दुबई से तेल अवीव की उड़ान भर रहे फ्लाईदुबई के एक विमान में अपहरण की कोशिश को बहादुरी से विफल करने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के सम्मान में कला जगत से एक भावुक श्रद्धांजलि सामने आई है। इस संकटपूर्ण यात्रा के दौरान ओमानी सह-पायलट ने विमान को बंधक बनाने का खतरनाक प्रयास किया था, जिसे कैप्टन स्मित मच्छार ने असाधारण सूझबूझ और अदम्य शौर्य का परिचय देते हुए पूरी तरह विफल कर दिया। इस हिंसक टकराव में कैप्टन गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे और फिलहाल उनका चिकित्सकीय उपचार जारी है। जहां एक ओर पूरे देश में उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की जा रही है, वहीं जयपुर के जाने-माने चित्रकार चंद्र प्रकाश गुप्ता ने इस जांबाज पायलट के सम्मान में अपने जलरंगों का इस्तेमाल कर एक शानदार वाटर कलर पेंटिंग बनाई है।
जलरंगों में जीवंत हुआ भारतीय पायलट का शौर्य
जयपुर के वरिष्ठ कलाकार चंद्र प्रकाश गुप्ता ने अपनी इस कलाकृति के जरिए संकट के समय कर्तव्य पर अडिग रहने वाले पायलट के चेहरे के तेज और दृढ़ संकल्प को कैनवास पर बखूबी प्रस्तुत किया है। गुप्ता वाटर कलर विधा के सिद्धहस्त कलाकार माने जाते हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने विमान अपहरण के इस प्रयास और उसमें कैप्टन स्मित के पराक्रम के बारे में सुना, तो एक भारतीय के नाते उनका हृदय अपार गर्व से भर गया। एक संवेदनशील कलाकार के रूप में अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए उन्होंने बिना कोई देर किए अपनी तूलिका संभाली और विपरीत हालात में धैर्य और पराक्रम की मिसाल कायम करने वाले कैप्टन की यह तस्वीर तैयार की।
नागरिकों के लिए प्रेरणा बना कर्तव्यबोध
चित्रकार चंद्र प्रकाश गुप्ता का कहना है कि आसमान में घटित उस भयानक घटना के दौरान भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस अटूट वीरता का प्रदर्शन किया, वह हर देशवासी के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने अपने स्वयं के जीवन को भारी जोखिम में डालकर सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की और वैश्विक पटल पर भारत के गौरव को बढ़ाया। कलाकार का मानना है कि प्रत्येक नागरिक को कैप्टन स्मित के इस जज्बे से सीख लेते हुए अपने दैनिक जीवन में कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए। गुप्ता ने यह हार्दिक इच्छा भी व्यक्त की है कि यदि भविष्य में कभी उन्हें कैप्टन स्मित मच्छार से प्रत्यक्ष मिलने का सुअवसर मिलता है, तो वे स्वयं यह अनूठी कलाकृति उन्हें भेंट करेंगे।
कारगिल संघर्ष से शुरू हुआ था राष्ट्रनायकों के अंकन का सिलसिला
जयपुर के चंद्र प्रकाश गुप्ता पिछले 45 वर्षों से अनवरत चित्रकला के क्षेत्र में समर्पित हैं और देश के वीर सपूतों को अपनी कला के माध्यम से नमन करने का उनका प्रयास दशकों पुराना है। लगभग 26 वर्ष पूर्व जब भारत और पाकिस्तान के मध्य कारगिल का भीषण युद्ध लड़ा जा रहा था, तब पूरा राष्ट्र सैनिकों के बलिदान और अदम्य साहस के प्रति कृतज्ञता से भरा हुआ था। उसी ऐतिहासिक दौर में गुप्ता ने सीमा पर वीरगति को प्राप्त हुए अमर शहीदों के तैलचित्र (ऑयल पेंटिंग) बनाने की शुरुआत की थी। वे इन चित्रों को केवल स्टूडियो तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि स्वयं बलिदानियों के सुदूर गांवों तक यात्रा करके उनके परिजनों को पूरे आदर के साथ ये चित्र सौंपते थे।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर के प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं कलाकार
विगत 35 वर्षों के अपने इस निःस्वार्थ और पुनीत कलात्मक अभियान के अंतर्गत गुप्ता अब तक 400 से अधिक बलिदानी सैनिकों के अत्यंत सजीव और गरिमामय पोट्रेट तैयार कर चुके हैं। कला जगत और राष्ट्रसेवा में उनके इस अतुलनीय समर्पण को समय-समय पर बड़े मंचों पर सम्मानित किया गया है। वर्ष 2000 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने उन्हें उनके इस योगदान के लिए सम्मानित किया था। इसके पश्चात वर्ष 2001 में राजस्थान सरकार ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया। इसके अलावा, राजस्थान बुक्स ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से उन्हें 'राजस्थान एक्सीलेंस अवार्ड' से भी विभूषित किया जा चुका है।























