अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास बड़े अतिक्रमण पर कार्रवाई
राजस्थान के बाड़मेर जिले के गडरारोड उपखंड क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन और स्थानीय राजस्व विभाग की टीमों ने भारी पुलिस बल के साथ सीमावर्ती गांवों कारकोरी और मालाणा पहुंचकर अवैध रूप से किए गए अतिक्रमण को पूरी तरह से हटा दिया है।
अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया
गडरारोड उपखंड प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई सीमावर्ती कारकोरी और मालाणा गांवों में की गई। प्रशासन को लंबे समय से इन दोनों गांवों में सरकारी जमीनों, जिनमें गोचर भूमि और अन्य राजकीय भूमि शामिल हैं, पर अवैध कब्जों की शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनजर, भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान, पिछले कुछ सालों में सरकारी जमीनों पर बिना अनुमति के बनाए गए पक्के और कच्चे भवनों सहित अन्य निर्माणों को जेसीबी (पीले पंजे) की मदद से पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप: जानबूझकर गिराई गई मस्जिद
इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सरहदी इलाके में तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है। सीमांत क्षेत्र के स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई के समय और तरीके पर तीखे सवाल उठाए हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि प्रशासन ने द्वेषतापूर्ण रवैया अपनाते हुए यह कार्रवाई की है।
ग्रामीणों ने बेहद भावुक और आक्रोशित लहजे में कहा, “प्रशासन ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर जानबूझकर हमारी पवित्र मस्जिद को निशाना बनाया और उसे गिरा दिया। यह कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा है।”
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वे कई दशकों से इस सरजमीं पर शांतिपूर्वक रह रहे हैं, लेकिन बिना किसी उचित समय और पूर्व सूचना के उनके आशियानों और धार्मिक स्थल पर यह कार्रवाई की गई।
सरहदी ग्रामीणों ने अपनी राष्ट्रभक्ति पर दिया जोर
मस्जिद गिराए जाने के बाद उपजे विवाद के बीच, स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के प्रबुद्ध लोगों और युवाओं ने अपनी देशभक्ति को पुरजोर तरीके से देश के सामने रखा है। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि सरहद पर रहने वाला हर एक नागरिक पक्का राष्ट्रभक्त है।
अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं ने कहा: “हम इस देश की मिट्टी से जुड़े हैं। सरहद पर रहते हुए हम हमेशा देश की सुरक्षा के लिए चौकस रहते हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी हमारे मुल्क (भारत) को जरूरत होगी, सरहद का यह अल्पसंख्यक समाज देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने में सबसे आगे खड़ा रहेगा। हमारी देशभक्ति पर सवाल उठाना गलत है, लेकिन प्रशासन को भी हमारी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था।”
प्रशासन का स्पष्टीकरण: केवल सरकारी जमीन से हटा अवैध कब्जा
इधर, इस पूरे मामले पर बढ़ते बवाल को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों का कहना है कि यह कोई सांप्रदायिक या किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाकर की गई कार्रवाई नहीं है। यह विशुद्ध रूप से कानून के तहत की गई अतिक्रमण विरोधी मुहिम थी। सीमाई क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त रखना बेहद अनिवार्य है, इसी के तहत कारकोरी और मालाणा में सरकारी चारागाह और राजकीय भूमियों से अवैध निर्माणों को पूरी विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए हटाया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।













