुंचने वाले लाखों पर्यटकों और पशुपालकों को मेला क्षेत्र की तमाम जरूरी जानकारियां सीधे उनके मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराना है।

स्मार्ट तकनीक से जुड़ेगा पारंपरिक आयोजन

मेला अधिकारी डॉ नवीन परिहार के अनुसार वर्तमान दौर पूरी तरह डिजिटल तकनीकों का रूप ले चुका है, जिसमें सामान्य जानकारियों से लेकर वित्तीय लेन-देन तक सब कुछ मोबाइल स्कैनिंग पर निर्भर है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए इस साल के आयोजन को तकनीकी रूप से सक्षम और स्मार्ट बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विशाल भूभाग पर फैले इस पारंपरिक मेले में अक्सर बाहरी आगंतुकों को अलग-अलग जगहों की दिशा और दूरी समझने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई पहल से पर्यटकों और पशुपालकों दोनों का समय बचेगा और उन्हें किसी से बार-बार रास्ता पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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हेल्प डेस्क पर लगाए जाएंगे विशाल फ्लेक्स बोर्ड

मेले के दौरान हेल्प डेस्क पर अक्सर ऐसे सवाल पूछे जाते हैं कि सबसे ऊंचा या सबसे छोटा घोड़ा किस जगह बंधा है अथवा प्रमुख पशु प्रतियोगिताएं कहां आयोजित की जा रही हैं। इन सभी सामान्य और बार-बार पूछे जाने वाले सवालों का समाधान करने के लिए हेल्प डेस्क पर एक बहुत बड़ा फ्लेक्स बोर्ड स्थापित किया जाएगा। इस बोर्ड पर मेले के अलग-अलग महत्वपूर्ण स्थानों, प्रमुख पशु शिविरों और आकर्षणों के अलग-अलग क्यूआर कोड अंकित होंगे। कोई भी आगंतुक अपने स्मार्टफोन कैमरे से संबंधित कोड स्कैन करके उस खास जगह की सटीक भौगोलिक स्थिति और वहां तक पहुंचने का सीधा रास्ता तुरंत हासिल कर सकेगा।

चारा डिपो से लेकर प्रतियोगिताओं तक की सीधी राह

विशाल रेतीले मैदान में आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचना कई बार पशुपालकों के लिए कठिन चुनौती बन जाता था। नए डिजिटल नक्शे की मदद से सूखा चारा, हरा चारा और दाना बिक्री केंद्रों की सही स्थिति एक पल में सामने आ जाएगी। इसके अलावा सरस डेयरी पार्लर, हॉर्स डांस प्रतियोगिता, ऊंट सजावट समारोह और पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन स्थलों की सटीक लोकेशन भी इसी तकनीक के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मेला परिसर में अनावश्यक भटकने की समस्या खत्म होगी और जरूरी प्रबंध तय समय पर किए जा सकेंगे।

दूरी और दिशा का रियल-टाइम अनुमान

यह तकनीकी सुविधा केवल मेला स्थल पर मौजूद लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि बाहर से आने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी मददगार साबित होगी। कोड स्कैन करते ही हेल्प डेस्क से उस विशेष गंतव्य की वास्तविक दूरी और वहां तक पहुंचने का उपयुक्त मार्ग स्क्रीन पर दिखाई देगा। इससे पर्यटकों को यह तय करने में आसानी होगी कि वे पैदल चलकर वहां जा सकते हैं या उन्हें किसी अन्य दिशा में आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर यह नवाचार पारंपरिक मेले को सहज और आधुनिक अनुभव में बदलने जा रहा है।

सवाल-जवाब

पुष्कर मेले में इस बार कौन सी नई तकनीकी सुविधा शुरू की जा रही है?
इस बार पुष्कर मेले में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल नेविगेशन सुविधा शुरू की जा रही है, जिससे मोबाइल स्कैन करते ही विभिन्न स्थानों की जानकारी मिल सकेगी।
पर्यटक इन क्यूआर कोड को कहां से स्कैन कर सकेंगे?
मेला क्षेत्र के मुख्य हेल्प डेस्क पर एक बड़ा फ्लेक्स बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर अलग-अलग स्थलों के क्यूआर कोड प्रिंट किए जाएंगे।
क्यूआर कोड स्कैन करने पर कौन-कौन सी जानकारियां मिलेंगी?
स्कैन करते ही सबसे ऊंचे या छोटे घोड़े का स्थान, प्रतियोगिताओं के स्थल, चारा डिपो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सटीक दूरी और रास्ता मिल जाएगा।
क्या इस सुविधा से पशुपालकों को चारा खरीदने में मदद मिलेगी?
हां, पशुपालक सूखा चारा, हरा चारा और दाना बिक्री केंद्रों की सही लोकेशन आसानी से अपने मोबाइल पर देख सकेंगे।
इस डिजिटल नवाचार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और पशुपालकों का समय बचाना और पारंपरिक मेले को पूरी तरह स्मार्ट और सुविधाजनक बनाना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 मिनट पहले

पुष्कर में क्यूआर कोड से रास्ता तो मिल जाएगा, पर भीड़ में नेटवर्क ने साथ नहीं दिया तो दिक्कत होगी।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·4 मिनट पहले

अर्जुन, नेटवर्क वाली बात तो पक्की है। पर क्या मेला प्रशासन ने इसके लिए कोई ऑफ़लाइन या वाई-फाई का इंतज़ाम भी सोचा है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

पुष्कर मेले में क्यूआर कोड से भटकना नहीं पड़ेगा, बढ़िया डिजिटल कदम है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा करण, रेत में रास्ता ढूंढना सच में सिरदर्द होता था, अब फोन से काम आसान हो जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

पुष्कर मेले में सालों पहले जब मैं पहली बार गया था, तो घोड़ों के बाड़े ढूँढते-ढूँढते पैर थक गए थे और रास्ता पूछने के लिए हर दस कदम पर रुकना पड़ा था। अब क्यूआर कोड आने से सचमुच बहुत राहत हो जाएगी, कम से कम रेतीले मैदान में भटकना तो नहीं पड़ेगा।

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