राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के औद्योगिक शहर भिवाड़ी में आने वाले नगर निकाय चुनावों के लिए तैयार की जा रही नई वोटर लिस्ट गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हालिया वार्ड परिसीमन और वोटर सूची के पुनरीक्षण के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। लोगों का कहना है कि उनके नाम बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के उनके मूल वार्ड से हटाकर पूरी तरह से अलग और दूर के वार्डों में दर्ज कर दिए गए हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही और कथित गड़बड़ी के कारण आम जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।
वार्ड बदलने का गंभीर आरोप और राजनीतिक दबाव
प्रभावित इलाकों के निवासियों का कहना है कि उनके मकान जिस वार्ड के अंतर्गत आते हैं, वहां से उनके और उनके पूरे परिवार के नाम मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं। जिन नए वार्डों में उनके नाम जोड़े गए हैं, वहां न तो उनकी कोई संपत्ति है और न ही उनका कभी उन क्षेत्रों से कोई आवासीय संबंध रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली और रसूखदार लोगों ने अपने निहित स्वार्थों और चुनावी लाभ को साधने के लिए इस तरह का फर्जीवाड़ा अंजाम दिया है, जिससे मतदाताओं को मतदान के दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
वार्ड नंबर 51 के निवासी ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन
इस पूरे मामले से जुड़ा एक प्रमुख मामला वार्ड नंबर 51 के तहत आने वाले ग्राम हरचंदपुर का सामने आया है। यहां के निवासी सुरेंद्र कुमार पुत्र नाथाराम ने इस धांधली के खिलाफ आवाज उठाते हुए सहायक कलेक्टर यानी एडीएम भिवाड़ी को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है और प्रशासन से तुरंत न्याय की गुहार लगाई है। सुरेंद्र कुमार का स्पष्ट कहना है कि वे और उनका पूरा परिवार लंबे समय से हरचंदपुर, तहसील टपूकड़ा के मूल निवासी हैं और उनके मताधिकार हमेशा से वार्ड नंबर 51 में ही पंजीकृत रहे हैं।
बिना आवेदन के वोटों के ट्रांसफर से मचा हड़कंप
पीड़ित सुरेंद्र कुमार को इस पूरी गड़बड़ी का पता 20 अगस्त को चला, जब उन्होंने सूची की जांच की। उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि बिना उनकी जानकारी, बिना किसी लिखित आवेदन और बिना किसी सहमति के उनके परिवार के सभी मतों को अवैध रूप से वार्ड नंबर 47 में स्थानांतरित कर दिया गया है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष यह बात जोर देकर कही है कि उनकी तरफ से अपना वार्ड बदलने या फॉर्म भरने का कोई भी अनुरोध कभी प्रस्तुत नहीं किया गया था।
प्रशासन से मूल वार्ड में नाम बहाल करने की मांग
इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच की जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके परिवारों के वोटों को तुरंत प्रभाव से उनके मूल वार्ड नंबर 51 में दोबारा दर्ज किया जाए, ताकि आगामी नगरपालिका चुनावों में वे अपने सही और अधिकृत क्षेत्र में बिना किसी बाधा के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।



















