राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर उपखंड में स्थित मगरीवाड़ा गांव इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अरावली की सुरम्य पर्वत श्रृंखलाओं के बीच लगभग 1200 फीट ऊंची एक पहाड़ी पर चट्टानों की प्राकृतिक संरचना बिल्कुल भगवान गणेश के स्वरूप जैसी दिखाई देती है। इस विशाल स्वरूप को किसी मूर्तिकार ने छैनी या हथौड़े से नहीं गढ़ा, बल्कि यह पूरी तरह कुदरती बनावट की देन है। पहाड़ी की चट्टानों में भगवान गणेश के मस्तक, सूंड, कान और उनके विशाल उदर का आकार इतनी स्पष्टता से दिखाई देता है कि तीन से चार किलोमीटर की दूरी से भी लोग इस अलौकिक छवि को आसानी से पहचान लेते हैं।
चरवाहों ने सबसे पहले देखा था यह प्राकृतिक स्वरूप
मंडार के रहने वाले श्रद्धालु रामसिंह के अनुसार, इस क्षेत्र में कई छोटी-बड़ी पहाड़ियां फैली हुई हैं, जिन्हें स्थानीय बोली में 'मगरी' पुकारा जाता है। इन्हीं पहाड़ियों की बहुलता के कारण इस गांव की पहचान मगरीवाड़ा के रूप में स्थापित हुई। पहाड़ी पर बने इस अनूठे स्वरूप को लोग 'मगरी वाले गणेश' के नाम से पूजते हैं। पुराने दौर में जब चरवाहे अपनी बकरियां चराने इन दुर्गम टीलों पर जाते थे, तब उनकी नजर चट्टानों की इस खास बनावट पर पड़ी थी। समय बीतने के साथ यह खबर आसपास फैली और यह स्थल एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया। साल 2006 से श्रद्धालुओं की एक अटूट परंपरा शुरू हुई, जिसके तहत हर साल लोग पथरीले रास्तों की चढ़ाई पूरी कर पहाड़ी के शिखर पर ध्वजा फहराते हैं।
प्राचीन गुफा में स्थापित है आपेश्वर महादेव मंदिर
इस पावन पहाड़ी पर एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है, जिसके भीतर आपेश्वर महादेव का मंदिर स्थापित है। यह शांत और एकांत स्थल लंबे समय से तपस्वियों की साधना स्थली रहा है। करीब 80 वर्ष पहले यहां के प्रतिष्ठित संत मुनिजी महाराज ने इसी गुफा के भीतर लगातार 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थल के दर्शन मात्र से भक्तों के समस्त संकट दूर हो जाते हैं और उनके घरों में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
सालाना विशेष पूजा और दूर-दराज से पहुंचते श्रद्धालु
धार्मिक परंपरा के तहत हर वर्ष रावल पुजारी ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण पहाड़ी की चोटी पर जाकर पारंपरिक रीति-रिवाज से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं। मगरीवाड़ा गांव के अलावा रेवदर, मंडार तथा आसपास के अनेक इलाकों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने आते हैं। भक्तजन पहाड़ी पर बनी संकरी एवं पथरीली पगडंडियों के सहारे कठिन चढ़ाई पूरी करते हैं और भगवान गणेश व महादेव की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


















