हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की विदाई से ठीक पहले मौसम ने अचानक करवट ली है, जिसके चलते राज्य के विभिन्न हिस्सों में झमाझम बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। पिछले बारह घंटों के दौरान कांगड़ा, मंडी, किन्नौर, शिमला और सिरमौर जैसे जिलों में मौसम बेहद खराब रहा है। खास बात यह है कि राज्य में लगभग छह साल के लंबे अंतराल के बाद सितंबर के महीने में पहाड़ों पर बर्फबारी दर्ज की गई है। इस बदलाव से पहाड़ी इलाकों में ठंड काफी बढ़ गई है और ऐसा महसूस हो रहा है कि सर्दियों ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है।
किन्नौर और लाहौल-स्पीति में बर्फबारी का कहर
किन्नौर जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों के साथ-साथ लाहौल-स्पीति, रोहतांग और धौलाधार की चोटियों पर ताजा हिमपात हुआ है। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच इन इलाकों में लगातार गिर रही बर्फ से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, किन्नौर के पूह इलाके में नेशनल हाईवे बर्फबारी और भूस्खलन की वजह से पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इसके अलावा पूरे प्रदेश में लगभग छियासठ सड़कें बंद पड़ी हैं, जिनमें अकेले मंडी जिले की सराज घाटी का इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। सड़कों के बंद होने और करीब एक सौ सोलह ट्रांसफार्मर ठप पड़ने से बिजली की आपूर्ति भी बाधित हो गई है।
शिमला के रोहड़ू में डरावनी लैंडस्लाइड
राजधानी शिमला के रोहड़ू इलाके में एक भयंकर भूस्खलन की घटना सामने आई है, जिसका वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ है। शिमला के जांगलिख पुल के नजदीक रविवार को हुई इस लैंडस्लाइड के समय वहां अफरातफरी का माहौल बन गया था। गनीमत यह रही कि पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर और मलबा गिरने की आवाज समय रहते सुनाई दे गई, जिससे स्थानीय नागरिकों ने सूझबूझ दिखाते हुए सड़क से गुजर रहे वाहन चालकों को तुरंत सतर्क कर दिया। इस क्षेत्र में खराब मौसम और बारिश के दौरान पहाड़ों से चट्टानें खिसकने का खतरा हमेशा बना रहता है।
मौसम विभाग का अलर्ट और तापमान में बड़ी गिरावट
मौसम विज्ञान केंद्र के शिमला कार्यालय द्वारा जारी बुलेटिन के मुताबिक, पिछले बीस घंटों में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री और अधिकतम तापमान में दो से सात डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर तो पारे में दो से बारह डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट आई है। राज्य में सबसे अधिक वर्षा कांगड़ा जिले में सतह पर इकहत्तर दशमलव चार मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा धर्मशाला, सांगला, सराहन, पांवटा साहिब, कल्पा, जोगिंदरनगर, भाबानगर, मंडी और रामपुर में भी झमाझम पानी बरसा है।
मॉनसून की विदाई में देरी और आगे का पूर्वानुमान
सामान्य तौर पर पच्चीस सितंबर के आसपास विदा होने वाला मॉनसून इस बार देरी से जा रहा है। हालांकि पंजाब और चंडीगढ़ के कई क्षेत्रों से मॉनसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन हिमाचल में इसका असर अभी भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने अट्ठाइस सितंबर के लिए येलो अलर्ट और उनतीस सितंबर को हल्की बारिश की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार उनतीस सितंबर के बाद राज्य में आसमान साफ होने लगेगा और चार अक्टूबर तक मौसम पूरी तरह शुष्क रहने तथा धूप खिलने की उम्मीद है।
राज्यभर में मॉनसून सीजन का भारी नुकसान
आपदा प्रबंधन के आंकड़ों के अनुसार इस पूरे मॉनसून सीजन के दौरान प्रदेश को लगभग तीन हजार दो सौ उन्नीस करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। इस अवधि में कुल तीन सौ انہत्तर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। राहत और बचाव दल की रिपोर्ट बताती है कि कुल मौतों में से दो सौ बीस मौतें केवल सड़क हादसों की वजह से हुईं, जबकि भूस्खलन, अचानक बाढ़ आने, डूबने, सांप काटने और ऊंचाई से गिरने की घटनाओं में लगभग एक सौ انचास लोगों की जान गई है।



















