प्रदेश के वायुमंडल में 20 सितंबर को मौसमी दशाएं दो साफ धड़ों में विभाजित नजर आने वाली हैं। भौगोलिक संरचना के अनुसार जहां पूर्वी और दक्षिणी छोर पर बादलों की हलचल तेज रहने वाली है, वहीं पश्चिमी भूभाग पूरी तरह साफ और सूखा दर्ज किया जाएगा। मौसमी आकलन के अनुसार विशेष तौर पर कोटा तथा उदयपुर संभागों के अंतर्गत आने वाले इलाकों में छिटपुट बौछारें पड़ने के आसार बन रहे हैं। 19 और 20 सितंबर के दौरान दक्षिण-पूर्वी तथा पूर्वी बेल्ट में कुछ चुनिंदा स्थानों पर मध्यम से लेकर तेज दर्जे की वर्षा गतिविधियां भी दर्ज हो सकती हैं, जबकि इसके उलट पश्चिमी संभागों में बादलों की आवाजाही नदारद रहेगी और शुष्क हवाएं प्रभावी रहेंगी।
पूर्वी अंचल के आठ जिलों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली की चेतावनी
पूर्वी भूभाग के आठ विशिष्ट जिलों पर मौसमी तंत्र का गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है। इन चिन्हित क्षेत्रों में बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर शामिल हैं। यहां आसमान में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की गंभीर आशंका व्यक्त की गई है। इसके अतिरिक्त इन जनपदों में हवा के तेज झोंके चलने का अंदेशा जताया गया है, जिनकी गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के भूभाग में मौसमी सक्रियता अपेक्षाकृत अधिक केंद्रित रहने वाली है। बांसवाड़ा, बारां, झालावाड़ और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में आकाशीय बिजली चमकने, मेघगर्जन होने और साथ में वर्षा के कारण परिस्थितियों में अचानक खराबी आ सकती है। इसके अलावा डूंगरपुर, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर के निवासियों को भी आंधी और वज्रपात को लेकर पहले से सचेत रहने की जरूरत होगी। जब आसमान में बिजली कड़क रही हो, तब किसी भी व्यक्ति को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या असुरक्षित संरचनाओं में खड़े होने से परहेज करना चाहिए।
कोटा और उदयपुर संभागों में वर्षा का फैलाव
दैनिक मौसमी आकलन के अनुसार कोटा और उदयपुर संभाग के सभी हिस्सों में एक जैसी मूसलाधार बारिश नहीं होगी, बल्कि यह दायरा संभाग के अलग-अलग क्षेत्रों में खंडित रूप से देखने को मिलेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि समूचे संभाग में सर्वव्यापी बारिश न होकर सिर्फ चुनिंदा पॉकेट्स में ही मेघ बरसेंगे। स्थानीय स्तर पर बादलों का जमावड़ा दक्षिण-पूर्वी बेल्ट में अधिक भारी रह सकता है, जिससे वहां के कृषि क्षेत्रों और कस्बों में जलभराव या तेज हवाओं के झोंके दैनिक कार्यों को बाधित कर सकते हैं।
विशेष रूप से उदयपुर जिले में संभागस्तरीय संभावनाओं के अनुरूप कहीं-कहीं बौछारें गिर सकती हैं, जबकि जिले भर में गरज-चमक, आकाशीय तड़ित और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार हवाओं का जोर रहेगा। बांसवाड़ा जिले में भी तीव्र बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं बहने का अनुमान है। बारां जिले में भी मौसमी उथल-पुथल बनी रहेगी, जहां गर्जन और आकाशीय बिजली के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज बयार चलने का अलर्ट प्रभावी रहेगा। झालावाड़ जनपद में भी मेघगर्जन और वज्रपात के साथ इतनी ही गति यानी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
जयपुर सहित मध्य और उत्तरी क्षेत्रों के लिए राहत की स्थिति
प्रांतीय राजधानी जयपुर में 20 सितंबर को किसी भी प्रकार की प्रतिकूल मौसमी आपदा या आंधी-तूफान की चेतावनी प्रभावी नहीं की गई है। राजधानी का आकाश मुख्य रूप से सामान्य रहने का अनुमान है और यहां किसी तीव्र चेतावनी का उल्लेख नहीं है। इसी भांति अजमेर, अलवर, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, डीग, धौलपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा जिला, कोटपुतली-बहरोड़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही तथा टोंक में भी किसी प्रकार का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
इन इलाकों में सामान्य दिनचर्या बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकती है। हालांकि कोटा संभाग में कहीं-कहीं छिटपुट बारिश का अनुमान जरूर है, मगर जिला स्तर पर चेतावनी की श्रेणी से इसे मुक्त रखा गया है। शेखावाटी और ढूंढार क्षेत्र के निवासियों को तेज हवाओं या आकाशीय तड़ित के किसी बड़े खतरे का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पश्चिमी राजस्थान के सभी 13 जिलों में बना रहेगा सूखा
रेगिस्तानी और पश्चिमी राजस्थान का परिदृश्य पूर्वी अंचल से एकदम अलग तस्वीर पेश करेगा। 20 सितंबर को यहां वर्षा शून्य रहने का अनुमान है और वातावरण पूर्णतया सूखा रहेगा। इस भूभाग के अंतर्गत आने वाले सभी 13 जनपदों में किसी भी प्रकार की चेतावनी नहीं दी गई है।
इन शांत और सूखे जिलों की सूची में बालोतरा, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, पाली, फलौदी तथा श्रीगंगानगर शामिल हैं। इन सभी जनपदों में बादलों की गर्जना, आकाशीय वज्रपात अथवा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली हवाओं का कोई संकट नहीं है। पश्चिमी मरुस्थल के किसान और आमजन बिना किसी आंधी-तूफान के भय के अपने सामान्य कामकाज निपटा सकते हैं।
कृषि कार्य और खुले क्षेत्रों के लिए एहतियाती निर्देश
दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में आंधी और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए खेतों में काम कर रहे किसानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। फसलों की कटाई या थ्रेसिंग का काम कर रहे काश्तकारों को कटी हुई उपज को सुरक्षित तिरपाल या ढके हुए गोदामों में रखना चाहिए, ताकि अचानक शुरू होने वाली तेज हवाओं और बौछारों से अनाज भीगने से बच सके।
बिजली के खंभों, बड़े होर्डिंग्स और कमजोर छप्परों के पास खड़े होने से बचना चाहिए, क्योंकि 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाएं टीन शेड और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। राज्य के दोनों हिस्सों में प्राकृतिक विषमता स्पष्ट रहेगी, जहां पूर्व में बारिश और आंधी का पहरा होगा, वहीं पश्चिमी धोरों में सूरज की तल्खी और शुष्क हवाएं सामान्य बनी रहेंगी।


















