राजस्थान के प्रसिद्ध हिल स्टेशन आबूराज में अरावली पर्वतमाला के घने जंगलों के बीच वन्यजीवों को नजदीक से निहारने के लिए कई रोमांचक ठिकाने मौजूद हैं। माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी के भीतर स्थित ट्रैवर्स टैंक क्रोकोडाइल पार्क ऐसा ही एक चुनिंदा केंद्र है, जो प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचता है। मुख्य शहर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह क्षेत्र वन विभाग की देखरेख में संचालित होता है। यह एक मानव निर्मित जलाशय है, जिसकी मुख्य पहचान मगरमच्छों के प्राकृतिक प्रजनन और क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने वाले केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है। औपनिवेशिक काल में तैयार किया गया यह जलाशय आज भी जल संचयन के साथ-साथ वन्यजीवों की प्यास बुझाने का अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
कर्नल जीएच ट्रेवर की विरासत और जलाशय का इतिहास
स्थानीय टूरिस्ट गाइड प्रकाश कुमार के अनुसार इस जलाशय की नींव वर्ष 1897 में रखी गई थी। ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल जीएच ट्रेवर ने इस जल संरचना का निर्माण करवाया था और उनके सम्मान में ही इसका नाम ट्रैवर्स टैंक पड़ा। वक्त बीतने के साथ अरावली के जंगलों में फैले इस विशाल ताल ने पूरे परिक्षेत्र के वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी जल स्रोत का रूप ले लिया। दिन के समय यहां आने वाले सैलानियों को अक्सर जलाशय के किनारों पर उभरी चट्टानों पर विशालकाय मगरमच्छ धूप सेंकते हुए नजर आ जाते हैं। पत्थरों पर बिना हिले-डुले आराम फरमाते इन जीवों को देखना आगंतुकों के लिए बेहद रोमांचक साबित होता है। जलाशय के भीतर केवल मगरमच्छ ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रजातियों की मछलियां भी बड़ी संख्या में निवास करती हैं, जिससे यहां का जलीय संतुलन बना रहता है।
तेंदुए, भालू और दुर्लभ पक्षियों की मौजूदगी
जलीय जीवों के अलावा ट्रैवर्स टैंक के चारों ओर फैला वन क्षेत्र वन्यजीव फोटोग्राफरों और बर्ड वॉचर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। घने पेड़ों के बीच मोर और तीतर के अलावा विभिन्न प्रजातियों के पंछी निरंतर विचरण करते देखे जा सकते हैं। इस वन्यजीव इलाके में स्लॉथ बेयर और लेपर्ड जैसे शिकारी जानवरों की मौजूदगी भी दर्ज की जा चुकी है। हालांकि दिन के उजाले में इन जानवरों का दिखना हमेशा तय नहीं होता, लेकिन भोर के शांत समय ये वन्यजीव अक्सर अपनी प्यास बुझाने इस जलाशय के किनारे पहुंचते हैं।
प्रकृति के बीच शांति और सुरक्षा के सख्त नियम
चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों से घिरी यह जगह शहरी आपाधापी से दूर परिवार और मित्रों के साथ शांत समय बिताने का बेहतरीन विकल्प प्रस्तुत करती है। घने जंगलों से होकर गुजरने वाली संकरी पगडंडियां और प्राकृतिक परिदृश्य इसे माउंट आबू के अन्य पारंपरिक पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग पहचान दिलाते हैं। सैलानी यहां शांत परिवेश में वक्त बिताने, लैंडस्केप फोटोग्राफी करने और मगरमच्छों की सहज गतिविधियों को देखने पहुंचते हैं। चूंकि यह क्षेत्र सीधे तौर पर वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है, इसलिए आगंतुकों के लिए जंगली जानवरों से सुरक्षित फासला बनाए रखना और केवल वन विभाग द्वारा तय किए गए रास्तों व सीमाओं में रहना अनिवार्य किया गया है।
पहुंचने का मार्ग, शुल्क और व्यू पॉइंट
इस अनूठे पार्क तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को माउंट आबू शहर से गुरुशिखर रोड की दिशा में करीब 5 किलोमीटर आगे बढ़ना होता है। मुख्य सड़क पर वन विभाग की निर्धारित फीस चुकाने के पश्चात लगभग 1 किलोमीटर का सफर तय करके जलाशय तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क 130 रुपये तय किया गया है, जबकि निजी वाहन को भीतर ले जाने पर 300 रुपये का अतिरिक्त वाहन शुल्क अदा करना पड़ता है। जलाशय के निकट दो अलग-अलग पहाड़ियों पर बने आबू व्यू पॉइंट और वैली व्यू पॉइंट से पर्यटक अरावली की विस्तृत घाटियों और नीचे फैले प्राकृतिक नजारों का विहंगम दृश्य देख सकते हैं।
भ्रमण के लिए अनुकूल समय
इस वन्यजीव क्षेत्र की सैर के लिए मानसून के तुरंत बाद का मौसम सबसे शानदार माना जाता है। वर्षा ऋतु के ढलते ही अरावली की चोटियां और नीचे फैला जंगल नई हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं, जिससे वातावरण बेहद सुरम्य हो जाता है। इसके विपरीत, घनघोर बारिश के दौरान पूरी घाटी घने कोहरे और धुंध से ढकी रहती है, जिससे दृश्यता काफी घट जाती है। साथ ही जंगलों के कच्चे रास्तों पर फिसलन बढ़ने से पर्यटकों को आवाजाही में असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रकृति के करीब रहकर वन्यजीवों को देखने के शौकीनों के लिए मानसून के उपरांत की गई यात्रा माउंट आबू के इस क्रोकोडाइल पार्क को यादगार बना देती है।


















