राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सुप्रसिद्ध श्री सांवलियाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का एक अनोखा और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। भीलवाड़ा जिले की मंगरोप तहसील के कल्याणपुर गांव के निवासी किसान जगदीश चंद्र प्रहलाद रेबारी ने अपनी मन्नत पूरी होने के उपलक्ष्य में भगवान सांवलिया सेठ के श्रीचरणों में 250 ग्राम वजनी शुद्ध चांदी से बना टमाटर अर्पित किया है। अपनी 20 बीघा जमीन पर टमाटर की खेती करके लगभग 30 लाख रुपये की बंपर कमाई करने वाले इस किसान की यह अनोखी भेंट पूरे मेवाड़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मन्नत के साथ शुरू की थी 20 बीघा में टमाटर की खेती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसान जगदीश चंद्र प्रहलाद रेबारी ने चालू सीजन में अपनी 20 बीघा कृषि भूमि पर टमाटर की फसल उगाने का संकल्प लिया था। बुवाई और कृषि कार्य प्रारंभ करने से पूर्व वे मंडफिया स्थित मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम सांवलिया सेठ के दरबार में दर्शन करने गए थे। वहां उन्होंने भगवान के समक्ष हाथ जोड़कर प्रार्थना की थी कि यदि इस बार खेत में टमाटर की पैदावार बेहतरीन रहे और बाजार में उपज का उचित मूल्य मिले, तो वे अपनी श्रद्धा अनुसार मंदिर में विशेष भेंट अर्पित करेंगे। किसान का अटूट विश्वास था कि खेती की अनिश्चितताओं के बीच कड़ी मेहनत के साथ-साथ ईश्वर का आशीर्वाद होना बेहद जरूरी है।
30 लाख रुपये की बंपर कमाई और मन्नत की पूर्ति
किसान की दिन-रात की मेहनत और सांवलिया सेठ पर उनका भरोसा पूरी तरह से रंग लाया। अनुकूल मौसम और बेहतर कृषि प्रबंधन के कारण 20 बीघा खेत में टमाटर की रिकॉर्ड पैदावार दर्ज की गई। इसके साथ ही कृषि उपज मंडी में भी टमाटर के काफी अच्छे दाम मिले, जिससे किसान को कुल मिलाकर करीब 30 लाख रुपये की भारी आमदनी हुई। इस बड़ी आर्थिक सफलता के बाद जगदीश चंद्र ने इसे केवल अपने परिश्रम का फल न मानकर सांवलिया सेठ की असीम कृपा बताया। अपनी मन्नत पूरी करने हेतु उन्होंने खास तौर पर 250 ग्राम चांदी का एक सुंदर टमाटर बनवाया। इसके पश्चात वे अपने पूरे परिवार के साथ मंडफिया पहुंचे और भगवान के चरणों में इस अनोखे चढ़ावे को समर्पित किया।
सांवलिया सेठ धाम में अनोखी भेंटों की समृद्ध परंपरा
चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया में विराजमान भगवान सांवलिया सेठ के मंदिर में भक्तों द्वारा अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर विचित्र और बहुमूल्य उपहार चढ़ाने का इतिहास काफी पुराना रहा है। यहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपने व्यवसाय, नौकरी, उद्योग या कृषि क्षेत्र में मिलने वाली सफलता का श्रेय सांवलिया सेठ को देते हैं। इससे पूर्व भी इस धाम में मन्नत पूरी होने पर सोने-चांदी के बने ट्रैक्टर, पेट्रोल पंप, ट्रक, पिकअप वाहन और पवन चक्की जैसी अनेक वस्तुएं चढ़ाई जा चुकी हैं। अब इस ऐतिहासिक सूची में चांदी का टमाटर भी जुड़ गया है, जो मंदिर आने वाले दर्शनार्थियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
कृषि समृद्धि और अटूट धार्मिक विश्वास का अनूठा प्रतीक
किसान जगदीश चंद्र प्रहलाद रेबारी की यह भेंट केवल धातु के एक टुकड़े या मौद्रिक मूल्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय ग्रामीण समाज में कृषि, परिश्रम और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के गहरे संबंध को उजागर करती है। किसान ने बताया कि जब बाजार में कीमतें अस्थिर होती हैं, तब किसान अक्सर तनाव में रहते हैं, लेकिन भगवान के प्रति आस्था ने उन्हें संबल दिया। 20 बीघा खेत से 30 लाख रुपये की कमाई होना उनके जीवन का एक बड़ा बदलाव है, और सांवलिया सेठ के दरबार में चांदी का टमाटर अर्पित कर उन्होंने अपने दिल से आभार प्रकट किया है।



















