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अजमेर में 14 लाख की साइबर ठगी का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, ऐसे होता था फर्जी खातों का खेलराजस्थान
23 अक्तू॰ 2026, 7:54 am (2 घंटे पहले)· 2

अजमेर में 14 लाख की साइबर ठगी का मुख्य आरोपी गिरफ्तार, ऐसे होता था फर्जी खातों का खेल

अजमेर पुलिस ने ऑपरेशन मूल हंट के तहत कार्रवाई करते हुए 14 लाख रुपए की साइबर ठगी के मुख्य आरोपी सबरे आलम को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। आरोपी लोगों के दस्तावेज लेकर फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे।

अजमेर में साइबर अपराध के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में सिविल लाइन थाना पुलिस ने ऑपरेशन मूल हंट अभियान के अंतर्गत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने लगभग 14 लाख रुपए की साइबर ठगी के प्रकरण में मुख्य आरोपी माने जा रहे सबरे आलम को प्रोडक्शन वारंट पर अपनी गिरफ्त में लिया है। आरोपी को रिमांड पर लेकर लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से थाह ली जा सके। पुलिस अब इस बात की पड़ताल में जुटी है कि ठगी का यह जाल कितना बड़ा था, किन-किन बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया और अवैध रकम का लेन-देन किस तरह से संचालित होता था।

फर्जी खातों का पूरा ताना-बाना

यह पूरा मामला तब सामने आया जब मुरादाबाद निवासी रोहित के साथ करीब 14 लाख रुपए की बड़ी साइबर ठगी की घटना को अंजाम दिया गया। इस मामले की गहन छानबीन के दौरान सिविल लाइन थाना पुलिस ने इससे पहले घुघरा निवासी मुकेश और राकेश को गिरफ्तार किया था। इन दोनों आरोपियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो साइबर धोखाधड़ी से जुड़े कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। जांच में यह बात सामने निकलकर आई कि मुकेश इस ठगी से मिलने वाली अवैध रकम को सीधे तौर पर सबरे आलम तक पहुंचाता था, जिसके बाद पुलिस ने इस मामले की कड़ी जोड़ते हुए मुख्य आरोपी सबरे आलम तक अपनी पहुंच बनाई और उसे दबोच लिया।

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झांसा देकर खुलवाए जाते थे बैंक खाते

पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में यह खुलासा हुआ है कि यह शातिर साइबर गिरोह आम लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन और झांसे में फंसाता था। इसके बाद उनके आधार कार्ड और अन्य आवश्यक गोपनीय दस्तावेज हासिल किए जाते थे। इन चोरी किए गए या हासिल किए गए दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते खुलवाए जाते थे। जब पीड़ितों से साइबर ठगी के जरिए रकम ऐंठी जाती थी, तो वह राशि सीधे इन्हीं फर्जी खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। रकम बैंक खाते में पहुंचते ही उसे तुरंत निकाल लिया जाता था। इस शातिर तरीके से ठगी के पैसों को एक खाते से दूसरे खाते में घुमाकर ट्रैक करना मुश्किल बनाया जाता था और अवैध रकम को ठिकाने लगाया जाता था।

नेटवर्क के अन्य गुर्गों की तलाश तेज

मुख्य आरोपी के शिकंजे में आने के बाद पुलिस अब उससे गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह के काम करने का पूरा तौर-तरीका क्या था और इसमें कौन-कौन से अन्य लोग पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे थे। पुलिस इस एंगल पर भी गहराई से जांच कर रही है कि ठगी की गई कुल रकम को देश के किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और उस पैसे को एटीएम या अन्य माध्यमों से निकालने में किन लोगों ने सहयोग किया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सबरे आलम से रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारियों के आधार पर इस अंतरराज्यीय या स्थानीय साइबर नेटवर्क से जुड़े कई अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सकता है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है।

सवाल-जवाब

यह मामला किस शहर से जुड़ा है?
यह मामला अजमेर से जुड़ा है जहाँ सिविल लाइन थाना पुलिस ने कार्रवाई की है।
कितनी रकम की साइबर ठगी हुई थी?
साइबर ठगी की यह राशि करीब 14 लाख रुपए थी।
मुख्य आरोपी का क्या नाम है?
मुख्य आरोपी का नाम सबरे आलम है जिसे प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया है।
पीड़ित व्यक्ति का संबंध कहाँ से है?
इस मामले में ठगी के शिकार हुए रोहित मुरादाबाद के रहने वाले हैं।
पुलिस ने इस अभियान को क्या नाम दिया है?
पुलिस ने यह कार्रवाई ऑपरेशन मूल हंट अभियान के तहत की है।
इससे पहले पुलिस ने किन आरोपियों को पकड़ा था?
पुलिस ने इससे पहले घुघरा निवासी मुकेश और राकेश को गिरफ्तार किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·24 मिनट पहले

दूसरों के कागजात लेकर ऐसे फर्जी खाते खुलवाने वाले इन शातिर लोगों से आम आदमी अपनी निजी पहचान कैसे बचाए?

Ravikash Gupta@ravikash·45 मिनट पहले

पुलिस कह रही है कि मुख्य आरोपी पकड़ लिया गया है, पर मुझे शक है कि इस छोटे से गिरोह के पीछे कोई बड़ा खिलाड़ी बैठा है जो असली खेल चला रहा है। सिर्फ दो-तीन लोगों को पकड़ने से साइबर ठगी का यह जाल खत्म नहीं होने वाला।

Arjun Mehta@arjun-mehta·44 मिनट पहले

रविकाश जी, आधार कार्ड से फर्जी खाते खुलवाने वाली बात ने चौंका दिया है, आजकल किसी को भी डॉक्यूमेंट देना खतरनाक हो गया है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

आधार कार्ड के नाम पर ऐसे फर्जी खाते खुलवाने का खेल अब बहुत आम हो गया है। जब तक बैंक स्तर पर केवाईसी में सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसे शातिर गिरोह भोले-भाले लोगों को फंसाकर आसानी से ठगी करते रहेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, बैंक तो वैसे ही केवाईसी में पूरी जान लगा देते हैं, असली लफड़ा तो इन मास्टरमाइंड्स का है जो लोगों के बहकावे में आने का मौका ढूंढते हैं।

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