राजस्थान के अलवर शहर स्थित बुध विहार गो-नंदीशाला कांजी हाउस में मवेशियों की दयनीय हालत सामने आई है। नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली और स्टाफ की भारी किल्लत के चलते यहां आश्रय पाए गोवंश को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। पशुओं के लिए दाना-पानी और चारे का संकट गहरा गया है, वहीं पूरे परिसर में स्वच्छता का अभाव बना हुआ है। हालिया बरसात के चलते कांजी हाउस परिसर गहरे कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुका है, जिसके चलते 300 से ज्यादा मवेशी लगातार गीली जमीन पर खड़े रहने को मजबूर हैं। परिसर में उनके बैठने या विश्राम करने के लिए कोई सूखी जमीन नहीं बची है।
परिसर में मिले मृत पशु और लंपी वार्ड में बदहाली
कांजी हाउस के भीतरी हालात का जायजा लेने पर नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर हुई है। बाड़े के लंपी वार्ड के भीतर दो गोवंश मृत पड़े मिले, जबकि एक गंभीर रूप से बीमार गाय दलदल के बीच दर्द से कराहती पाई गई। इसके अलावा टीनशेड के नीचे एक बछड़े का शव कई दिनों से लावारिस पड़ा सड़ रहा था, जिससे पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैलने के साथ संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई थी। परिसर में करीब आठ गायों के शरीर पर गहरे और गंभीर जख्म नजर आए, जिन्हें समय पर कोई चिकित्सकीय उपचार नहीं मिल पा रहा था और उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी।
स्टाफ की भारी कमी और चुनाव ड्यूटी का असर
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार बुध विहार कांजी हाउस में लगभग 450 गोवंश मौजूद हैं। नगर निगम की ओर से इस पूरे आश्रय स्थल की देखरेख, चारा वितरण और साफ-सफाई के लिए कुल छह कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। हालांकि प्रशासनिक आदेशों के तहत इनमें से चार कर्मचारियों को पंचायत चुनाव के कार्यों में तैनात कर दिया गया। इसके चलते अब केवल दो कर्मचारी ही पूरे कांजी हाउस का जिम्मा संभाल रहे हैं। महज दो कर्मियों के सहारे 450 बेजुबान पशुओं के भोजन, पानी, उपचार और परिसर की सफाई का संचालन करना व्यावहारिक रूप से असंभव साबित हो रहा है। नगर निगम की राजस्व अधिकारी अमीषा ने इस स्थिति पर माना कि चुनावी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों की कमी से संचालन में दिक्कतें पैदा हुई हैं। उन्होंने बताया कि तीन मृत पशुओं के शवों को वहां से हटवा दिया गया है और अस्वस्थ मवेशियों के उपचार हेतु पशु चिकित्सकों को बुलाया गया है।
गोसेवकों का कड़ा रोष और प्रशासन को अल्टीमेटम
पशुओं की दुर्दशा और मौतों की सूचना मिलने के बाद स्थानीय गोसेवक बड़ी तादाद में कांजी हाउस पहुंचे। परिसर की भयानक स्थिति और मवेशियों की दुर्दशा को देखकर लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गोसेवकों ने तत्काल पशु एंबुलेंस को मौके पर बुलाया और तड़प रही एक बीमार गाय को इलाज के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाया। गोसेवक कमलकांत शास्त्री ने नगर निगम के मेयर और जिला प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप करने की मांग उठाई। उन्होंने परिसर में अतिरिक्त टीनशेड लगाने, पर्याप्त चारे की नियमित आपूर्ति करने और घायल तथा बीमार पशुओं के नियमित इलाज की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। शास्त्री ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक अमले ने कांजी हाउस की बदहाल दशा को तत्काल दुरुस्त नहीं किया, तो सभी गोसेवक लामबंद होकर जिला प्रशासन के विरुद्ध सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।






















