राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित मंड्रेला कस्बे का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस समय स्वास्थ्य सेवाओं की बजाय प्रशासनिक अनुशासनहीनता और चिकित्सकों के आपसी तनाव के चलते चर्चा में आ गया है। इस सरकारी अस्पताल के भीतर चिकित्सा अधिकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक का एक वीडियो सोशल मीडिया मंचों पर व्यापक रूप से सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। कार्यस्थल पर उपजे इस विवाद ने न केवल अस्पताल के भीतर के कामकाजी माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और जिम्मेदार पदों पर बैठे स्वास्थ्य कर्मियों के आचरण को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
प्रभारी कक्ष में हंगामे के बाद थमाया गया नोटिस
अस्पताल परिसर में बढ़ते तनाव और अनुशासनहीनता के इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मंड्रेला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। डॉ. शर्मा ने अस्पताल में ही कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया के खिलाफ आधिकारिक कार्यालय आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के माध्यम से डॉ. नूनिया से ड्यूटी के दौरान किए गए कथित अशोभनीय आचरण, अस्पताल व्यवस्था में व्यवधान डालने और तय आचार संहिता के उल्लंघन पर औपचारिक लिखित स्पष्टीकरण की मांग की गई है। प्रशासनिक स्तर पर इसे संस्थान की गरिमा और अनुशासन की पुनर्स्थापना के लिए एक आवश्यक कदम माना जा रहा है।
ड्यूटी पर नशे की हालत में अभद्रता करने का आरोप
प्रभारी डॉ. प्रदीप शर्मा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में कई अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाले तथ्यों का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार नूनिया बिना किसी पूर्व सूचना अथवा आधिकारिक औचित्य के अचानक प्रभारी कक्ष में दाखिल हुए। कक्ष में प्रवेश करते ही उन्होंने डॉ. शर्मा के साथ बिना किसी वाजिब कारण के कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक और असंसदीय भाषा का उपयोग करना शुरू कर दिया। इस शिकायती पत्र में सबसे बड़ा आरोप यह दर्ज किया गया है कि बातचीत, शारीरिक हाव-भाव और हरकतों से डॉ. नूनिया पूरी तरह से भारी शराब के नशे में धुत प्रतीत हो रहे थे। एक जिम्मेदार वरिष्ठ चिकित्सक का ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पाया जाना बेहद चिंताजनक विषय है।
साक्ष्य के तौर पर वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित
डॉ. प्रदीप शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत को केवल मौखिक आरोपों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि ठोस दस्तावेजी साक्ष्यों की तैयारी भी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब डॉ. नूनिया प्रभारी कक्ष के भीतर हंगामा कर रहे थे, उस दौरान घटित हर एक गतिविधि की स्पष्ट वीडियो रिकॉर्डिंग तैयार कर ली गई थी। यह वीडियो फुटेज आधिकारिक तौर पर पूरी तरह सुरक्षित रख लिया गया है। डॉ. शर्मा का कहना है कि आगामी दिनों में यदि उच्चाधिकारियों द्वारा विभागीय जांच समिति बैठाई जाती है अथवा साक्ष्यों की मांग की जाती है, तो इस संपूर्ण वीडियो क्लिप को आधिकारिक और अकाट्य प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
अड़तालीस घंटे की मोहलत और विभागीय कार्रवाई की चेतावनी
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने अपने कार्यालय पत्र में इस पूरे वाकये को राजकीय सेवा नियमावली, सरकारी कार्यालय की मर्यादा और पेशेवर अनुशासन पर सीधा आघात करार दिया है। जारी नोटिस में डॉ. नूनिया को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे पत्र प्राप्त होने के दो दिन यानी 48 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रभारी कार्यालय में प्रस्तुत करें। आदेश में यह सख्त चेतावनी भी दर्ज की गई है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला या स्पष्टीकरण देने में आनाकानी की गई, तो मामले की पूरी रिपोर्ट बनाकर कठोर दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा के साथ स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को अग्रसारित कर दी जाएगी।
पहले की समझाइश बेअसर, उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
प्रभारी डॉ. प्रदीप शर्मा के अनुसार, डॉ. नूनिया की ओर से ऐसा आपत्तिजनक आचरण सामने आने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उनके कामकाजी तौर-तरीकों और व्यवहार में सुधार लाने के लिए उन्हें कई बार व्यक्तिगत स्तर पर मौखिक रूप से समझाया और आगाह किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर की गई इन समझाइशों और चेतावनियों का उनके रवैये पर कोई अनुकूल असर देखने को नहीं मिला और कार्यस्थल पर कथित अशोभनीय व्यवहार की पुनरावृत्ति जारी रही। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए डॉ. शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि वे इस पूरे प्रकरण का अविलंब संज्ञान लें और कार्यस्थल की मर्यादा भंग करने के जिम्मेदार व्यक्ति पर कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करें।


















