जीवनसाथी के साथ घरेलू सामंजस्य बिठाना तो आम बात है, परंतु एक ही परिसर में सहकर्मी बनकर कर्तव्य निभाना किसी भी संबंध को एक विशेष धरातल प्रदान करता है। राजस्थान के बीकानेर संभाग के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान, राजकीय डूंगर महाविद्यालय में अध्यापन से जुड़ी एक बेहद अनूठी व्यवस्था नजर आती है। यहां कुल आठ युगल ऐसे हैं जो आपस में वैवाहिक बंधन में बंधे हुए हैं और इसी संस्थान में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से चार जोड़े तो ऐसे हैं जो कॉलेज के एक ही अध्ययन संकाय के अंतर्गत साथ बैठकर अपने रोजमर्रा के दायित्व पूरे करते हैं।
कामकाजी जीवन और व्यक्तिगत रिश्ते का सुंदर संतुलन
एक छत के नीचे रहकर शिक्षा प्रदान करने वाले इन प्राध्यापकों का मानना है कि इससे उनके निजी और कार्यक्षेत्र के तालमेल में सकारात्मक बदलाव आया है। भूगोल अध्ययन विभाग में बतौर सह आचार्य कार्यरत डॉ. देवेश सहारण तथा उनकी धर्मपत्नी डॉ. श्वेता नेहरा विगत 18 वर्षों से दांपत्य जीवन बिता रहे हैं। इसी विभाग में दोनों वर्षों से अध्यापन की जिम्मेदारियां साथ निभा रहे हैं। डॉ. श्वेता नेहरा के अनुसार, दोनों के मध्य का सामंजस्य उनकी पेशेवर एवं घरेलू दोनों प्रकार की जिम्मेदारियों को सहज बनाता है। उनका कहना है कि वर्तमान दौर में युवाओं को अपने वैवाहिक संबंधों में आपसी तालमेल, समझदारी और संयम को प्राथमिकता देनी चाहिए। आज की नई पीढ़ी में अक्सर जल्दबाजी और धैर्य की कमी देखी जाती है, जबकि कई मसलों पर तुरंत उत्तेजित होने के बजाय मौन रहना परिस्थितियों को अपने आप अनुकूल बना देता है।
साथ दायित्व निभाने के कई व्यावहारिक फायदे
डॉ. देवेश सहारण इस सह-अस्तित्व को दोनों के विकास के लिए बेहद फलदायी मानते हैं। उनका विचार है कि एक ही संस्थान में सेवा देने से दोनों को कार्यप्रणाली और विभागीय अपेक्षाओं की पूरी समझ रहती है, जिससे शैक्षणिक कार्यों में एक-दूसरे को भरपूर मदद मिल जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी शादी पारंपरिक पारिवारिक रजामंदी से तय हुई थी और दोनों के कुटुम्ब पहले से परिचित थे। संयोग से दोनों को कार्यभार भी एक साथ ही आवंटित हुआ था। शाम के वक्त चाय पीते हुए दिनभर के घटनाक्रम पर चर्चा करना और घरेलू मोर्चे पर भी एक-दूसरे का हाथ बंटाना उनके रिश्ते को मजबूती देता है। उनका मानना है कि आपसी सहायता से दफ्तर और घर का संतुलन सरलता से सध जाता है।
पारिवारिक और पेशेवर दायित्वों की स्पष्ट सीमाएं
समाजशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. शेरसिंह कुड़ी और उनकी जीवनसंगिनी डॉ. पूजा चौधरी भी इसी परिसर में नए अध्याय की शुरुआत कर चुके हैं। इस शिक्षण संस्थान में अध्यापन शुरू किए उन्हें अभी छह महीने का वक्त बीता है। डॉ. शेरसिंह का कहना है कि एक जैसी परिस्थितियों में रहने से वे कार्यक्षेत्र की चुनौतियों को गहराई से महसूस कर पाते हैं। वे घर की निजी समस्याओं को कार्यस्थल तक नहीं आने देते और संस्थान के कर्तव्यों का पूरी गंभीरता से निर्वहन करते हैं। दोनों का विवाह भी पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ था। दिलचस्प बात यह है कि दोनों की पहली मुलाकात साक्षात्कार के दौरान हुई थी, जिसके उपरांत पारिवारिक सहमति से वैवाहिक निर्णय लिया गया। उनका कहना है कि आज स्त्रियां घर के साथ-साथ दफ्तर का दायित्व बखूबी निभा रही हैं, इसलिए पुरुषों का सहयोग बेहद आवश्यक है। नए रिश्तों में मतभेद उभरना स्वाभाविक है, लेकिन सीधी बातचीत से जटिल से जटिल समस्या का निराकरण निकाला जा सकता है।
संस्थान में पदस्थ आठों शिक्षक युगलों की सूची
इस ऐतिहासिक राजकीय महाविद्यालय में अध्यापन करा रहे दंपतियों में विभिन्न विषयों के वरिष्ठ शिक्षाविद शामिल हैं। कॉलेज के प्राचार्य राजेंद्र पुरोहित प्राणीशास्त्र के प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी पत्नी अनिला पुरोहित इतिहास अध्ययन संकाय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं। राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र नाथ की धर्मपत्नी लीना शरण प्राणीशास्त्र विभाग में प्रोफेसर हैं। प्राणीशास्त्र के प्रोफेसर अनु शर्मा की जीवनसंगिनी सुमनलता त्रिपाठी वनस्पति विज्ञान विभाग में सेवाएं दे रही हैं। इसी तरह, भूगोल संकाय में डॉ. विजयप्रकाश सहायक आचार्य हैं और उनकी पत्नी विनीता मिर्धा भौतिक शास्त्र विभाग में सहायक आचार्य के पद पर पदस्थापित हैं।
चार युगल साझा कर रहे हैं अपना-अपना विभाग
संस्थान में कार्यरत इन जोड़ों में से चार ऐसे हैं जिनका विभाग भी बिल्कुल एक ही है। भूगोल विषय के विद्यार्थियों को डॉ. देवेश सहारण और डॉ. श्वेता नेहरा दोनों सह आचार्य के रूप में पढ़ाते हैं। इतिहास विषय में प्रोफेसर सुखाराम और उषा लामरोर दोनों प्रोफेसर के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। वहीं समाजशास्त्र अध्ययन संकाय में दो अलग-अलग युगल सेवाएं दे रहे हैं। इनमें डॉ. महेंद्र थोरी और डॉ. सुनीता मंडा दोनों सहायक आचार्य हैं, तथा डॉ. शेरसिंह कुड़ी और डॉ. पूजा चौधरी भी समाजशास्त्र विभाग में ही सहायक आचार्य के पद पर कार्यरत रहकर शिक्षण दे रहे हैं।


















