जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों के बीच पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा स्वावलंबन का संदेश फैलाने के उद्देश्य से आईआईटी बॉम्बे के पूर्व प्राध्यापक और 'सोलर मैन ऑफ इंडिया' नाम से प्रख्यात प्रो. चेतन सोलंकी अपनी विशेष सोलर बस के जरिए उदयपुर पहुंचे हैं। अपनी इस विशिष्ट यात्रा के दौरान उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे तेजी से बदलते मौसम और वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि की गंभीरता को समझें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय में सौर ऊर्जा को अपनाना और बिजली की बचत करना महज एक विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य जरूरत बन चुका है।
चलते-फिरते घर और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में सोलर बस
उदयपुर पहुंचे प्रो. चेतन सोलंकी की यह बस कोई सामान्य वाहन नहीं है, बल्कि इसे एक पूर्णतः आत्मनिर्भर इकाई के रूप में तैयार किया गया है। यह बस उनके लिए एक चलता-फिरता मकान, कार्यालय, बैठक कक्ष और प्रशिक्षण संस्थान का काम करती है। बस की छत पर अत्याधुनिक सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनसे उत्पन्न होने वाली सौर बिजली से बस के भीतर मौजूद तमाम आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण संचालित होते हैं। इसमें निवास करने, भोजन पकाने, दैनिक कार्य निपटाने, बैठकें आयोजित करने और यात्रा करने की सभी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। इस प्रयोग के माध्यम से वे जनसामान्य को यह दिखाना चाहते हैं कि सीमित संसाधनों के सही उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा के साथ भी एक आरामदायक, सुविधाजनक और सम्मानजनक जीवन सरलता से व्यतीत किया जा सकता है।
भारत क्लाइमेट सत्याग्रह और 11 वर्षीय ऊर्जा स्वराज अभियान
प्रो. चेतन सोलंकी वर्तमान में 13 मई से 20 अगस्त 2026 तक आयोजित की जा रही 100 दिनों की 'भारत क्लाइमेट सत्याग्रह यात्रा' के अंतर्गत देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रहे हैं। यह अल्पकालिक अभियान वास्तव में उनकी उस दीर्घकालिक 'एनर्जी स्वराज यात्रा' का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत उन्होंने नवंबर 2020 में की थी और जो कुल 11 वर्षों तक जारी रहने वाली है। इस व्यापक संकल्प के तहत उन्होंने यह प्रतिज्ञा ली है कि जब तक यह 11 साल का जागरूकता अभियान पूरा नहीं हो जाता, तब तक वे अपने घर वापस नहीं लौटेंगे और लगातार देश भ्रमण कर लोगों को ऊर्जा संरक्षण के प्रति सजग करेंगे। उनका मानना है कि बढ़ते तापमान और ऊर्जा संकट जैसी विकराल समस्याओं का समाधान केवल सरकार या संस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सीधी भागीदारी अनिवार्य है। यदि देश का हर परिवार नियमित रूप से बिजली बचाए और सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ विकल्पों को अपनाए, तो पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।
उपलब्धियां, विशाल जनसंवाद और वैश्विक पहचान
अपनी इस निरंतर जारी यात्रा के दौरान प्रो. चेतन सोलंकी अब तक संपूर्ण भारत में लगभग 80 हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 1800 से ज्यादा सार्वजनिक व्याख्यान दिए हैं, 5 लाख से अधिक लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया है और 20 लाख से ज्यादा नागरिकों को ऊर्जा साक्षरता का पाठ पढ़ाया है। इससे पूर्व आईआईटी बॉम्बे में अपने शैक्षणिक कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करते हुए करीब 75 लाख ग्रामीण एवं शहरी परिवारों तक स्वच्छ रोशनी पहुंचाने की परियोजनाओं में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में उनके इस अप्रतिम योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है और उन्हें विश्व के 15 प्रमुख वैचारिक प्रमुखों (थॉट लीडर्स) की सूची में स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 में उन्होंने 'फाइनाइट अर्थ मूवमेंट' की नींव रखी है, जिसका दूरगामी लक्ष्य वर्ष 2027 तक विश्व भर के 1 अरब लोगों को जलवायु रक्षा और ऊर्जा स्वराज के इस जन-आंदोलन से जोड़ना है।



















