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भीलवाड़ा के किसानों के लिए सूरजमुखी की खेती का शानदार मौका, जानिए बुवाई से लेकर सिंचाई तक का पूरा तरीकाराजस्थान
23 अक्तू॰ 2026, 9:05 am (20 मिनट पहले)· 0

भीलवाड़ा के किसानों के लिए सूरजमुखी की खेती का शानदार मौका, जानिए बुवाई से लेकर सिंचाई तक का पूरा तरीका

भीलवाड़ा के किसान रबी के सीजन में पारंपरिक खेती के साथ सूरजमुखी की खेती करके अपनी आमदनी को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। कृषि विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार सही समय पर सही बीजों का चयन और उचित सिंचाई से इसकी बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है।

भीलवाड़ा के किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फूलों की खेती की तरफ भी तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इस क्षेत्र में पहले से ही गेंदे और गुलाब की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। अब रबी का सीजन शुरू हो चुका है और ऐसे में जो किसान कुछ नया और अधिक मुनाफा देने वाली फसल उगाने की सोच रहे हैं, उनके लिए सूरजमुखी की खेती एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह फसल बहुत कम समय में किसानों को शानदार उत्पादन और मुनाफा दोनों देती है। सूरजमुखी के बीजों का इस्तेमाल तेल तैयार करने के लिए किया जाता है, जिसके कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

सर्दियों के इस मौसम में सूरजमुखी की खेती शुरू करने से पहले किसानों को मिट्टी की तैयारी, सही बीजों के चयन, बुवाई के सही समय और सिंचाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अच्छी पैदावार के लिए यह बहुत जरूरी है कि खेत में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था हो ताकि पानी जमा न हो। इसके अलावा फसल को उसकी जरूरत के हिसाब से ही खाद और पानी देना चाहिए। भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विभाग के डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने जानकारी दी है कि भीलवाड़ा हमेशा से ही फूलों के उत्पादन में आगे रहा है। यहां के किसान पारंपरिक फसलों के साथ फूलों को भी प्राथमिकता देते आए हैं, जिसमें मुख्य रूप से गुलाब, मोगरे और गेंदे के फूल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि रबी सीजन में सूरजमुखी उगाना किसानों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है, बशर्ते खेत की जमीन ऐसी हो जहां पानी के रुकने की समस्या न हो।

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दोमट मिट्टी और सही जल निकासी का महत्व

डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने यह भी बताया कि उपजाऊ दोमट मिट्टी सूरजमुखी की फसल के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। यदि खेत में पानी भर जाता है तो पौधों की वृद्धि पर बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए बुवाई का काम शुरू करने से पहले खेत की मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। सूरजमुखी की बुवाई का सटीक समय पूरी तरह से क्षेत्र की जलवायु, तापमान और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। सर्दियों के दौरान बुवाई करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सही समय की जानकारी अवश्य ले लेनी चाहिए। किसानों को हमेशा अपने क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल और प्रमाणित बीजों का ही चयन करना चाहिए। बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता की जांच और पैकेट पर छपी सभी जानकारियों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए।

सिंचाई प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का लाभ

सूरजमुखी की फसल को जरूरत के हिसाब से ही पानी देना चाहिए। विशेष तौर पर जब पौधों में फूल खिलने और बीज बनने की प्रक्रिया चल रही हो, तब खेत में नमी की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। हालांकि, इस बात का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी है कि खेत में जरूरत से ज्यादा पानी न भरे। उद्यान विभाग के डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने यह भी साझा किया कि राजस्थान सरकार कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिसके तहत किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है। किसान भाई सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर जैसे आधुनिक उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी और अनुदान की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा में मुख्य रूप से कौन से फूलों की खेती की जाती है?
भीलवाड़ा में मुख्य रूप से गेंदे, गुलाब और मोगरे के फूलों की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।
सूरजमुखी की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी सबसे अच्छी होती है?
सूरजमुखी की खेती के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी को सबसे अच्छा माना जाता है जहां पानी की निकासी ठीक हो।
सूरजमुखी की फसल में सिंचाई का ध्यान कब रखना चाहिए?
विशेष तौर पर पौधों में फूल आने और बीज बनने के समय खेत में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए।
सूरजमुखी की खेती को लेकर किसने जानकारी दी है?
भीलवाड़ा कृषि विभाग के उद्यान विभाग के डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने इसकी पूरी जानकारी दी है।
सिंचाई उपकरणों पर क्या सहायता मिलती है?
किसान सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर उपकरणों पर सरकार द्वारा मिलने वाले अनुदान की जानकारी ले सकते हैं।
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