भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ते हुए वंदे भारत प्लेटफॉर्म पर आधारित देश की पहली फ्रेट EMU ट्रेन का तकनीकी ट्रायल शुरू कर दिया है. राजस्थान के कोटा डिवीजन में पहले ही दिन इस ट्रेन ने 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़कर सबको चौंका दिया. यह ट्रायल भविष्य में तेज और आधुनिक माल ढुलाई की एक नई तस्वीर पेश कर रहा है.
कैसी है यह ट्रेन, कितनी है क्षमता
इस प्रोटोटाइप ट्रेन को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने तैयार किया है और इसमें कुल 16 कोच लगाए गए हैं. इनमें 12 पार्सल कोच, 2 रेफ्रिजरेटेड DTC कोच और 2 नॉन-ड्राइविंग ट्रेलर कोच शामिल हैं. ट्रेन में वंदे भारत जैसा ही आधुनिक बोगी सिस्टम लगाया गया है और इसका एक्सल लोड 20 टन से भी ज्यादा है. रेलवे के मुताबिक इस ट्रेन की कुल पेलोड क्षमता 397 टन से अधिक है, यानी एक ही बार में यह पहले से कहीं ज्यादा सामान ढो सकती है.
कोटा से महिदपुर रोड तक कैसे चला ट्रायल
ट्रायल रन के लिए यह ट्रेन कोटा से सुबह 6 बजे महिदपुर रोड के लिए रवाना हुई. शुरुआत में इसे 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति पर परखा गया, फिर धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाकर 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाई गई. वापसी के सफर में फ्रेट EMU ने 145 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति दर्ज की, जो इस पूरे ट्रायल का सबसे बड़ा नतीजा रहा. अब अगले एक महीने तक अलग-अलग परिस्थितियों में इस ट्रेन के कम से कम दो राउंड ट्रिप रोजाना कराए जाएंगे, ताकि हर मौसम और हर हालात में इसका प्रदर्शन परखा जा सके.
सुरक्षा और तकनीक की हर कसौटी पर होगी परीक्षा
इस ट्रायल के दौरान 120 से 145 किलोमीटर प्रति घंटे तक अलग-अलग गति पर ट्रेन की स्थिरता की बारीकी से जांच होगी. इमरजेंसी ब्रेकिंग किस तरह काम करती है, कपलर पर कितना फोर्स पड़ता है, मोड़ पर ट्रेन का प्रदर्शन कैसा रहता है और ट्रैक्शन सिस्टम कितना भरोसेमंद है, इन सभी पहलुओं को परखा जाएगा. इसके अलावा रीजेनरेटिव एनर्जी, सिग्नलिंग व्यवस्था, टेलीकॉम इंटरफेरेंस और दरवाजों की सुरक्षा जैसे तकनीकी पहलू भी टेस्ट के दायरे में रहेंगे. ट्रेन के भीतर लगे CCTV, लाइटिंग सिस्टम और शॉर्ट-सर्किट प्रोटेक्शन जैसे इंटरनल सिस्टम की भी पूरी जांच की जाएगी.
ई-कॉमर्स और कारोबार को कैसे मिलेगा फायदा
तेज रफ्तार वाली यह फ्रेट EMU ई-कॉमर्स और एक्सप्रेस पार्सल कारोबार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है. कम समय में सामान गंतव्य तक पहुंचने से टाइम-सेंसिटिव लॉजिस्टिक्स कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इसमें लगे रेफ्रिजरेटेड कोच ठंडे तापमान में भेजे जाने वाले सामान की ढुलाई को भी आसान बना देंगे. यानी अब भारतीय रेलवे की पटरियों पर सिर्फ यात्रियों की ही नहीं, बल्कि कारोबार की रफ्तार भी तेज होने वाली है.
आगे की राह
भारतीय रेलवे का मकसद माल परिवहन को तेज, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाना है, और वंदे भारत फ्रेट EMU को इसी बड़े बदलाव की दिशा में एक अहम प्रयोग माना जा रहा है. अगर यह परीक्षण सफल रहता है, तो आने वाले समय में ऐसी ट्रेनें देश के तेज माल परिवहन नेटवर्क का अहम हिस्सा बन सकती हैं. 145 किलोमीटर प्रति घंटे की इस पहली छलांग ने रेलवे के इस नए मिशन को साफ तौर पर रफ्तार दे दी है.



















