उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर बाराबंकी जिले की फतेहपुर तहसील में बसा दौलतपुर गांव कभी एक बड़े वादे का गवाह बना था। इस गांव की लगभग 3,000 की आबादी ने एक ऐसा दिन देखा था, जब आसमान में एक साथ चार-चार हेलिकॉप्टर गूंज रहे थे और सुरक्षा में सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात थे। तारीख 27 जनवरी 2008 थी, जब अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ इस मिट्टी पर उतरे थे। उनके साथ जया बच्चन, अभिषेक बच्चन और परिवार की नई बहू ऐश्वर्या राय मौजूद थीं। इस भव्य समारोह में राजनीति के कई कद्दावर चेहरे शामिल हुए थे, जिनमें मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, अमर सिंह, चंद्रबाबू नायडू, ओमप्रकाश चौटाला और फारूक अब्दुल्ला जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे। मौका था ऐश्वर्या राय कन्या डिग्री कॉलेज के शिलान्यास का, जहां 10 बीघा जमीन पर भूमिपूजन कर एक साल के भीतर शिक्षण कार्य शुरू कराने का संकल्प दोहराया गया था।
खाली पड़ा मैदान और चबूतरे पर झाड़-फूंक
उस ऐतिहासिक दिन के 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी दौलतपुर में शिक्षा का यह मंदिर आकार नहीं ले पाया। जिस 10 बीघा भूखंड पर बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी गई थी, वह आज भी वीरान और बंजर हालत में पड़ा है। शिलान्यास के समय तैयार किया गया ईंटों का विशाल चबूतरा और नाम पट्टिका तक वहां से गायब हो चुकी है। अब उस परिसर के एक कोने में पीपल के पेड़ की छांव तले ब्रह्मचारी बाबा का एक चबूतरा बना दिया गया है। ग्रामीणों की मानें तो डिग्री कॉलेज का काम आगे न बढ़ने पर इस स्थल का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों, हवन, झाड़-फूंक और आस्था से जुड़े उपचारों के लिए होने लगा है। विशेषकर शनिवार के दिन यहां लोगों की अच्छी-खासी भीड़ जुटती है।
इस धार्मिक चबूतरे की देखरेख करने वाले मुख्य पुजारी बुद्धिमान बाबा से जब प्रशासनिक अनुमति के संदर्भ में बात की गई, तो उन्होंने साफ इनकार करते हुए बताया कि कॉलेज की घोषणा से बहुत पहले से लोग इस पवित्र पेड़ की पूजा-अर्चना करते आ रहे थे। जब परियोजना पर कोई काम नहीं हुआ, तब ग्रामीणों के सहयोग से यह चबूतरा निर्मित किया गया।
दौलतपुर के ग्रामीणों की पीड़ा और बेटियों का सफर
गांव के 57 वर्षीय निवासी राकेश कुमार मिश्रा उस शिलान्यास समारोह के जनसैलाब को याद करते हुए बताते हैं कि उस दिन करीब 1 किलोमीटर के दायरे में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। बच्चन परिवार अपने साथ एक पुरोहित को लेकर आया था, जिसने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमिपूजन संपन्न कराया। लेकिन आज हकीकत यह है कि नींव खुदने के बावजूद वहां एक ईंट भी नहीं जुड़ सकी। जिन स्थानीय किसानों ने इस पुनीत कार्य के लिए अपनी उपजाऊ कृषि भूमि दी थी, वे वर्षों तक काम रुका देख क्षुब्ध हो गए और उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जिससे पूरी परियोजना कानूनी विवादों के भंवर में फंस गई।
शिक्षा की समुचित व्यवस्था न होने का सबसे बड़ा खामियाजा गांव की बेटियों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय महिला लक्ष्मी देवी के परिवार की दो बेटियां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं, जिन्हें प्रतिदिन दौलतपुर से बाराबंकी जिला मुख्यालय का लंबा सफर तय करना पड़ता है। लक्ष्मी देवी के अनुसार, फतेहपुर से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद लड़कियों के पास आगे के अध्ययन के लिए स्थानीय स्तर पर कोई विकल्प नहीं बचता। दौलतपुर, फतेहपुर और मोहम्मदपुर जैसे आसपास के क्षेत्रों से 500 से अधिक छात्राएं हर रोज लगभग 20 किलोमीटर साइकिल चलाकर जिला मुख्यालय जाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि यह संस्थान स्थापित हो जाता, तो बेटियों को इस भारी मशक्कत से मुक्ति मिल जाती।
राजस्व अभिलेखों में दर्ज जमीन और कानूनी दांव-पेंच
कॉलेज निर्माण की घोषणा से पूर्व भी इस भूखंड को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद उठे थे। अमिताभ बच्चन पर यह आरोप लगा था कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में नियमों को ताक पर रखकर सरकारी जमीन उनके नाम दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जब मायावती राज्य की मुख्यमंत्री बनीं, तो पूरे प्रकरण की जांच बाराबंकी जिला प्रशासन को सौंपी गई। इस सिलसिले में बिग बी के विरुद्ध धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज हुआ, हालांकि बाद में उच्च न्यायालय ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी।
तहसील फतेहपुर के राजस्व अभिलेखों की पड़ताल में लेखपाल सुधीर वर्मा की मदद से प्राप्त खतौनियों से स्पष्ट होता है कि बच्चन परिवार से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्ति आज भी कागजों में दर्ज है। गाटा संख्या 711 और 793 पर अमिताभ बच्चन का नाम सीधे तौर पर अंकित है, जबकि गाटा संख्या 1083, 1086 और 1088 में ऐश्वर्या राय कन्या कॉलेज का नाम दर्ज चला आ रहा है।
पूर्व ग्राम प्रधान राजकुमारी सिंह के आवास पर उनके पुत्र अमरेंद्र सिंह ने जमीन के विवादित पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कॉलेज स्थापना के उद्देश्य से उनके परिवार ने भी भूमि समर्पित की थी। वर्षों तक निर्माण न होने पर वे अदालत गए। बाद में अमिताभ बच्चन ने अपनी कुछ जमीन ग्रामीणों को वापस सौंप दी। वहीं एक-दो भूखंड गांव के बाहरी हिस्से में सीतापुर और बाराबंकी की सीमा पर स्थित हैं, जिन पर दोनों क्षेत्रों के काश्तकार अपना स्वामित्व जताते हैं, जिसके चलते यह भूखंड सीमा विवाद में उलझा हुआ है।
शिलान्यास के दिन ऐश्वर्या राय के शब्द
विवाह के मात्र नौ महीने बाद दौलतपुर पहुंचीं ऐश्वर्या राय अपने नाम पर शिक्षण संस्थान खोले जाने के निर्णय से चकित थीं। उस समय सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी झिझक साझा की थी। ऐश्वर्या राय ने कहा था,
“परिवार में दादाजी, दादीजी और माता-पिता मौजूद हैं, उनके नाम पर संस्थान होना अधिक उचित रहता।”
उन्होंने आगे कहा था कि जब परिवार के बुजुर्गों ने उन्हें समझाया, तो उन्होंने इसे बड़ों का आशीर्वाद माना और ईश्वर से इस स्वप्न को पूरा करने की प्रार्थना की। किंतु लगभग दो दशक बीत जाने के बाद भी यह संकल्प केवल वादों की फेहरिस्त में दबा रह गया है।
संस्थानों की निष्क्रियता और अधूरी परियोजना
दौलतपुर में प्रस्तावित इस डिग्री कॉलेज के निर्माण और संचालन का जिम्मा दो प्रमुख संस्थाओं अमिताभ बच्चन सेवा संस्थान और निष्ठा फाउंडेशन को सौंपा गया था। अमिताभ बच्चन सेवा संस्थान की चेयरपर्सन जया प्रदा हैं। संस्थान के सचिव अमित सिंह के अनुसार, घोषणा के शुरुआती दौर में स्थानीय लोगों में अपार उत्साह था। संस्थान की स्थापना को गति देने के लिए कन्या महाविद्यालय नामक एक विशेष समिति भी गठित की गई थी, जिसमें पूर्व आईएएस अधिकारी, स्थानीय ग्रामीण और बाहर के 7 से 8 प्रबुद्ध लोग शामिल थे।
प्रारंभ में निर्माण की जिम्मेदारी निष्ठा फाउंडेशन के पास थी, किंतु कई वर्षों तक धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद यह दायित्व अमिताभ बच्चन सेवा संस्थान को हस्तांतरित कर दिया गया। अमित सिंह ने जानकारी दी कि अमिताभ बच्चन ने इस पुनीत कार्य के लिए 5 लाख रुपये का आर्थिक अंशदान भी दिया था। परंतु उसके उपरांत बच्चन अथवा उनके वित्तीय सलाहकार राजेश ऋषिकेश से कोई संवाद स्थापित नहीं हो सका, जिसके कारण संपूर्ण प्रक्रिया ठप पड़ गई। करोड़ों रुपये की लागत वाली इस वृहद परियोजना का भविष्य आज भी अनिश्चितताओं के साए में है।
केबीसी के प्रसंग से फिर जागी दौलतपुर की आस
दौलतपुर के इस घटनाक्रम से करीब दो वर्ष पूर्व, प्रतापगढ़ जिले के बाबूपट्टी गांव में जया बच्चन ने हरिवंश राय बच्चन के नाम पर एक सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन किया था। यह अमिताभ बच्चन का पैतृक गांव है। हालांकि 20 साल का लंबा अरसा गुजर जाने के बावजूद वह पुस्तकालय भी विधिवत संचालित नहीं हो पाया।
टेलीविजन के लोकप्रिय रियलिटी गेम शो कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन ने इस विलंब पर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया था। बिग बी ने मंच से आश्वस्त किया था कि इस देरी के लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं और पुस्तकालय को जल्द क्रियान्वित किया जाएगा।
टेलीविजन पर प्रसारित इस बयान के बाद दौलतपुर के बाशिंदों के भीतर भी एक नई उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि अमिताभ बच्चन अपने पैतृक गांव की साहित्यिक धरोहर को संवारने की पहल कर सकते हैं, तो उन्हें बाराबंकी की इस अधूरी शैक्षणिक परियोजना पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि गांव की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दर-दर न भटकना पड़े।


















