हेल्दी फल खाने के बाद भी क्यों होने लगती है गैस और एसिडिटी, जानिए इसके मुख्य कारणवीपीएन इस्तेमाल करते समय बार-बार आने वाले कैप्चा से कैसे पाएं छुटकारा, ये हैं तीन आसान तरीकेबीकानेर में विदेशी पर्यटकों की धूम, रेगिस्तान की सैर और लोक धुनों पर थिरक रहे सैलानीभारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ रचा नया इतिहास, एक साल में दर्ज की 11वीं ऐतिहासिक जीतगलत बिजली बिल आने पर न घबराएं, एसडीओ से लेकर कंज्यूमर फोरम तक ऐसे करें शिकायतकथक क्वीन सितारा देवी: जिन्हें रवींद्रनाथ टैगोर ने दी थी नृत्य सम्राज्ञी की उपाधि, जानिए अनसुनी दास्तांराजस्थान के इस प्राचीन कुंड में भाइयों संग स्नान करते थे भगवान राम, माउंट आबू से जुड़ा है सात सदी पुराना इतिहासछोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाना होता है फलदायी, जानिए सही समय और पूजा के जरूरी नियमरोबोटिक्स के लिए काम करने वाली फिजिसल ने जुटाए 1 करोड़ डॉलर, एलेक्स डी विगान का नया वेंचरभीलवाड़ा में दिवाली पर पशुधन पूजा का महत्व, इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान
भीलवाड़ा में दिवाली पर पशुधन पूजा का महत्व, इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यानराजस्थान
8 नव॰ 2026, 7:35 am (1 मिनट पहले)· 0

भीलवाड़ा में दिवाली पर पशुधन पूजा का महत्व, इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान

भीलवाड़ा में दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में गाय, बैल और अन्य पशुधन की पूजा करने की विशेष परंपरा है। इस दौरान पशुओं को सजाने और पूजा करने के साथ-साथ उनकी सेहत और सुरक्षा से जुड़ी कुछ अहम बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

भीलवाड़ा में दिवाली का पर्व केवल रोशनी और खुशियों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण संस्कृति में यह उत्सव पशुधन के प्रति आभार जताने का भी एक बड़ा माध्यम है। इस विशेष अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में मां लक्ष्मी की आराधना के बाद गाय, बैल और अन्य मवेशियों की पूजा की जाती है। किसान इन बेजुबान जीवों को अपने परिवार का अटूट हिस्सा मानते हैं और इनकी सुख-समृद्धि के लिए कामना करते हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ पशुओं का श्रृंगार किया जाता है और उन्हें विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।

पशुधन पूजा की पारंपरिक विधि और मान्यता

भीलवाड़ा नगर के प्रसिद्ध पंडित कमलेश व्यास के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में कृषि और आजीविका की रीढ़ मवेशी ही होते हैं। खेती किसानी के कार्यों से लेकर दूध और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए किसान पूरी तरह से पशुओं पर निर्भर रहते हैं। यही वजह है कि दिवाली के पावन पर्व पर पशुओं की विशेष पूजा कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की जाती है। इस दिन सुबह सबसे पहले पशुओं को अच्छी तरह से नहलाया जाता है और उन्हें सुंदर ढंग से सजाया जाता है। कई जगहों पर उन्हें पारंपरिक वस्त्रों और रंगों से भी संवारा जाता है।

ये भी पढ़ें

पूजा के दौरान पशुओं के माथे पर रोली और अक्षत यानी चावल का तिलक लगाया जाता है। इसके पश्चात उन्हें फूलों की माला पहनाई जाती है और उनके समीप दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। अनुष्ठान को पूरा करते हुए पशुओं को गुड़ और ताजी हरी घास का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि पशुधन की अच्छी सेहत और खुशहाली से ही पूरे घर-परिवार में समृद्धि बनी रहती है। यह परंपरा इंसानों और पशुओं के बीच के गहरे प्रेम और आपसी जुड़ाव को दर्शाती है।

पूजा के दौरान बरती जाने वाली जरूरी सावधानियां

पशुधन की पूजा करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। सबसे पहले पशुओं को साफ पानी से नहलाना चाहिए और उनके शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहद जरूरी है। यदि मौसम ठंडा हो तो मवेशियों को बहुत ठंडे पानी से नहलाने से बचना चाहिए ताकि वे सर्दी की चपेट में न आएं। इसके अलावा पशुओं को हमेशा ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां साफ-सफाई और हवा का उचित प्रबंध हो।

पूजा-पाठ के दौरान तिलक लगाते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि रोली, सिंदूर या अन्य कोई भी पूजन सामग्री पशु की आंखों, नाक या मुंह के संपर्क में न आए। आरती के समय दीपक या अगरबत्ती को मवेशियों से सुरक्षित दूरी पर रखें ताकि आग से उन्हें किसी प्रकार की चोट या घबराहट न हो। प्रसाद के रूप में दी जाने वाली चीजें हमेशा ताजा और स्वच्छ होनी चाहिए।

खानपान और सुरक्षा से जुड़े अन्य निर्देश

त्योहार के उत्साह में कई बार लोग पशुओं को कुछ भी खिला देते हैं, जिससे बचना चाहिए। पूजा के दिन मवेशियों को किसी भी प्रकार का बासी, सड़ा हुआ या गंदा भोजन नहीं खिलाना चाहिए। इसके अलावा पशुओं को जबरन सजाने या अनुचित तरीके से कसकर बांधने से भी परहेज करना चाहिए ताकि उन्हें शारीरिक या मानसिक कष्ट न हो।

पशुधन की यह पूजा केवल एक धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पशुओं के प्रति सम्मान और उनकी देखभाल की भावना का संदेश देती है। पंडित कमलेश व्यास का कहना है कि किसानों को केवल पूजा के दिन ही नहीं, बल्कि वर्षभर पशुओं की सेहत, स्वच्छता और उनके खानपान का पूरा ख्याल रखना चाहिए। इससे त्योहार की असली सार्थकता सिद्ध होती है और पशुधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा में दिवाली के बाद किसकी पूजा की जाती है?
भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के बाद गाय, बैल और अन्य पशुधन की पूजा की जाती है।
पशुधन पूजा के दौरान पशुओं को क्या खिलाया जाता है?
पूजा के दौरान पशुओं को प्रसाद के रूप में गुड़ और ताजी हरी घास खिलाई जाती है।
पूजा के वक्त पंडित कमलेश व्यास ने क्या सलाह दी है?
पंडित कमलेश व्यास ने पशुओं को ठंड के पानी से नहलाने से बचने और उनकी साफ-सफाई तथा खानपान का ध्यान रखने की सलाह दी है।
पशुओं को सजाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
पशुओं को सजाते समय ध्यान रखें कि रोली या सिंदूर उनकी आंखों, नाक और मुंह में न जाए तथा उन्हें जबरन न बांधा जाए।
दीपावली पर पशुधन की पूजा क्यों की जाती है?
यह खेती और आजीविका में मदद करने वाले पशुओं के प्रति आभार जताने और उनकी सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp