कम निवेश के साथ अपना खुद का काम शुरू करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए स्टेशनरी का बिजनेस एक आकर्षक विकल्प साबित हो सकता है। झारखंड के कोडरमा जिले के अंतर्गत आने वाले झुमरी तिलैया बाजार क्षेत्र में इस प्रकार का कारोबार शुरू करना काफी फायदेमंद माना जाता है। खासकर तिलैया थाना के आसपास अपनी दुकान स्थापित करने से पहले किराए, पगड़ी, फर्नीचर, स्टॉक और संभावित मुनाफे का पूरा हिसाब लगा लेना समझदारी होती है। इसी सिलसिले में तिलैया थाना के समीप एवन बुक सेंटर चलाने वाले विक्की केसरी ने इस कारोबार से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर चर्चा की है। उनका मानना है कि किसी भी नए उद्यम की शुरुआत करने से पहले उससे जुड़ी बुनियादी जानकारी और बाजार की नब्ज को समझना बहुत जरूरी होता है। बाजार की यही समझ और बुनियादी जानकारी किसी भी बिजनेस के लिए ईंधन का काम करती है और जब यह हुनर आ जाता है तो कारोबार से मुनाफा जल्दी मिलने लगता है।
कॉपियों की मांग और उनके प्रकार
स्टेशनरी की दुकानों पर यूं तो पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी तमाम चीजें मिलती हैं लेकिन इनमें सबसे ज्यादा मांग कॉपियों की ही बनी रहती है। कॉपियां मुख्य रूप से दो अलग-अलग तरीकों से बाजार में उपलब्ध होती हैं। पहली कैटेगरी रेडीमेड कॉपियों की होती है जो सीधे कारखाने से बनकर दुकानों तक पहुंचती हैं। दूसरी कैटेगरी उन कॉपियों की है जिन्हें स्टेशनरी विक्रेता खुद अपनी दुकान पर विशेष मशीनों की सहायता से तैयार करते हैं। जो लोग कम पूंजी के साथ इस कारोबार में उतरना चाहते हैं उनके लिए रेडीमेड कॉपियां खरीदकर बेचना सबसे आसान और सुगम विकल्प होता है। इसके विपरीत अपनी दुकान पर खुद कॉपियां तैयार करने के लिए अलग से मशीनरी लगानी पड़ती है, श्रम यानी मैनपावर की आवश्यकता होती है और अतिरिक्त समय भी खर्च होता है जिससे शुरुआती लागत और निवेश काफी बढ़ जाता है।
दुकान का किराया, आकार और पगड़ी का सिस्टम
यदि आप लगभग आठ फीट चौड़ाई और दस फीट लंबाई वाली दुकान का सेटअप तैयार कर रहे हैं तो उसमें रैक और अन्य जरूरी फर्नीचर लगवाने में करीब 70 से 80 हजार रुपये तक का खर्च आ जाता है। स्टेशनरी के सामानों को ग्राहकों के सामने व्यवस्थित ढंग से सजाकर रखने के लिए मजबूत रैक और काउंटर का सही उपयोग करना बेहद आवश्यक है। तिलैया थाना के आसपास के इलाके में ऐसी दुकानों का मासिक किराया आमतौर पर चार से पांच हजार रुपये के आसपास रहता है। इसके अतिरिक्त दुकान किराए पर लेते समय पगड़ी यानी सिक्योरिटी डिपॉजिट की राशि भी चुकानी पड़ सकती है। इस क्षेत्र में नियम अलग-अलग जगहों पर भिन्न हैं जहां कहीं छह महीने तो कहीं पूरे बारह महीने के किराए के बराबर रकम पगड़ी के तौर पर वसूली जाती है।
करीब 5 लाख रुपये में शुरू हो सकता है पूरा सेटअप
पगड़ी की रकम, दुकान का फर्नीचर तैयार कराने और शुरुआती दौर में स्टॉक भरने जैसे तमाम खर्चों को मिलाकर एक बेहतरीन स्टेशनरी दुकान का सेटअप तैयार करने में लगभग 5 लाख रुपये तक के निवेश की आवश्यकता पड़ सकती है। इस कारोबार की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें लगभग 20 प्रतिशत तक का मुनाफा आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा इस धंधे की एक और बड़ी खूबी यह है कि स्टेशनरी का अधिकांश सामान खाने-पीने की वस्तुओं की तरह जल्दी खराब या एक्सपायर नहीं होता है। साथ ही कॉपियां, पेन, पेंसिल और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों की मांग साल के बारह महीने रोजमर्रा की जरूरत के तौर पर बनी रहती है।
बाजार की समझ और बिजनेस को लेकर जरूरी सीख
कोई भी नया काम शुरू करने से पहले इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि आपको आधुनिक ट्रेंड और बाजार की डिमांड की अच्छी समझ हो। यानी आप जिस भी क्षेत्र में उतरने की सोच रहे हैं उस उत्पाद की क्वालिटी और वैरायटी की परख आपके पास होनी चाहिए। इसके अलावा दूसरी सबसे जरूरी बात यह है कि जिस तरह नौकरीपेशा लोग लंबे समय तक छोटी-छोटी बचत करते हैं, उसी प्रकार व्यापार से भी आमदनी धीरे-धीरे ही रफ्तार पकड़ती है। बहुत से लोग बिजनेस को बेहद आसान और केवल समय काटने का जरिया मान लेते हैं, लेकिन इस तरह की मानसिकता के साथ काम करने पर नुकसान के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता। इससे बेहतर यही होगा कि आप अपनी पसंद और रुचि के अनुसार कोई नौकरी ही कर लें। ठीक उसी तरह जैसे वर्षों की पढ़ाई और कठिन मेहनत के बाद लोगों को नौकरी मिलती है, वैसे ही व्यापार में भी अपनी लागत के हिसाब से ठीक-ठाक कमाई शुरू होने में कम से कम तीन से चार साल की कड़ी मेहनत की जरूरत होती है।





















