राजस्थान के भरतपुर जिले में मौजूद बयाना इलाके के खेतों में इन दिनों मिर्च की नई फसल की रोपाई और बुवाई की गतिविधियां जोरों पर हैं. स्थानीय काश्तकार अपनी जमीनों की जुताई कर रहे हैं और व्यवस्थित क्यारियां तैयार करके उनमें मिर्च की नई पौध रोपने में जुटे हैं. इस समय का मौसम खेती के लिए माकूल बना हुआ है, जिसकी वजह से किसानों के बीच इस नकदी फसल को लेकर अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है. मौजूदा बुवाई सत्र में सबसे खास बात यह सामने आई है कि किसान मिर्च की ईगल किस्म की ओर सबसे ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं.
ईगल किस्म के प्रति किसानों के बढ़ते आकर्षण के मुख्य कारण
क्षेत्रीय किसानों के मुताबिक मिर्च की ईगल वैरायटी के पौधों का विकास बहुत तेज गति से होता है. यह किस्म बेहद कम समय के भीतर अच्छी लंबाई और मजबूती हासिल कर लेती है, जिससे फसल का चक्र जल्दी पटरी पर आ जाता है. इसके अलावा किसानों का आकलन है कि इस किस्म को बहुत अधिक पेचीदा देखभाल की जरूरत नहीं होती. सामान्य देखरेख और संतुलित प्रबंधन के साथ भी यह किस्म शानदार पैदावार देने की भरपूर क्षमता रखती है. इसी खासियत को देखते हुए बयाना बेल्ट के कई गांवों में किसान अपने खेतों में बड़े पैमाने पर ईगल मिर्च की पौध लगा रहे हैं.
रोपाई से पहले खेतों की तैयारी और शुरुआती प्रबंधन
मिर्च की सफल खेती सुनिश्चित करने के लिए किसान जमीन की तैयारी पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. पौधे लगाने से पहले खेतों की गहरी और अच्छी जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बनाया जाता है. मिट्टी तैयार होने के बाद खेतों में व्यवस्थित क्यारियां ढाली जाती हैं. इन क्यारियों का फायदा यह होता है कि पौधों को फैलने के लिए पर्याप्त फासला मिलता है और सिंचाई का पानी बिना रुके हर पौधे की जड़ तक आसानी से पहुंच जाता है. कृषि जानकारों के अनुसार जब पौधे छोटे होते हैं, तब नियमित सिंचाई, खरपतवार हटाने के लिए समय पर निराई-गुड़ाई और जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति करना फसल के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य कदम हैं.
मुनाफे की आस और फसल की बेहतर सेहत का भरोसा
बयाना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में मिर्च की फसल किसानों की कमाई का एक मजबूत जरिया साबित हो रही है. साल भर मंडियों में हरी मिर्च की मांग बनी रहने से उत्पादकों को बेहतर लाभ की उम्मीद रहती है. हालांकि कुल मुनाफा और वास्तविक उत्पादन काफी हद तक मौसम की स्थिति, फसल के रख-रखाव और मंडियों के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है. किसानों का मानना है कि अगर आगामी दिनों में भी मौसम का मिजाज साथ देता रहा और फसल कीटों अथवा संक्रामक रोगों के असर से बची रही, तो ईगल किस्म का उत्पादन पिछले सारे अनुमानों से बेहतर रहेगा.
















