राजस्थान के कोटा जिले के सांगोद कस्बे में संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और सामाजिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। सांगोद नगरपालिका में सफाई कर्मचारी के तौर पर सेवाएं देने वाले एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को अंतिम सफर के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। बदहवास परिजनों को मजबूरी में नगरपालिका के कचरा उठाने वाले वाहन में शव रखकर खानपुर से सांगोद तक लाना पड़ा। व्यवस्था की इस लाचारी ने सरकारी मशीनरी के दावों की पोल खोल दी है।
7 अक्टूबर से घर से निकला था कर्मचारी
मृतक की पहचान सांगोद निवासी राकेश वाल्मीकि के रूप में हुई है, जो स्थानीय नगरपालिका में सफाई कर्मी के पद पर कार्यरत था। पारिवारिक सदस्यों के अनुसार राकेश बीते 7 अक्टूबर को अचानक बिना किसी को कोई जानकारी दिए घर से चला गया था। परिवार के लोगों ने बताया कि पहले भी वह कई मौकों पर बिना बताए चला जाता था और कुछ दिनों के अंतराल के बाद खुद ही घर लौट आता था। इसी आदत के चलते परिजनों ने इस दफा भी पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। उन्हें पूरा भरोसा था कि वह हमेशा की तरह सुरक्षित घर लौट आएगा, मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ।
खानपुर के नाले से बरामद हुआ शव
शुक्रवार के दिन खानपुर पुलिस को अनाज मंडी के समीप बहने वाले एक गंदे नाले में लावारिस शव पड़े होने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुंचा और शव को नाले से बाहर निकलवाकर उसकी पहचान कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। शनिवार को जब इस दुखद घटना की खबर सांगोद में परिजनों तक पहुंची, तो वे तुरंत खानपुर पहुंचे। वहां परिजनों ने मृतक की शिनाख्त राकेश वाल्मीकि के रूप में की। इसके पश्चात खानपुर पुलिस ने विधिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया और अंतिम क्रियाकर्म के लिए देह परिजनों को सौंप दी।
सड़न और दुर्गंध के कारण चालकों ने किया इनकार
पोस्टमार्टम की कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद पीड़ित परिवार के सामने सबसे विकट समस्या शव को पैतृक कस्बे सांगोद तक पहुंचाने की खड़ी हो गई। कई दिनों तक गंदे पानी में पड़े रहने की वजह से शव काफी फूल चुका था और उससे भयंकर बदबू उठ रही थी। परिजनों ने खानपुर से सांगोद तक ले जाने के लिए कई निजी एंबुलेंस चालकों और टैक्सी चालकों से हाथ जोड़कर विनती की। शव की अत्यधिक खराब स्थिति और दुर्गंध का हवाला देकर किसी भी एंबुलेंस चालक या निजी वाहन मालिक ने उसे ले जाने की हामी नहीं भरी।
कचरा उठाने वाले वाहन में निकली अंतिम यात्रा
लंबे समय तक कोशिश करने और तमाम मिन्नतों के बावजूद जब कोई साधन उपलब्ध नहीं हुआ, तो बेबस परिजनों के सामने कोई अन्य रास्ता नहीं बचा। अंत में निराश होकर परिजनों को सांगोद नगरपालिका के कचरा ढोने वाले वाहन का प्रबंध करना पड़ा। जिस इंसान ने अपनी पूरी जिंदगी सड़कों और बस्तियों का कूड़ा साफ करने में खपा दी, उसी की मृत देह को नगरपालिका के कचरा वाहन में लादकर लाया गया। खानपुर से सांगोद तक कचरा वाहन में शव ले जाने की इस घटना ने सरकारी शव वाहन व्यवस्था, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और नागरिक संवेदनाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।














