जालोर की स्थानीय सब्जी मंडी में इन दिनों एक बेहद दुर्लभ और अनूठी सब्जी ग्राहकों का मुख्य आकर्षण बनी हुई है। पहली नजर में देखने पर कोई भी इसे सामान्य लौकी मानकर धोखा खा सकता है, मगर इसे काटते ही इसका असली रूप सामने आ जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे बालम ककड़ी कहा जाता है। यह पूरे बारह महीने बाजार में नजर नहीं आती, बल्कि साल के एक बेहद सीमित दौर में ही इसकी आवक होती है। यही वजह है कि इसके खास स्वाद और गुणों के मुरीद लोग पूरे साल इसके आने की राह देखते हैं और मंडी में पहुंचते ही इसे हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
बाहर से लौकी का रूप और अंदर अनोखा हरा-केसरिया रंग
बालम ककड़ी की सबसे बड़ी पहचान इसका अनूठा रंग-रूप और स्वाद है। बाहर से इसका छिलका और बनावट बिल्कुल लौकी की तरह दिखाई देती है, जिससे पहली बार देखने वाले खरीदार अकसर उलझन में पड़ जाते हैं। हालांकि, चाकू लगते ही इसके अंदर दोहरे रंगों की छटा नजर आती है। इसके गूदे में एक साथ हरा और केसरिया रंग साफ दिखाई देता है। जहां आम ककड़ियां स्वाद में हल्की कसैली या फीकी होती हैं, वहीं बालम ककड़ी का स्वाद प्राकृतिक रूप से काफी मीठा होता है। एक बार इसका स्वाद चखने के बाद लोग नियमित रूप से इसे अपनी टोकरी में शामिल करने लगते हैं।
सितंबर से अक्टूबर के बीच केवल 25 से 30 दिनों का सीमित सीजन
इस ककड़ी की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुत छोटा जीवन चक्र है। जालोर सब्जी मंडी व्यापारी अध्यक्ष रामाराम माली ने इस उपज के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि बालम ककड़ी की आवक मुख्य रूप से सितंबर महीने से शुरू होती है और यह अक्टूबर के शुरुआती कुछ हफ्तों तक ही उपलब्ध रहती है। जालोर में इस छोटे से अंतराल के दौरान खरीदार भारी संख्या में इसे लेने आते हैं, जिससे इसकी जबरदस्त बिक्री दर्ज की जाती है।
वहीं सब्जी मंडी के एक अन्य व्यापारी दिलीप कुमार ने बताया कि यह अनोखी ककड़ी बाजार में मुश्किल से 25 से 30 दिनों के लिए ही दिखाई देती है। उपलब्धता का समय बहुत कम होने के कारण इस दौरान इसकी मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। लोग जानते हैं कि अगर इस एक महीने में इसे नहीं खरीदा गया, तो फिर इसका स्वाद चखने के लिए अगले साल के सितंबर-अक्टूबर का ही इंतजार करना पड़ेगा।
स्वास्थ्य के लिए लाभकारी और 85 प्रतिशत तक पानी की मात्रा
व्यापारी रामाराम माली के अनुसार, बालम ककड़ी सिर्फ अपने अनोखे रूप के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यह सेहत के लिहाज से भी काफी गुणकारी है। इस ककड़ी में प्राकृतिक रूप से करीब 85 प्रतिशत तक पानी मौजूद होता है। ऐसे में शरीर में निर्जलीकरण यानी पानी की कमी को पूरा करने के लिए इसका सेवन बेहद उपयोगी माना जाता है।
व्यापारी दिलीप कुमार ने भी इसके औषधीय महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि यह ककड़ी पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मददगार साबित होती है। शरीर की आंतरिक नमी बनाए रखने और पेट को ठंडक पहुंचाने के लिए स्थानीय लोग इसे अपनी दैनिक खुराक में शामिल करना पसंद करते हैं।
मंडी में 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक चल रहे दाम
मंडी में बालम ककड़ी की आवक बहुत कम समय के लिए होने के बावजूद भाव बहुत अधिक ऊंचे नहीं रहते, जिससे आम खरीदार भी इसे आसानी से खरीद पाते हैं। वर्तमान में जालोर मंडी में बालम ककड़ी के दाम करीब 100 से 150 रुपये प्रति किलो के बीच चल रहे हैं। सीमित आपूर्ति और तगड़ी मांग के चलते ग्राहक बिना मोलभाव किए इसे खरीद रहे हैं। अनोखे केसरिया-हरे रंग, मीठे स्वाद, लौकी जैसी कद-काठी और केवल महीने भर की उपलब्धता ने इसे जालोर के सब्जी बाजार की सबसे चर्चित उपज बना दिया है।

















