राजस्थान में मानसून की विदाई का सिलसिला जारी है, लेकिन श्रीगंगानगर में मौसम ने अचानक ही ऐसा रुख बदला जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। सोमवार को जिले में तेज हवाओं के साथ आसमान बादलों से घिर गया और धूल भरी आंधी का ऐसा दौर चला कि दोपहर के वक्त ही सड़कों पर अंधेरा सा छा गया। इस अचानक आए बदलाव के कारण विजिबिलिटी बहुत कम हो गई और खुले इलाकों में धूल के गुबार उड़ने लगे। सड़कों पर वाहन चलाने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई ड्राइवरों को अपनी गाड़ियां रोककर आंधी थमने का इंतजार करना पड़ा।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक दिखा असर
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का प्रभाव सिर्फ शहरी सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि श्रीगंगानगर शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी साफ नजर आया। आसमान में मंडराते काले बादलों और चारो तरफ उड़ती धूल ने पूरे परिवेश का रंग ही बदलकर रख दिया। आमतौर पर सितंबर के इस दौर में दोपहर के समय धूप खिली रहती है, लेकिन इस आंधी की वजह से कुछ इलाकों में दिन के उजाले में भी शाम जैसा नजारा देखने को मिला। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मौसम आमतौर पर गर्मियों के दिनों में आने वाली आंधी जैसा महसूस हो रहा था, हालांकि साल के इस समय यानी सितंबर के आखिर में ऐसा नजारा देखना थोड़ा अनोखा जरूर है।
चूरू और बीकानेर के बाद अब श्रीगंगानगर में बदला मौसम
इस तरह की काली-पीली और धूल भरी आंधियां अमूमन गर्मियों के महीनों में ज्यादा सक्रिय रहती हैं। जब तापमान अधिक होता है और जमीन सूखी होती है, तब तेज हवाएं चलकर इस तरह के धूल के गुबार खड़े करती हैं। इस बार मानसून की वापसी के समय श्रीगंगानगर में भी कुछ वैसा ही माहौल देखने को मिला है। इससे पहले पिछले दिनों चूरू और बीकानेर के इलाकों में भी तेज आंधी के दौरान ऐसा ही मौसम सामने आ चुका है। हालांकि जानकारों का मानना है कि श्रीगंगानगर में चली इस आंधी की तीव्रता उन पिछली घटनाओं की तुलना में थोड़ी कम रही है।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट और किसानों की चिंताएं
भारतीय मौसम विभाग ने श्रीगंगानगर समेत आसपास के प्रभावित क्षेत्रों के लिए हल्की से मध्यम बारिश और तेज मौसमी गतिविधियों को लेकर येलो अलर्ट जारी कर दिया है। इस चेतावनी के बाद आंधी के तुरंत बाद बारिश होने की पूरी संभावना बनी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून के लौटने के इस चरण में स्थानीय स्तर पर मौसम अचानक करवट ले सकता है। पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में मानसूनी हवाएं भले ही कमजोर पड़ चुकी हों, लेकिन स्थानीय कारकों की वजह से हवा, बादलों की आवाजाही और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। तेज आंधी के कारण खेतों और ग्रामीण इलाकों में भी हलचल तेज हो गई है। किसानों की निगाहें अब पूरी तरह आसमान पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस समय खरीफ फसलों के पकने और उनकी सेहत के लिहाज से अचानक आने वाली हवाएं और बारिश काफी अहमियत रखती हैं। श्रीगंगानगर में मानसून की विदाई के वक्त गर्मियों जैसे तेवर दिखाने वाली यह धूल भरी आंधी आने वाले दिनों के मौसम का नया संकेत दे रही है।



















