राजस्थान के पाली जिले में ग्रेनाइट की ऊंची पहाड़ियों के बीच फैला जवाई क्षेत्र इन दिनों वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस इलाके में विचरण करने वाले तेंदुए केवल सामान्य जंगली जानवरों की तरह नहीं देखे जाते, बल्कि यहां रहने वाले कई तेंदुओं की अपनी अलग पहचान है और स्थानीय गाइड तथा लोग उन्हें विशेष नामों से पहचानते हैं। इसी कड़ी में लगभग छह वर्ष की मादा तेंदुआ पद्मा पर्यटकों के बीच खासी लोकप्रिय हो चुकी है। जवाई की प्राचीन चट्टानों पर धूप सेकते, शांति से विश्राम करते या ऊंची पहाड़ियों पर बेफिक्र घूमते हुए पद्मा अक्सर पर्यटकों के कैमरों में कैद होती रही है। हाल ही में इस मादा तेंदुआ का एक बेहद फुर्तीला शिकार करते हुए दुर्लभ दृश्य सामने आया, जिसे देखकर सफारी पर निकले सैलानी दंग रह गए।
ब्लैक हिल इलाके में बंदर का शिकार करती दिखी मादा तेंदुआ पद्मा
जवाई सफारी के दौरान सैणा क्षेत्र के ब्लैक हिल इलाके में यह रोमांचक घटनाक्रम देखने को मिला। सफारी पर सैलानियों को लेकर निकले गाइड वीरेंद्र सिंह सैणा के अनुसार, वे पर्यटकों के साथ नियमित सफारी भ्रमण पर थे। उसी समय ब्लैक हिल की पथरीली पहाड़ियों पर बंदरों का एक झुंड मौजूद था। तभी अचानक झाड़ियों और पत्थरों की ओट से निकली छह वर्षीय मादा तेंदुआ पद्मा ने बिजली जैसी तेजी से झपट्टा मारा और बंदर के एक बच्चे को अपना शिकार बना लिया। शिकार को अपने जबड़े में दबाकर पद्मा बेहद सहजता से अपने सुरक्षित प्राकृतिक आशियाने की ओर बढ़ गई। सफारी जीप में सवार पर्यटकों ने इस पूरे घटनाक्रम को न केवल अपनी आंखों से देखा, बल्कि अपने कैमरों और मोबाइल फोन में भी हमेशा के लिए रिकॉर्ड कर लिया। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि पद्मा अक्सर इसी इलाके में दिखाई देती है और उसका यह शांत लेकिन शिकार के वक्त आक्रामक अंदाज फोटोग्राफर्स को लगातार आकर्षित करता है।
करीब 20 गांवों में मौजूद हैं तेंदुओं के 60 से 70 परिवार
जवाई इलाके की अनूठी प्राकृतिक बनावट और यहां का संरक्षण मॉडल इसे पूरे विश्व में एक विशेष पहचान दिलाता है। सरकारी तौर पर इस पूरे परिक्षेत्र को जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया है। संरक्षण के बेहतर माहौल के कारण यहां तेंदुओं की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस संरक्षित क्षेत्र के दायरे में सैणा, पैरवा, जीवदा, बिसलपुर, दूदनी, कोठार, लालपुरा, सिवेरा और लुंदाड़ा समेत लगभग 20 गांव शामिल हैं। इन ग्रामीण इलाकों और उनके आसपास की पहाड़ियों में तेंदुओं के करीब 60 से 70 परिवार सुरक्षित तरीके से अपना जीवन बिता रहे हैं। इस पूरे क्षेत्र की सबसे अनूठी विशेषता यहां इंसानों और तेंदुओं के बीच का गहरा सह-अस्तित्व है। बस्तियों और कृषि भूमि के एकदम नजदीक रहने के बावजूद तेंदुओं और स्थानीय ग्रामीणों के बीच कभी हिंसक टकराव की स्थिति नहीं बनती, जो वन्यजीव संरक्षण की दुनिया में एक अनोखा उदाहरण माना जाता है।
दिग्गज हस्तियों और पर्यटकों की पसंदीदा सैरगाह बना जवाई
विशालकाय ग्रेनाइट चट्टानों, हरियाली और कलकल बहती जवाई नदी के खूबसूरत नजारों के बीच खुले में घूमते तेंदुओं को देखना पर्यटकों के लिए किसी सपने के सच होने जैसा रहता है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षित पर्यावास और लगातार लेपर्ड साइटिंग के कारण जवाई देश के सबसे प्रमुख वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशंस में शामिल हो चुका है। दुनिया भर में बेहतरीन लेपर्ड सफारी के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके का लुत्फ उठाने देश-विदेश के कई जाने-माने चेहरे भी पहुंच चुके हैं। खेल जगत से पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, राजनीति के क्षेत्र से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, तथा सिनेमा जगत से अभिनेता विक्की कौशल, कैटरीना कैफ और अक्षय कुमार जैसी कई मशहूर हस्तियां यहां आकर जवाई लेपर्ड सफारी और प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद ले चुकी हैं।

















