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राजस्थान के दो स्कूली बच्चों ने रचा इतिहास, 100 दिनों में हाथों से लिख डाले 100 उपनिषदराजस्थान
11 अक्तू॰ 2026, 9:53 am (37 मिनट पहले)· 1

राजस्थान के दो स्कूली बच्चों ने रचा इतिहास, 100 दिनों में हाथों से लिख डाले 100 उपनिषद

जालोर के 15 वर्षीय माधव और उनकी 14 वर्षीय बहन अर्चना ने छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए 100 उपनिषदों की हस्तलिखित प्रतियां तैयार की हैं।

राजस्थान के जालोर जिले से युवा पीढ़ी के समर्पण और बौद्धिक अनुशासन का एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। जहां आमतौर पर किशोर उम्र के बच्चे डिजिटल स्क्रीन या छुट्टियों में मौज-मस्ती में समय बिताते हैं, वहीं दो सगे भाई-बहनों ने अपनी छुट्टियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन में समर्पित कर दिया। दसवीं कक्षा के छात्र माधव जोशी और उनकी छोटी बहन अर्चना जोशी ने लगभग 100 दिनों के भीतर अपने हाथों से 100 प्राचीन उपनिषदों का सुलेखन पूरा किया है। इस कठिन काम को पूरा करने के लिए दोनों विद्यार्थियों ने महीनों तक लगातार समय प्रबंधन और कड़े संकल्प का परिचय दिया है।

काम का विभाजन और शैक्षणिक उपलब्धियां

इस पूरे लेखन कार्य को दोनों विद्यार्थियों ने आपस में व्यवस्थित तरीके से बांटा था। पंद्रह वर्षीय माधव जोशी ने कुल 65 उपनिषदों को अपनी हस्तलिपि में दर्ज किया, जबकि चौदह साल की नौवीं कक्षा की छात्रा अर्चना जोशी ने 35 उपनिषदों का हस्तलेखन संपन्न किया। उपनिषदों के गूढ़ और जटिल संस्कृत श्लोकों को समझकर साफ लिखावट में उतारने में दोनों को तकरीबन 100 दिन का समय लगा। इस लंबे दौर में हर दिन घंटों बैठकर लिखना और अपने लक्ष्य से भटके बिना काम जारी रखना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे दोनों ने अपने कड़े अनुशासन से आसान बना दिया।

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यह उपलब्धि केवल धार्मिक ग्रंथों के प्रति उनके लगाव तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों बच्चे अपनी नियमित स्कूली पढ़ाई में भी बेहद अव्वल हैं। माधव ने नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में 95.05 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। दूसरी ओर, उनकी छोटी बहन अर्चना ने आठवीं कक्षा में जिला स्तर की मेरिट सूची में स्थान बनाया था। उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड के कारण अर्चना को राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिष्ठित पद्माक्षी पुरस्कार के लिए भी चुना जा चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों बच्चे पाठ्येतर गतिविधियों के साथ अपनी मुख्य पढ़ाई में भी पूरा संतुलन बनाए रखते हैं।

कोरोना काल में 2,100 पन्नों में लिखी थी संपूर्ण रामचरितमानस

यह पहला मौका नहीं है जब इन दोनों भाई-बहनों ने किसी बड़े ग्रंथ को हाथों से लिखकर पूरा किया हो। इससे पहले वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौर में लगे लॉकडाउन के समय भी दोनों ने ऐसा ही अनूठा काम किया था। उस दौरान जब माधव कक्षा चार और अर्चना कक्षा तीन में पढ़ते थे, तब दोनों ने मिलकर 2,100 पन्नों में संपूर्ण रामचरितमानस का हस्तलेखन किया था। इतनी छोटी उम्र में शुरू हुई यह साधना आज उपनिषदों के लेखन तक पहुंच चुकी है।

माधव और अर्चना के पिता संदीप जोशी पेशे से एक शिक्षक हैं। अपने पिता के सानिध्य और मार्गदर्शन से दोनों बच्चों को रचनात्मक और बौद्धिक कार्यों की निरंतर प्रेरणा मिलती रहती है। लेखन के अलावा दोनों विद्यार्थियों की रुचि स्वरचित कविताएं लिखने, काव्य पाठ करने तथा कई तरह की तकनीकी और रचनात्मक गतिविधियों में भी है। उपनिषदों का सुलेखन करते हुए उन्हें भारतीय दर्शन, आत्मचिंतन और प्राचीन वैदिक ज्ञान परंपरा को गहराई से जानने का प्रत्यक्ष अनुभव मिला है।

युवा शक्ति और समय के सदुपयोग का सकारात्मक उदाहरण

आज के सामाजिक परिवेश में युवा वर्ग को लेकर अक्सर तरह-तरह की बहसें चलती रहती हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में जहां सीजेपी और जेन-जी से जुड़े प्रदर्शनों के जरिए युवा अपनी मुखर उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, वहीं जालोर के इन दो स्कूली विद्यार्थियों की कहानी किशोर पीढ़ी का एक अलग और गंभीर दृष्टिकोण पेश करती है। यह सिद्ध करता है कि युवाओं की ऊर्जा का प्रवाह केवल विरोध या प्रदर्शनों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यदि सही दिशा मिले तो वे गहन अध्ययन, शोध और रचनात्मक सृजन में भी अप्रतिम योगदान दे सकते हैं।

माधव और अर्चना की यह साधना यह साबित करती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। आवश्यक केवल आंतरिक लगन, धैर्य और समय का सही इस्तेमाल है। अवकाश के समय को व्यर्थ गंवाने की जगह बौद्धिक विकास में लगाकर इन दोनों बच्चों ने समूचे छात्र वर्ग के सामने एक मिसाल कायम की है।

सवाल-जवाब

माधव और अर्चना जोशी ने कितने दिनों में यह कार्य पूरा किया?
दोनों भाई-बहनों ने लगभग 100 दिनों में 100 उपनिषदों का हस्तलेखन पूरा किया।
किस बच्चे ने कितने उपनिषद लिखे?
माधव जोशी ने 65 उपनिषद और अर्चना जोशी ने 35 उपनिषद अपनी नोटबुक में लिखे।
दोनों बच्चे किस कक्षा में पढ़ते हैं?
माधव जोशी 15 वर्ष के हैं और कक्षा 10 के छात्र हैं, जबकि 14 वर्षीय अर्चना जोशी कक्षा 9 की छात्रा हैं।
शैक्षणिक स्तर पर दोनों का प्रदर्शन कैसा रहा है?
माधव ने कक्षा 9 में 95.05 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि अर्चना कक्षा 8 में जिला मेरिट में रहीं और पद्माक्षी पुरस्कार के लिए चुनी गईं।
क्या इन बच्चों ने पहले भी कोई धार्मिक ग्रंथ लिखा था?
हां, 2020 में कोरोना काल के दौरान दोनों ने 2,100 पन्नों में संपूर्ण रामचरितमानस का हस्तलेखन किया था।
इन बच्चों के पिता क्या करते हैं?
उनके पिता संदीप जोशी पेशे से एक शिक्षक हैं, जिनसे बच्चों को निरंतर प्रेरणा मिलती है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·9 मिनट पहले

आजकल के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना ही मुश्किल है, ऐसे में इन भाई-बहनों ने तो कमाल ही कर दिया है। सौ दिनों में इतने सारे उपनिषद अपने हाथ से लिखना सचमुच गजब का संयम मांगता है। बस यह जानने की इच्छा है कि जब ये बच्चे लिख रहे थे, तब उनके माता-पिता ने इन्हें रोज़ कितने घंटे लिखने के लिए बैठाया था?

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 मिनट पहले

रोहन भाई, पिता खुद शिक्षक हैं, तो ज़ाहिर है अनुशासन घर से ही मिला होगा।

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