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मारवाड़ में गुलाबी ठंड के साथ शुरू हुई सोजत के तीलोट मावे की महक, जानें शुद्ध दूध और मेवों की इस पारंपरिक मिठाई की खासियतराजस्थान
12 अक्तू॰ 2026, 2:31 pm (2 घंटे पहले)· 0

मारवाड़ में गुलाबी ठंड के साथ शुरू हुई सोजत के तीलोट मावे की महक, जानें शुद्ध दूध और मेवों की इस पारंपरिक मिठाई की खासियत

अक्टूबर में ठंड की दस्तक के साथ ही राजस्थान के पाली स्थित सोजत में पारंपरिक तीलोट मावा बनना शुरू हो गया है। शुद्ध दूध, भुने तिल और सूखे मेवों से लकड़ी की भट्ठियों पर तैयार होने वाला यह देशी व्यंजन सर्दियों में ऊर्जा और गर्माहट देता है।

अक्टूबर का महीना शुरू होते ही जब गुलाबी ठंड दस्तक देती है, तो मारवाड़ की गलियों में खान-पान का पूरा मिजाज बदलने लगता है। राजस्थान के पाली जिले की पहचान यूं तो विश्व प्रसिद्ध मेहंदी की खुशबू से होती है, लेकिन सर्दियों का मौसम आते ही यहां की पारंपरिक मिठाइयों का जायका सबसे आगे आ जाता है। जैसे ही मौसम में हल्की ठंडक घुलती है, पाली के सोजत कस्बे में प्रसिद्ध 'तीलोट मावा' भट्ठियों पर पकने लगता है। सोजत में भंवर चक्की के नाम से जाने जाने वाले भंवर बा का यह मावा लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यह केवल एक आम मिठाई भर नहीं है, बल्कि बदलते मौसम में शरीर को तंदुरुस्ती और ऊर्जा देने वाला खान-पान का एक अनूठा संगम है। अक्टूबर आते ही सोजत के हलवाइयों की दुकानों पर लोहे के विशाल कढ़ावों में शुद्ध दूध को लगातार कढ़ाकर गाढ़ा मावा बनाने का दौर शुरू हो जाता है।

धीमी आंच पर सिकाई और सूखे मेवों का भरपूर तड़का

इस पारंपरिक मिठाई की असली पहचान इसका विशुद्ध देशी अंदाज है। हलवाई शुद्ध दूध से निकले खोये को धीमी आंच पर तब तक भूनते हैं, जब तक कि उसमें से एक खास सोंधी खुशबू न उठने लगे। इसके बाद इसमें तिलों के साथ-साथ बादाम, काजू, पिस्ता और इलायची जैसे सूखे मेवों का भरपूर मिश्रण मिलाया जाता है। यह तड़का मावे को न केवल बेहतरीन स्वाद देता है, बल्कि सर्दियों के महीनों में इसे शरीर के लिए पौष्टिक और ऊर्जादायक भी बना देता है।

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कड़ाके की ठंड में गर्माहट और रोग प्रतिरोधक क्षमता का सहारा

सर्दियों के दिनों में शरीर को भीतर से गर्माहट देने और इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए सोजत का यह तीलोट मावा बहुत गुणकारी माना जाता है। इस मौसम में तिल और मेवों का सेवन सेहत के लिहाज से रामबाण माना जाता है, क्योंकि इनका यह मेल शरीर के भीतर प्राकृतिक गर्मी बनाए रखता है। यही कारण है कि पाली जिले के स्थानीय निवासियों के अलावा आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले लोग भी सोजत से तीलोट मावा पैक करवाकर अपने साथ ले जाना बिल्कुल नहीं भूलते। बदलते मौसम में सोजत आने वाले मुसाफिरों और सैलानियों के लिए सुलगती भट्ठियों से निकला ताजा और गरमा-गरम तीलोट मावा चखना एक खास अनुभव बन जाता है।

पारंपरिक भट्ठियों में तैयार होने का पारंपरिक तरीका

सोजत के तीलोट मावे का स्वाद आधुनिक मशीनों से नहीं, बल्कि लकड़ी और कोयले की पारंपरिक भट्ठियों से आता है। धीमी आंच पर देर तक पकने के कारण इसका सोंधापन लंबे समय तक बना रहता है। इसे तैयार करने की पूरी प्रक्रिया तीन प्रमुख चरणों में बंटी होती है

  • शुद्ध दूध की कड़ाई: सबसे पहले लोहे के बड़े कढ़ाव में शुद्ध दूध को घंटों तक उबाला जाता है, जिससे गाढ़ा और दानेदार खोया तैयार होता है।
  • तिल और मेवों का मिश्रण: जब मावा अच्छी तरह तैयार हो जाता है, तब उसमें भुने हुए सफेद तिल, काजू, बादाम, पिस्ता और हरी इलायची का बारीक पाउडर डाला जाता है।
  • धीमी आंच पर अंतिम सिकाई: सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे सूखे मेवों और तिल का प्राकृतिक तेल पूरी तरह से मावे में रच-बस जाए और हर निवाले में उसका स्वाद आए।

पाली के गुलाब हलवे जैसी लोकप्रियता

जैसे ही अक्टूबर में मौसम खुशनुमा होता है, लोग सोजत के तीलोट मावे को नाश्ते और मिठाई दोनों रूपों में चाव से खाने लगते हैं। ग्राहकों की भारी मांग को देखते हुए सोजत के हलवाई बाजारों में इसका निर्माण तेजी से बढ़ा देते हैं। मांग को पूरा करने के लिए रोजाना भारी मात्रा में यह मावा तैयार किया जाता है। स्थानीय खान-पान की दुनिया में यह माना जाता है कि पाली के मशहूर गुलाब हलवे के बाद सर्दियों में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली मिठाई सोजत का यही तीलोट मावा है।

सवाल-जवाब

सोजत का तीलोट मावा मुख्य रूप से किन सामग्रियों से तैयार किया जाता है?
यह शुद्ध दूध से तैयार खोए, भुने हुए सफेद तिल, काजू, बादाम, पिस्ता और हरी इलायची के पाउडर से बनाया जाता है।
सोजत में इस मावे को बनाने के लिए कौन सा प्रतिष्ठान सबसे प्रसिद्ध है?
सोजत में भंवर चक्की नाम से पहचाने जाने वाले भंवर बा का तीलोट मावा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।
तीलोट मावे को पकाने के लिए किस तरह की भट्ठी का उपयोग किया जाता है?
इसे आधुनिक मशीनों के बजाय पारंपरिक लकड़ी और कोयले की भट्ठियों पर धीमी आंच में पकाया जाता है।
सर्दियों के मौसम में तीलोट मावा खाना क्यों फायदेमंद माना जाता है?
तिल, सूखे मेवे और शुद्ध मावे का मिश्रण शरीर को अंदरूनी गर्माहट प्रदान करता है और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
पाली जिले में तीलोट मावे की लोकप्रियता की तुलना किस अन्य प्रसिद्ध मिठाई से की जाती है?
सर्दियों में मिलने वाले इस तीलोट मावे की लोकप्रियता की तुलना पाली के मशहूर गुलाब हलवे से की जाती है।
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टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·1 घंटे पहले

सोजत के इस तीलोट मावे की सोंधी खुशबू और पारंपरिक तरीके से लकड़ी की भट्टी पर पकने का अंदाज़ देखकर ही मुँह में पानी आ गया। सर्दियों में तिल और मेवों का यह मेल स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बढ़िया है, अगली बार पाली जाना हुआ तो इसे ज़रूर पैक करवाऊँगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

सोजत के तीलोट मावे की खुशबू से ही ठंड का अहसास होने लगा है, खाने का मन कर गया।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अरे अर्जुन भाई, भंवर बा की भंवर चक्की का नाम आते ही मुंह में पानी आ गया। सच में कमाल की चीज़ है!

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

भंवर बा की भंवर चक्की वाला तीलोट मावा सर्दियों में सचमुच गज़ब ऊर्जा देता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, सच में इसके स्वाद की बात ही अलग है! क्या यह मावा ऑनलाइन ऑर्डर करने पर घर मिल सकता है?

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