राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक बड़ी और बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां एक सरकारी स्कूल की इमारत का एक हिस्सा रात के समय अचानक ढह गया। यह हादसा भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा क्षेत्र में स्थित हुरड़ा बस स्टैंड के पास बने महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय का है। राहत की बात यह रही कि यह घटना देर रात के समय घटित हुई जब विद्यालय पूरी तरह से बंद था और वहां कोई भी उपस्थित नहीं था। इस वजह से एक बहुत बड़ी त्रासदी होने से टल गई और किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यदि यह हादसा स्कूल के नियमित समय के दौरान हुआ होता, तो इसके परिणाम बेहद घातक हो सकते थे क्योंकि उस समय वहां बड़ी संख्या में बच्चे और शिक्षक मौजूद रहते हैं।
हादसे का घटनाक्रम: आधी रात को अचानक ढही छत
स्थानीय ग्रामीणों और आसपास रहने वाले लोगों के अनुसार, यह घटना गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि के दौरान घटित हुई। आधी रात के सन्नाटे में अचानक स्कूल परिसर से एक तेज और भयानक आवाज सुनाई दी। रात के समय अंधेरा होने के कारण किसी ने तुरंत स्कूल के अंदर जाकर देखने का साहस नहीं किया। सुबह जब शुक्रवार को स्कूल खुलने का नियत समय हुआ और विद्यालय का स्टाफ तथा अन्य सहायक कर्मचारी वहां पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। स्कूल के प्रधानाचार्य कक्ष यानी प्रिंसिपल ऑफिस की छत पूरी तरह से नीचे गिर चुकी थी। पूरा कमरा सीमेंट, ईंटों और लोहे के सरियों के मलबे से पट गया था।
सामान का भारी नुकसान और मलबे में दबी फाइलें
इस हादसे के कारण प्रधानाचार्य कक्ष में रखा सारा सामान मलबे के नीचे दबकर पूरी तरह से नष्ट हो गया। कमरे में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज, अलमारियों में रखी फाइलें, कुर्सियां, टेबल और अन्य कार्यालयीन उपकरण पूरी तरह से टूट-फूट गए। गनीमत यह रही कि रात का वक्त होने के कारण प्रिंसिपल या कोई अन्य स्टाफ वहां मौजूद नहीं था। सुबह जब स्कूल के अन्य हिस्सों को देखा गया, तो डर का माहौल था कि कहीं भवन का कोई दूसरा हिस्सा भी न गिर जाए। इसके बाद तुरंत स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को इस गंभीर हादसे की सूचना दी।
सुबह स्कूल खुलते ही मचा हड़कंप, मौके पर पहुंचे आला अधिकारी
सुबह जैसे-जैसे यह खबर फैली, स्कूल परिसर में स्थानीय लोगों और अभिभावकों का तांता लग गया। हर कोई अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखाई दे रहा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि और पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गए। अधिकारियों ने सबसे पहले घटनास्थल की घेराबंदी करवाई ताकि कोई बच्चा गलती से भी उस मलबे या जर्जर हिस्से के पास न जा सके। इसके बाद सुरक्षात्मक उपाय करते हुए मजदूरों और मशीनों की मदद से प्रधानाचार्य कक्ष से मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया।
स्कूल भवनों के रखरखाव और सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल
भीलवाड़ा की इस घटना ने राज्य में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर जर्जर हो चुके स्कूल भवनों की समय पर मरम्मत क्यों नहीं कराई जाती। लोगों का आरोप है कि शिक्षा विभाग को कई बार पुराने कमरों और जर्जर छतों के बारे में अवगत कराया जाता है, लेकिन बजट की कमी या प्रशासनिक उदासीनता के कारण इन पर ध्यान नहीं दिया जाता।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि केवल भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और राज्य के सभी सरकारी स्कूल भवनों का एक व्यापक ढांचागत ऑडिट कराया जाना चाहिए। जो भी हिस्से असुरक्षित पाए जाएं, उन्हें तुरंत खाली कराया जाए और नई इमारतों का निर्माण किया जाए ताकि मासूम बच्चों के जीवन को खतरे में न डाला जाए।
छात्रों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
हादसे के बाद अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि बच्चे अब स्कूल जाने में डर महसूस कर रहे हैं। कई माता-पिता ने आशंका जताई है कि जब तक पूरे स्कूल भवन की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कूल प्रबंधन ने कहा है कि जब तक तकनीकी टीम भवन के बाकी हिस्सों को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर देती, तब तक वैकल्पिक कमरों या अस्थायी रूप से अन्य सुरक्षित स्थानों पर कक्षाएं संचालित करने पर विचार किया जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उनकी सुरक्षा भी बनी रहे, इसके लिए तुरंत कोई वैकल्पिक योजना बनाई जाए। फिलहाल, शिक्षा विभाग के अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



















