राजस्थान के भीलवाड़ा में चर्चित कमला देवी काकरिया मर्डर केस की तहकीकात में हर दिन नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जिस मकान के भीतर इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया था, वहां वारदात के ठीक एक दिन बाद ही आरोपियों ने एक बड़ी शराब और कबाब दावत का आयोजन किया था। इस आयोजन में करीब 30 से 32 लोग जमा हुए थे। अब पुलिस इस पूरी महफिल में मौजूद सभी लोगों की पहचान कर उनसे विस्तृत पूछताछ करने की तैयारी में जुट गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनमें से किसी को इस वारदात की भनक थी या नहीं, अथवा किसी ने सबूत मिटाने में आरोपियों का साथ तो नहीं दिया था।
वारदात स्थल पर दावत और साक्ष्य मिटाने की साजिश
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज मोड़ घटना वाले मकान में रखी गई यह नॉनवेज पार्टी बन गई है। सीओ सिटी सज्जन सिंह ने बताया कि हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने छत पर शव जलाने के निशान पूरी तरह छुपाने के लिए बाकायदा सतह की खुदाई करवाई और फिर से नया प्लास्टर करवाया था। इसके अलावा आसपास की दीवारों पर भी नई सफेदी करवा दी गई थी ताकि किसी को जलने या धुएं की गंध का तनिक भी संदेह न हो। इन सभी तौर-तरीकों से सुबूत नष्ट करने की कोशिश के तुरंत बाद उसी घर में आरोपियों ने अपने दोस्तों और अन्य साथियों को बुलाकर शराब और कबाब की पार्टी रखी, जिसमें 30 से 32 लोग शरीक हुए थे।
पार्टी में मौजूद 30 से 32 लोगों से पूछताछ की तैयारी
पुलिस अब उस शाम मकान में मौजूद रहे सभी 30 से 32 लोगों की सूची तैयार कर उनसे अलग-अलग पूछताछ करने जा रही है। जांच टीम मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उस शाम मौजूद किसी भी मेहमान को मकान के भीतर हुई खौफनाक वारदात का कोई अंदाजा था। इसके साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि क्या पार्टी में शामिल किसी शख्स ने आरोपियों को साक्ष्य मिटाने, राज दबाने या किसी भी तरह की मदद पहुंचाई थी। सज्जन सिंह के मुताबिक, अगर पूछताछ में किसी भी व्यक्ति की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता सामने आती है, तो पुलिस उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेगी और जांच का दायरा और बढ़ाएगी।
नालियों की तलाशी में हड्डियों के अवशेष बरामद
हत्याकांड के सबूत तलाशने के लिए पुलिस दल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) और मोबाइल आउटडोर टीम (एमओबी) के विशेषज्ञों के साथ दोबारा वारदात वाले मकान पर पहुंचा। पुलिस को आशंका थी कि शव को ठिकाने लगाने के दौरान अवशेषों को पानी के बहाव के साथ नालियों में बहाया गया हो सकता है। इसी आधार पर जब मकान से जुड़ी तमाम नालियों की सघन तलाशी ली गई, तो वहां से मृतका की हड्डियों के कुछ टुकड़े और अवशेष बरामद हुए। जांच दल ने इन अवशेषों को कब्जे में लेकर डीएनए परीक्षण के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेज दिया है, ताकि आधिकारिक पुष्टि की जा सके।
गहने बेचने के सीसीटीवी फुटेज और कोठारी नदी की रिकॉर्डिंग
सबूतों की कड़ी जोड़ते हुए जांच दल ने मृतका के जेवरात बेचने से संबंधित पुख्ता साक्ष्य भी जुटाए हैं। आरोपियों ने जहां-जहां इन आभूषणों को बेचा था, पुलिस ने उन सभी दुकानों और ठिकानों के सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। संबंधित व्यापारियों और व्यक्तियों के बयान भी कलमबद्ध किए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि सौदेबाजी और लेन-देन के समय के विजुअल्स में आरोपी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही कोठारी नदी और उसके आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी अनुसंधान का अहम हिस्सा बनाई गई है।
12 अक्टूबर को गुमशुदगी से लेकर खुलासे तक का घटनाक्रम
भीलवाड़ा के वीर सावरकर चौक की रहने वाली कमला देवी काकरिया 12 अक्टूबर को अचानक लापता हो गई थीं। इसके बाद 15 अक्टूबर को उनकी बहू रवीना देवी ने भीमगंज थाने में उनकी गुमशुदगी की आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस पड़ताल में यह खौफनाक सच सामने आया कि सुभाषनगर की छोटी पुलिया के पास स्थित एक मकान में कमला देवी की हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने वहीं छत पर शव को जला दिया और बची हुई अस्थियों को कोठारी नदी में ले जाकर बहा दिया। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों रवि तापड़िया, हीरालाल सिंधी और आर्यन दाधीच को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।


















