राजस्थान के बाड़मेर नगर परिषद चुनाव में शपथ पत्रों के जरिए सामने आए संपत्ति के आंकड़ों ने प्रत्याशियों की आर्थिक हैसियत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मैदान में उतरे 179 उम्मीदवारों में से 17 करोड़पति हैं, जबकि एक प्रत्याशी ऐसा भी है जिसकी कुल जमा पूंजी केवल 10 हजार रुपये है। यानी एक ही चुनावी अखाड़े में करोड़ों की दौलत वाले चेहरे और बेहद मामूली संपत्ति वाले उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
सबसे धनी प्रत्याशी दमाराम माली
वार्ड संख्या 19 से चुनाव लड़ रहे भाजपा प्रत्याशी दमाराम माली के पास सबसे ज्यादा संपत्ति दर्ज है। पेशे से व्यवसायी दमाराम माली ने अपने शपथ पत्र में करीब 13.57 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है, जो उन्हें पूरे चुनाव क्षेत्र का सबसे संपन्न उम्मीदवार बनाती है।
अन्य करोड़पति उम्मीदवार भी मैदान में
दमाराम माली अकेले नहीं हैं जिनके पास बड़ी दौलत है। वार्ड संख्या 13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश के पास करीब 6.66 करोड़ रुपये की संपत्ति है, वहीं वार्ड संख्या 48 से भाजपा प्रत्याशी खीमराज ने करीब 6.32 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है। वार्ड संख्या 26 से चुनाव लड़ रहे मुकेश जैन के पास लगभग 3.93 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है। इन आंकड़ों से साफ है कि करोड़पति उम्मीदवारों की फेहरिस्त सिर्फ एक-दो नामों तक सीमित नहीं, बल्कि कई वार्डों में फैली हुई है।
सबसे कम संपत्ति वाले चेहरे
दूसरी तरफ, वार्ड संख्या 36 से भाजपा प्रत्याशी हंसराज ने अपनी कुल संपत्ति महज 10 हजार रुपये घोषित की है, जिससे वे इस चुनाव में सबसे कम संपत्ति वाले उम्मीदवार बन गए हैं। हंसराज निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं। इसी तरह वार्ड संख्या 35 से निर्दलीय प्रत्याशी मूलाराम की संपत्ति भी करीब 12 हजार रुपये ही है, जिससे वे भी सीमित आर्थिक हैसियत वाले प्रत्याशियों की सूची में शामिल हो जाते हैं। इन दोनों नामों ने दिखा दिया है कि चुनाव लड़ने के लिए भारी-भरकम बैंक बैलेंस जरूरी नहीं है।
वादों पर भरोसा, दौलत पर नहीं
शपथ पत्रों में सामने आए इन आंकड़ों ने बाड़मेर नगर परिषद चुनाव में प्रत्याशियों की माली हालत को चर्चा का विषय बना दिया है। एक ही चुनाव में करोड़ों की संपत्ति वाले नेता और मुट्ठी भर रकम वाले उम्मीदवार, दोनों जनता से एक जैसा भरोसा और वोट मांग रहे हैं। हंसराज ने कहा, "भले ही उनके पास दौलत नहीं है लेकिन जो वादे किए हैं उस पर खरा उतरूंगा।" चुनाव प्रचार के दौरान सभी प्रत्याशी अपने-अपने मुद्दे लेकर मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं और जीत मिलने पर वार्ड के विकास का भरोसा दिला रहे हैं। संपत्ति के इन आंकड़ों ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या मतदाता उम्मीदवार की दौलत देखकर वोट करेंगे या उसके वादों और जमीनी काम को तरजीह देंगे।



















