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दूदू के नरैना में संघ प्रचारक से कथित बदसलूकी पर बवाल, थाने में धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने की पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांगराजस्थान
11 अक्तू॰ 2026, 10:44 am (2 घंटे पहले)· 1

दूदू के नरैना में संघ प्रचारक से कथित बदसलूकी पर बवाल, थाने में धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने की पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग

जयपुर ग्रामीण के दूदू क्षेत्र स्थित नरैना पुलिस थाने में आरएसएस के सांभर जिला प्रचारक से कथित दुर्व्यवहार और उन्हें हिरासत में लेने के विरोध में संघ कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है.

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले अंतर्गत दूदू इलाके में पुलिस प्रशासन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच गंभीर विवाद खड़ा हो गया है. नरैना पुलिस थाने के कर्मियों पर संघ के सांभर जिला प्रचारक के साथ बदसलूकी करने और उन्हें बेवजह हिरासत में बैठाने का आरोप लगा है. इस घटना की जानकारी सार्वजनिक होते ही बड़ी तादाद में संघ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण नरैना थाने में एकत्र हो गए. पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए आक्रोशित लोगों ने थाना परिसर में ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है.

रात की गश्त के दौरान विवाद की शुरुआत

पूरे घटनाक्रम की जड़ बीती रात की एक घटना से जुड़ी है. सांभर क्षेत्र के जिला प्रचारक किसी आवश्यक कार्य से नरैना इलाके में पहुंचे हुए थे. देर रात जब वे इलाके से गुजर रहे थे, तभी गश्त ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों का रवैया शुरुआत से ही काफी आक्रामक और गैर-पेशेवर था. बिना किसी ठोस वजह अथवा संदेह के पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और सरेआम गाली-गलौज पर उतर आए.

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थाने में बैठाने और शांति भंग के आरोप

विवाद केवल तीखी नोकझोंक तक सीमित नहीं रहा. आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी का धौंस दिखाते हुए जिला प्रचारक को जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया और नरैना थाने ले आए. वहां उन्हें शांति भंग करने के झूठे आरोप में थाने के भीतर बैठा दिया गया. देर रात जैसे ही संघ के स्थानीय कार्यकर्ताओं को यह सूचना मिली कि उनके जिला प्रचारक को पुलिस ने इस तरह से हिरासत में रखा है, संगठन से जुड़े लोगों में गहरा असंतोष फैल गया.

सुबह थाने पर उमड़ी भीड़ और नारेबाजी

सुबह होते ही मामले की खबर आसपास के पूरे इलाके में फैल गई. इसके बाद संघ के तमाम स्थानीय कार्यकर्ता, प्रमुख पदाधिकारी और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण नरैना पुलिस थाने पहुंचने लगे. देखते ही देखते थाना परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई. आक्रोशित लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी करते हुए परिसर में ही दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक इस मामले में न्यायोचित कदम नहीं उठाए जाते, वे थाने से हटने वाले नहीं हैं.

दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड करने की मांग

धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं की मुख्य मांग है कि जिला प्रचारक के साथ बदसलूकी, गाली-गलौज और गैरकानूनी बर्ताव करने वाले सभी दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए. प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बिना किसी जुर्म या शिकायत के एक सामाजिक संगठन के सम्मानित पदाधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव पुलिसिया मनमानी को उजागर करता है. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दोषी कर्मियों पर फौरन निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई तो इस आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसके परिणाम की पूरी जिम्मेदारी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की होगी.

सवाल-जवाब

नरैना पुलिस थाने में किस बात को लेकर धरना दिया जा रहा है?
आरएसएस के सांभर जिला प्रचारक के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित अभद्रता करने और उन्हें थाने में बैठाने के विरोध में यह धरना दिया जा रहा है.
यह घटना किस जगह और किस समय की है?
यह घटना राजस्थान के जयपुर ग्रामीण जिले के दूदू क्षेत्र अंतर्गत नरैना इलाके में बीती रात की है.
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग क्या है?
धरने पर बैठे लोगों की मुख्य मांग है कि जिला प्रचारक के साथ दुर्व्यवहार करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए.
पुलिस पर क्या गंभीर आरोप लगाए गए हैं?
पुलिसकर्मियों पर बिना किसी वजह के गाली-गलौज करने, वर्दी का रौब दिखाने और शांति भंग के झूठे आरोप में हिरासत में रखने का आरोप है.
थाने पर प्रदर्शन में कौन-कौन लोग शामिल हैं?
इस विरोध प्रदर्शन में संघ के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण शामिल हैं.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·30 मिनट पहले

रात में गश्त के दौरान पुलिस और संघ प्रचारक की यह भिड़ंत थोड़ी अजीब लगती है। क्या वाकई सिर्फ औपचारिकता में बात इतनी बढ़ गई या कोई और बात थी?

Ravikash Gupta@ravikash·30 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बात तो सही है। रात में ऐसे किसी को उठा लेना और फिर थाने में बिठाना बिना किसी पुख्ता वजह के, थोड़ा शक तो पैदा करता ही है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·52 मिनट पहले

पुलिस का काम सुरक्षा देना है, न कि रात को बेवजह किसी को रोककर बदतमीजी करना। अगर आरोप सही हैं, तो थाने के उन पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए वरना ये विरोध और बढ़ेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल मेरे साथ भी गश्त के दौरान ऐसा ही बदतमीजी भरा वाकया हुआ था जब पुलिस ने बिना बात रात को रोका था।

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