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धौलपुर के राजमहल के पास बना यह मंदिर आज भी बयां करता है रियासतकाल की भव्यताराजस्थान
8 सित॰ 2026, 1:10 pm (1 घंटे पहले)· 2

धौलपुर के राजमहल के पास बना यह मंदिर आज भी बयां करता है रियासतकाल की भव्यता

राजस्थान के धौलपुर में राजमहल के पास बना 118 साल पुराना राधा विहारी मंदिर महाराज राणा रामसिंह की धार्मिक आस्था और रियासतकालीन स्थापत्य कला की मिसाल है।

राजस्थान के धौलपुर शहर में रियासतकाल की यादें आज भी कई पुरानी इमारतों और मंदिरों की दीवारों में जिंदा हैं। जिला मुख्यालय पर बना राधा विहारी मंदिर इन्हीं धरोहरों में से एक है, जो अपनी 118 साल पुरानी विरासत और खूबसूरत नक्काशी के लिए पहचाना जाता है।

1908 में हुआ था मंदिर का निर्माण

इस मंदिर को बनवाने का श्रेय धौलपुर रियासत के महाराज राणा रामसिंह को जाता है। उन्होंने साल 1908 में इसका निर्माण करवाया था, यानी आज यह मंदिर करीब 118 साल पुराना हो चुका है। मंदिर को बनाने में धौलपुर के मशहूर लाल और सफेद बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया, जो इस इलाके की पहचान रहा है। पत्थरों को बारीकी से तराशकर दीवारों पर कई सुंदर आकृतियां और कलाकृतियां उकेरी गई हैं, जो मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं। इसकी पूरी बनावट में रियासतकालीन स्थापत्य कला की झलक साफ नजर आती है।

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राजमहल के पास बनवाया गया मंदिर

इतिहासकार अरविंद शर्मा के मुताबिक धौलपुर जिला मुख्यालय पर रियासत युग के कई ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं, जिनमें भगवान नरसिंह जी का मंदिर, ऐतिहासिक चोपड़ा मंदिर और निहालेश्वर मंदिर प्रमुख माने जाते हैं। इन्हीं में राधा विहारी मंदिर का भी खास स्थान है। अरविंद शर्मा बताते हैं कि महाराज राणा रामसिंह ने यह मंदिर जानबूझकर राजमहल के बिल्कुल नजदीक बनवाया था, ताकि वे आसानी से यहां आ सकें। महाराज खुद भी भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दर्शन करने के लिए इस मंदिर में आया करते थे। इससे साफ पता चलता है कि यह मंदिर उनकी निजी धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था से भी गहरे तौर पर जुड़ा हुआ था।

श्रीकृष्ण और राधा रानी की भव्य प्रतिमाएं

मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की आकर्षक और भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु सिर्फ पूजा-अर्चना ही नहीं करते, बल्कि मंदिर की प्राचीन बनावट और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी को भी गौर से देखते हैं। सैलानी और स्थानीय लोग अक्सर इसकी वास्तुकला की तारीफ करते नजर आते हैं।

118 साल से आस्था और गौरव का केंद्र

राधा विहारी मंदिर आज धौलपुर की ऐतिहासिक विरासत का एक अहम हिस्सा बन चुका है। पिछले करीब 118 वर्षों से यह मंदिर न सिर्फ लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है, बल्कि शहर के गौरव का प्रतीक भी बना हुआ है। इसकी पुरानी दीवारें, लाल-सफेद पत्थरों से बनी खूबसूरत बनावट और रियासतकालीन कला मिलकर धौलपुर के समृद्ध इतिहास की कहानी बयां करती हैं। आज भी शहर में आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर की भव्यता देखकर रियासतकालीन दौर की झलक महसूस करते हैं।

सवाल-जवाब

राधा विहारी मंदिर कब बनवाया गया था?
इसे 1908 में महाराज राणा रामसिंह ने बनवाया था, जिससे आज यह करीब 118 साल पुराना हो चुका है।
यह मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के धौलपुर जिला मुख्यालय पर राजमहल के बिल्कुल नजदीक स्थित है।
मंदिर किस पत्थर से बनाया गया है?
मंदिर को धौलपुर के मशहूर लाल और सफेद बलुआ पत्थर से बनाया गया है।
मंदिर में किन देवताओं की प्रतिमाएं हैं?
मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं।
महाराज राणा रामसिंह का इस मंदिर से क्या नाता था?
महाराज खुद भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दर्शन के लिए यहां आते थे और उन्होंने ही इसे बनवाया था।
धौलपुर में और कौन-कौन से रियासतकालीन मंदिर मौजूद हैं?
इतिहासकार अरविंद शर्मा के मुताबिक भगवान नरसिंह मंदिर, ऐतिहासिक चोपड़ा मंदिर और निहालेश्वर मंदिर भी प्रमुख हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

रोहन वर्मा की टिप्पणी: धौलपुर के इस 118 साल पुराने राधा विहारी मंदिर और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में प्रशासन को अब एक ठोस नीति बनानी चाहिए। जिस प्रकार लाल और सफेद बलुआ पत्थर से बनी यह रियासतकालीन वास्तुकला पर्यटकों को आकर्षित करती है, यदि इसे हेरिटेज टूरिज्म सर्किट से जोड़ दिया जाए, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है और ऐतिहासिक संस्कृति का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

रोहन वर्मा के सुझाव को आगे बढ़ाते हुए, इस 118 साल पुराने राधा विहारी मंदिर जैसी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और हेरिटेज टूरिज्म के विस्तार में सुरक्षा एक अहम् पहलू है। देश के अन्य ऐतिहासिक शहरों की तरह धौलपुर में भी पर्यटन बढ़ने पर पुरातात्विक चोरी, अनधिकृत निर्माण और प्राचीन मूर्तियों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल या पर्यटन सुरक्षा इकाई की तैनाती बेहद जरूरी है। इसके बिना न केवल सार्वजनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, बल्कि रियासतकालीन संपदा की सुरक्षा पर भी जोखिम आ सकता है।

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