राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सुलताना थाना क्षेत्र के क्यामसर गांव में कृषि कार्य के दौरान एक दर्दनाक दुर्घटना सामने आई है। खेत में सिंचाई के लिए फव्वारा पाइप बदलते समय ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइन से टकराने के कारण करंट की चपेट में आने से एक किसान की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस आकस्मिक घटना से मृतक के घर में कोहराम मच गया और क्षेत्र के किसानों व ग्रामीणों के बीच बिजली विभाग की अनदेखी को लेकर गहरा रोष फैल गया।
खेत में सिंचाई कार्य के दौरान घटा हादसा
क्यामसर गांव के निवासी किसान शार्दूल सिंह अपने खेत में सामान्य कृषि कार्यों के तहत फव्वारा सिंचाई प्रणाली की पाइप लाइन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर व्यवस्थित कर रहे थे। फव्वारा बदलते समय हाथ में पकड़ा हुआ एल्युमिनियम का पाइप अचानक खेत के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन तार से छू गया। एल्युमिनियम धातु बिजली की सुचालक होने के कारण पाइप में तुरंत भारी वोल्टेज का करंट दौड़ गया। शार्दूल सिंह इसकी चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए और उन्होंने वहीं तड़पकर दम तोड़ दिया। आसपास के खेतों में काम कर रहे लोगों को जब तक बात समझ आई, तब तक किसान की सांसें थम चुकी थीं और पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस मौके पर पहुंची, शव को मोर्चरी पहुंचाया
हादसे की सूचना मिलते ही सुलताना पुलिस थाने का दल फौरन क्यामसर गांव स्थित खेत में पहुंचा। पुलिसकर्मियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और मृतक के पार्थिव शरीर को अपने संरक्षण में ले लिया। शव को पास के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिजनों की तरफ से दी जाने वाली औपचारिक शिकायत व रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है, तथा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सुपुर्द किया जाएगा।
बिजली विभाग पर ढीले तारों की अनदेखी के गंभीर आरोप
इस दुखद घटना के बाद मृतक किसान शार्दूल सिंह के परिजनों और साथी ग्रामीणों ने विद्युत निगम के अधिकारियों व फील्ड स्टाफ के खिलाफ सख्त नाराजगी जताई है। परिजनों का साफ कहना है कि कृषि भूमि के ऊपर से गुजरने वाले हाईटेंशन लाइन के तार लंबे अरसे से काफी नीचे झूल रहे थे और बेहद ढीले पड़े हुए थे। ग्रामीणों का कहना है कि इन झूलते तारों को लेकर बिजली विभाग को पूर्व में भी कई बार मौखिक व लिखित शिकायतें दी गई थीं, मगर जिम्मेदार कर्मचारियों ने तारों को कसने या सुरक्षित ऊंचाई पर दुरुस्त करने की कोई सुध नहीं ली। परिजनों का तर्क है कि यदि संबंधित विभाग समय रहते चेत जाता और ढीले तारों को ठीक करा देता, तो शार्दूल सिंह की जान नहीं जाती और यह भयानक हादसा होने से बच जाता।






















