राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के लिए यह बेहद दुख की घड़ी है। नावां क्षेत्र के पांचोता गांव के नौजवान अग्निवीर खेमाराम कुमावत देश की सेवा करते हुए असम में हुए एक विमान हादसे में शहीद हो गए। जैसे ही उनकी शहादत की खबर इलाके में फैली, हर तरफ गम का माहौल बन गया और लोगों की आंखें भर आईं।
कैसे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक यह दर्दनाक घटना असम के जोरहाट एयरबेस पर उस वक्त घटी, जब भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान उतरने की तैयारी में था। लैंडिंग के दौरान ही विमान अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि रनवे पर उतरते ही विमान में आग की लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते वह दो टुकड़ों में बंट गया। इस भीषण दुर्घटना में पायलट समेत कुल पांच सैन्यकर्मियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, और इन्हीं में राजस्थान के वीर सपूत खेमाराम कुमावत भी थे।
गांव में पसरा सन्नाटा, परिवार बेहाल
खेमाराम के पैतृक गांव पांचोता तक जब यह मनहूस खबर पहुंची, तो पूरा गांव स्तब्ध रह गया। हालत यह रही कि लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। बेटे के शहीद होने की सूचना मिलते ही परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता और परिजन फूट-फूटकर रो रहे हैं और उन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है। आस-पास के गांव वाले और परिचित शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने उनके घर पहुंच रहे हैं, मगर इस गहरे जख्म को भर पाना किसी के बस की बात नहीं।
वीरों की धरती ने दी एक और कुर्बानी
नावां और डीडवाना-कुचामन का इलाका हमेशा से जांबाजों की भूमि रहा है। यहां के युवाओं में देश की सरहदों की हिफाजत का जज्बा कूट-कूटकर भरा रहता है। खेमाराम कुमावत ने भी फौज में जाकर मातृभूमि की सेवा का जो सपना संजोया था, उसे पूरा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनकी इस शहादत ने जहां हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया है, वहीं अपने इस लाल के सर्वोच्च बलिदान पर गांव को गर्व भी है। सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपाल तक, हर कोई नम आंखों से इस वीर शहीद को श्रद्धांजलि दे रहा है।
वायुसेना ने बैठाई जांच
इस गंभीर हादसे पर भारतीय वायुसेना (IAF) ने गहरा शोक जताया है। आला अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के पीछे तकनीकी खराबी रही या कोई और वजह, इसकी असली तह तक पहुंचने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी यानी उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शहीद खेमाराम का पार्थिव शरीर सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।













