मानसून के शुरुआती दौर में बारिश की रफ्तार धीमी रहने के बावजूद सीकर जिले के किसानों के उत्साह में कोई कमी दर्ज नहीं की गई है। चालू खरीफ फसल सत्र के दौरान जिले भर के कृषकों ने बाजरे की बुवाई में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कृषि विभाग की ओर से तय किए गए शुरुआती अनुमानों और सरकारी लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए किसानों ने इस प्रमुख मोटे अनाज की बड़े पैमाने पर बुवाई पूरी कर ली है। इससे आने वाले महीनों में बेहतर पैदावार के साथ-साथ मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा मिलने की उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं।
लक्ष्य से 30 हजार हेक्टेयर आगे निकला बाजरे का रकबा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में सीकर जिले के लिए बाजरे की बुवाई का लक्ष्य 2.10 लाख हेक्टेयर तय किया गया था। हालांकि, कृषि क्षेत्र में किसानों की तत्परता की वजह से वास्तविक बुवाई का आंकड़ा 2.40 लाख हेक्टेयर से अधिक के स्तर को पार कर गया है। इस तरह बाजरे का कुल क्षेत्रफल तय लक्ष्य की तुलना में लगभग 30 हजार हेक्टेयर ज्यादा दर्ज किया गया है। अगर पिछले वर्ष के आंकड़ों से इसकी तुलना की जाए, तो इस बार जिले में बाजरे की खेती के तहत 60 हजार हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त भूमि को शामिल किया गया है।
समय पर हुई बारिश और अनुकूल मौसम का मिला साथ
खेती के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के पीछे जून के तीसरे सप्ताह में दर्ज की गई प्री-मानसून वर्षा को मुख्य कारण माना जा रहा है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक शिवजी राम कटारिया के मुताबिक, जून के उत्तरार्ध में हुई समयबद्ध बारिश ने किसानों को समय से पहले तैयारी करने का अवसर दिया। परिणामस्वरूप, कृषकों ने पिछले साल की तुलना में करीब 15 दिन पहले ही अपने खेतों में बुवाई का काम निपटा लिया। सही समय पर बोए जाने के कारण फसलों की शुरुआती बढ़वार काफी अच्छी रही और पौधे समय रहते मजबूत स्थिति में पहुंच गए। इसके बाद साफ धूप मिलने, समय पर निराई-गुड़ाई होने और मानसून की दोबारा सक्रियता ने फसलों की वृद्धि को अतिरिक्त गति प्रदान की।
कम बारिश के बावजूद वैज्ञानिक तरीकों से संभली स्थिति
वर्षा के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में इस साल मानसून की स्थिति औसतन कमजोर ही रही है। आंकड़ों के अनुसार 1 अगस्त तक जिले में सामान्य तौर पर 272 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जानी चाहिए थी, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल 204 मिलीमीटर वर्षा ही दर्ज की गई है। वहीं, बीते वर्ष इसी समयावधि तक 405 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी, जिसका सीधा मतलब है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार 201 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। इस मौसमी घाटे के बावजूद किसानों की सूझबूझ, उन्नत कृषि पद्धतियों और खेतों में नियमित देखभाल के कारण फसलों को जल संकट से बचा लिया गया। फसलों पर किसी तरह के गंभीर कीट या रोग का प्रकोप भी देखने को नहीं मिला है।
खरीफ की अन्य प्रमुख फसलों का ताजा आंकड़ा
जिले में कुल खरीफ फसलों की बुवाई का प्रदर्शन भी काफी संतुलित नजर आ रहा है। कुल 4.33 लाख हेक्टेयर के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक 4.28 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में बुवाई का काम पूरा हो चुका है। बाजरे के अलावा अन्य फसलों की स्थिति भी संतोषजनक बनी हुई है
- ग्वार: 1.07 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई है।
- मूंग: कुल 30,850 हेक्टेयर भूमि में बोया गया है।
- मूंगफली: 28,556 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसकी खेती हो रही है।
- चंवला: 12,322 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज हुई है।
- मोठ: 926 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है।
उत्पादन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि अगस्त और सितंबर के महीनों में मौसम का मिजाज इसी प्रकार अनुकूल बना रहता है, तो जिले में खरीफ उत्पादन के पुराने सारे रिकॉर्ड टूट सकते हैं। बाजरे की बंपर फसल से न केवल किसानों की कुल आय में इजाफा होगा, बल्कि मवेशियों के लिए सूखे चारे की किल्लत भी पूरी तरह दूर हो जाएगी। इसके अलावा, पैदावार बढ़ने से स्थानीय कृषि उपज मंडियों में अनाज की आवक बढ़ेगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।


















