राजस्थान के धौलपुर शहर में रियासतकाल की यादें आज भी कई पुरानी इमारतों और मंदिरों की दीवारों में जिंदा हैं। जिला मुख्यालय पर बना राधा विहारी मंदिर इन्हीं धरोहरों में से एक है, जो अपनी 118 साल पुरानी विरासत और खूबसूरत नक्काशी के लिए पहचाना जाता है।
1908 में हुआ था मंदिर का निर्माण
इस मंदिर को बनवाने का श्रेय धौलपुर रियासत के महाराज राणा रामसिंह को जाता है। उन्होंने साल 1908 में इसका निर्माण करवाया था, यानी आज यह मंदिर करीब 118 साल पुराना हो चुका है। मंदिर को बनाने में धौलपुर के मशहूर लाल और सफेद बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया, जो इस इलाके की पहचान रहा है। पत्थरों को बारीकी से तराशकर दीवारों पर कई सुंदर आकृतियां और कलाकृतियां उकेरी गई हैं, जो मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं। इसकी पूरी बनावट में रियासतकालीन स्थापत्य कला की झलक साफ नजर आती है।
राजमहल के पास बनवाया गया मंदिर
इतिहासकार अरविंद शर्मा के मुताबिक धौलपुर जिला मुख्यालय पर रियासत युग के कई ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं, जिनमें भगवान नरसिंह जी का मंदिर, ऐतिहासिक चोपड़ा मंदिर और निहालेश्वर मंदिर प्रमुख माने जाते हैं। इन्हीं में राधा विहारी मंदिर का भी खास स्थान है। अरविंद शर्मा बताते हैं कि महाराज राणा रामसिंह ने यह मंदिर जानबूझकर राजमहल के बिल्कुल नजदीक बनवाया था, ताकि वे आसानी से यहां आ सकें। महाराज खुद भी भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के दर्शन करने के लिए इस मंदिर में आया करते थे। इससे साफ पता चलता है कि यह मंदिर उनकी निजी धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था से भी गहरे तौर पर जुड़ा हुआ था।
श्रीकृष्ण और राधा रानी की भव्य प्रतिमाएं
मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की आकर्षक और भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं। यहां दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु सिर्फ पूजा-अर्चना ही नहीं करते, बल्कि मंदिर की प्राचीन बनावट और पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी को भी गौर से देखते हैं। सैलानी और स्थानीय लोग अक्सर इसकी वास्तुकला की तारीफ करते नजर आते हैं।
118 साल से आस्था और गौरव का केंद्र
राधा विहारी मंदिर आज धौलपुर की ऐतिहासिक विरासत का एक अहम हिस्सा बन चुका है। पिछले करीब 118 वर्षों से यह मंदिर न सिर्फ लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है, बल्कि शहर के गौरव का प्रतीक भी बना हुआ है। इसकी पुरानी दीवारें, लाल-सफेद पत्थरों से बनी खूबसूरत बनावट और रियासतकालीन कला मिलकर धौलपुर के समृद्ध इतिहास की कहानी बयां करती हैं। आज भी शहर में आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस मंदिर की भव्यता देखकर रियासतकालीन दौर की झलक महसूस करते हैं।





















