ब्यावर जिले के फतेहगढ़ सल्ला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर लापरवाही के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रशासनिक सुस्ती के चलते सैकड़ों बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है, जिससे परेशान होकर विद्यार्थियों के परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने सोमवार को स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। इसके बाद सभी ने शिक्षा विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि यह आक्रोश अचानक नहीं उभरा, बल्कि विभाग के लंबे समय से चले आ रहे उदासीन रवैये का नतीजा है।
जर्जर भवन में पढ़ाई कर रहे सैकड़ों बच्चे
इस स्कूल में इस समय करीब 345 छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, लेकिन जिस इमारत में वे बैठते हैं उसकी हालत बेहद खतरनाक हो चुकी है। स्कूल की दीवारों में लंबी दरारें पड़ चुकी हैं और छत भी काफी कमजोर हो चुकी है। बच्चों के माता-पिता का कहना है कि वे हर रोज अपने पाल्यों को स्कूल भेजने के बाद डरे रहते हैं। उन्हें हर पल यह डर सताता रहता है कि कहीं यह पुरानी इमारत ढह न जाए और कोई बड़ा हादसा न हो जाए। परिजनों की यह चिंता पूरी तरह से स्वाभाविक है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर स्थिति की अनदेखी कर रहे हैं।
नया भवन तैयार होने के बावजूद नहीं हुई शिफ्टिंग
इस भारी नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यह है कि बच्चों के लिए एक नया स्कूल भवन पहले ही बनकर तैयार हो चुका है। सरकार द्वारा इस नए निर्माण पर भारी राशि खर्च की गई है, ताकि बच्चों को एक सुरक्षित माहौल मिल सके। इसके बावजूद 345 विद्यार्थियों को खतरनाक और पुरानी इमारत में ही कक्षाएं लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब नया भवन पूरी तरह तैयार है, तो उसे समय पर शुरू क्यों नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को इस समस्या के बारे में बताया, लेकिन उनकी शिकायतों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
शिक्षा अधिकारियों की समझाइश जारी
स्कूल के गेट पर तालाबंदी और विरोध प्रदर्शन की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए शिक्षा विभाग के एसीबीईओ दिलावर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां पहुंचकर हालात का जायजा लिया और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों तथा परिजनों से बातचीत का दौर शुरू किया। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच अभी बातचीत जारी है। ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक स्कूल को नए भवन में स्थानांतरित करने का पक्का और लिखित आदेश नहीं दिया जाता, तब तक वे ताला नहीं खोलेंगे।




















