श्रीगंगानगर नगर परिषद के सभापति चुनाव से ठीक पहले स्थानीय सियासत में जबरदस्त हलचल मच गई है। चुनावी मुकाबले के बीच अब पुलिस केस और गंभीर आरोपों का दौर शुरू हो चुका है। एक निर्दलीय पार्षद ने सीधे तौर पर यह आरोप लगाया है कि उन्हें अज्ञात फोन कॉल के जरिए एक खास उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता पार्षद हेमराज चौधरी की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। इस प्राथमिकी में निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा, स्थानीय व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह को नामजद किया गया है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, पार्षद को आई कॉल में कथित रूप से एक गैंगस्टर के नाम का सहारा लिया गया ताकि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। फोन करने वाले ने साफ तौर पर कहा कि मतदान के दिन पार्षद को संजय मुंदड़ा के पक्ष में ही अपना वोट देना होगा। इस घटनाक्रम के उजागर होते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और मामले की तकनीकी जांच आरंभ कर दी गई है। श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति की कुर्सी के लिए मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी अजय दावड़ा और पार्टी से बगावत कर निर्दलीय के रूप में उतरे संजय मुंदड़ा के बीच बना हुआ है। मतदान से ऐन पहले इस तरह की धमकी का मामला सामने आने से समूचे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।
गैंगस्टर के नाम पर दबाव बनाने का सनसनीखेज आरोप
निर्दलीय पार्षद हेमराज चौधरी ने पुलिस थाने में औपचारिक तहरीर देकर पूरे घटनाक्रम का ब्योरा दिया है। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने कथित तौर पर एक कुख्यात गैंगस्टर के नाम की धौंस जमाई। उसने दो टूक लहजे में निर्देश दिया कि नगर परिषद सभापति चुनाव में उन्हें केवल और केवल निर्दलीय प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के पक्ष में ही मतदान करना होगा। पार्षद का कहना है कि कॉल के दौरान उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया और अनुचित तरीके से मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इस बातचीत के बाद पार्षद ने सुरक्षा की चिंता जताते हुए सीधे पुलिस से संपर्क किया और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए केस दर्ज करवाया।
संजय मुंदड़ा, अशोक चांडक और मुकेश शाह पर कानूनी शिकंजा
पार्षद हेमराज चौधरी की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन प्रमुख व्यक्तियों के विरुद्ध नामजद एफआईआर दर्ज की है। इसमें निर्दलीय सभापति प्रत्याशी संजय मुंदड़ा के अलावा नामी व्यवसायी अशोक चांडक और कॉलोनाइजर मुकेश शाह शामिल हैं। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की वास्तविक सच्चाई अभी साबित होना बाकी है। पुलिस की जांच टीम अब तकनीकी विश्लेषण में जुट गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिस मोबाइल नंबर से धमकी भरी कॉल आई थी, वह किसके नाम पर पंजीकृत है, वास्तविक कॉल करने वाला कौन था और फोन पर वास्तव में किस गैंगस्टर के नाम का उल्लेख किया गया था। इस पड़ताल में संबंधित नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टावर लोकेशन जैसे अहम डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
अजय दावड़ा बनाम संजय मुंदड़ा: रोचक हुआ चुनावी गणित
श्रीगंगानगर नगर परिषद में सभापति का मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने अजय दावड़ा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं पार्टी के भीतर बगावत का झंडा उठाकर संजय मुंदड़ा बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं। इस दोतरफा खींचतान में नगर परिषद के प्रत्येक निर्वाचित पार्षद का समर्थन दोनों ही गुटों के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। सभापति पद की कुर्सी हासिल करने के लिए पार्षदों को अपने पाले में खींचने की सियासी कवायद लगातार चल रही थी, लेकिन मतदान से पहले धमकी के इस मामले ने पूरे चुनावी माहौल को बेहद तनावपूर्ण और संवेदनशील बना दिया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष तफ्तीश पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कॉल के पीछे वास्तविक सूत्रधार कौन था और इस धमकी के पीछे क्या साजिश थी।
जांच के बाद सामने आएंगे तथ्य, चुनाव पर टिकी नजरें
एफआईआर दर्ज करने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जांच अधिकारी तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ शिकायत में दर्ज तमाम बिंदुओं की सिलसिलेवार तस्दीक कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। वर्तमान में इस मामले में केवल शिकायतकर्ता पार्षद के आरोप और प्राथमिकी में शामिल नाम ही सामने आए हैं। नामजद आरोपियों की तरफ से यदि कोई आधिकारिक पक्ष या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे भी निष्पक्ष जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। मतदान से ठीक पहले घटे इस पूरे घटनाक्रम ने श्रीगंगानगर की सियासत का तापमान चरम पर पहुंचा दिया है। अब शहरवासियों और राजनीतिक जानकारों की नजरें एक तरफ जहां पुलिस की जांच पर हैं, वहीं दूसरी ओर सभापति पद के लिए होने वाले मतदान के नतीजों पर भी टिकी हुई हैं।



















