ऋतु चक्र में आ रहे बदलावों के बीच राजस्थान के सीमावर्ती शहर श्रीगंगानगर में वायु प्रदूषण की समस्या गहराने लगी है। मंगलवार तड़के किए गए वायु गुणवत्ता आकलन में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 258 के आंकड़े पर दर्ज किया गया। वातावरण में इस प्रकार प्रदूषण कणों का फैलाव सीधे तौर पर सामान्य जनजीवन और श्वसन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है, क्योंकि सूचकांक का 200 से ऊपर जाना हवा की बेहद अस्वस्थ स्थिति का स्पष्ट संकेत देता है। जहरीली होती इस हवा के बीच शहर के निवासियों को सांस लेने में भारीपन, आंखों में तेज जलन और गले में खराश जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
सुबह की सैर और दैनिक दिनचर्या पर प्रतिकूल असर
मौसम के करवट लेने के साथ ही आबोहवा में घुले सूक्ष्म प्रदूषक सुबह के वक्त सतह के नजदीक ठहर रहे हैं। इसके चलते सुबह के समय खुले वातावरण में निकलने वाले राहगीरों, कामगारों और सैर करने वालों को सबसे अधिक शारीरिक असुविधा झेलनी पड़ रही है। जब भी हवा की गुणवत्ता इस सीमा तक घटती है, तब घर से बाहर निकलने पर विषैले कण फेफड़ों में पहुंचकर परेशानी पैदा करते हैं। इस परिस्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों को अपने दैनिक क्रियाकलापों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है, ताकि प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क से बचा जा सके।
200 के पार पहुंचा AQI और सेहत से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां
वायु गुणवत्ता सूचकांक मूल रूप से वातावरण में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों की मात्रा का नियमित मापन करता है। स्थापित वैज्ञानिक मानकों के मुताबिक सूचकांक की संख्या जितनी ऊंचाई की तरफ बढ़ती है, वायु उतनी ही ज्यादा दूषित और असुरक्षित मान ली जाती है। श्रीगंगानगर में दर्ज किया गया 258 का पैमाना साफ दर्शाता है कि शहर का वर्तमान वातावरण सामान्य व स्वस्थ नहीं रह गया है। इस आंकड़े पर पहुंचने के बाद न केवल श्वसन रोगों से ग्रस्त संवेदनशील वर्ग, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ व्यक्तियों में भी सीने में जकड़न, खांसी और सिरदर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।
कमजोर वर्ग और मरीजों के लिए जरूरी एहतियाती उपाय
प्रदूषण के इस बढ़ते दबाव का सबसे प्रतिकूल प्रभाव छोटे बच्चों, बुजुर्ग नागरिकों और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित मरीजों पर पड़ता है। ऐसे मौसम में अत्यधिक समय तक बाहर रहने से खांसी का दौरा पड़ने और सांस की नली में सूजन आने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समय में सुबह के समय खुले में भारी शारीरिक श्रम या गैरजरूरी भ्रमण से परहेज करना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों को यथासंभव घरों के भीतर रहने की हिदायत दी गई है। यदि किसी अनिवार्य कार्यवश बाहर जाना ही पड़े तो चेहरे पर सुरक्षात्मक मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। साथ ही यदि किसी व्यक्ति को लगातार सूखी खांसी, बेचैनी अथवा सांस खींचने में रुकावट महसूस हो, तो उसे बिना देर किए डॉक्टरों से चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। श्रीगंगानगर में 258 का यह स्तर स्थानीय निवासियों को बदलती आबोहवा के प्रति पूरी तरह सचेत रहने की चेतावनी दे रहा है।





















