पानी की एक-एक बूंद को सहेजने का संकल्प लेकर निकले राजस्थान के एक शिक्षक ने पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल कायम की है। सीकर जिले की फतेहपुर तहसील स्थित जेठवा का बास गांव के निवासी बजरंग लाल जेठू ने अपने जीवन के 32 साल पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में समर्पित कर दिए हैं। एक सरकारी शिक्षक के तौर पर करियर शुरू करने वाले बजरंग लाल ने नौकरी के दौरान जो अभियान शुरू किया था, वह रिटायरमेंट के बाद भी निरंतर चल रहा है। अपनी निजी कमाई, किताबों से मिले सम्मान की राशि और जनसहयोग के बल पर उन्होंने सीकर, नागौर और चूरू जिलों में करीब 50 पुराने और उपेक्षित तालाबों की साफ-सफाई करवाकर उनका कायाकल्प किया है।
1993 की चुनावी ड्यूटी ने बदल दी सोच की दिशा
जल संरक्षण के इस सफर की शुरुआत साल 1993 में हुई, जब बजरंग लाल की ड्यूटी नागौर जिले में प्रशासनिक कार्यों के तहत लगी थी। जसवंतगढ़ इलाके में चुनावी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने देखा कि देखरेख के अभाव में कई पुराने तालाब सूख चुके थे और अपना वजूद खो रहे थे। उसी दौरान उन्हें चुनाव के सिलसिले में मुंडवा गांव जाना पड़ा। वहां उनकी नजर एक ऐसे तालाब पर पड़ी, जिसकी समुचित देखरेख की वजह से उसका पानी आसपास के सभी ग्रामीणों के रोजमर्रा के कामों में बहुत मददगार साबित हो रहा था। मुंडवा के तालाब की स्थिति देखकर उनके मन में यह विचार घर कर गया कि अगर पारंपरिक जलाशयों की गाद निकाली जाए, उनकी मरम्मत की जाए और उन्हें साफ रखा जाए, तो बरसात का कीमती पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में गंभीर पेयजल संकट से आसानी से निपटा जा सकता है।
साहित्यिक पुरस्कारों से मिली धनराशि को तालाबों पर लगाया
इस अनुभव के बाद बजरंग लाल ने अपने कर्तव्य और खाली वक्त को जलस्रोतों के संरक्षण के नाम करने का पक्का इरादा कर लिया। धीरे-धीरे उन्होंने स्थानीय निवासियों को इस मिशन से जोड़ा और जहां भी धन की कमी आई, वहां अपनी जेब से खर्च करने में कोई हिचक नहीं दिखाई। वे एक सक्रिय लेखक और साहित्यकार भी हैं, जिनकी अब तक लगभग 10 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन किताबों के लिए उन्हें जो भी मानदेय और नकद पुरस्कार मिले, उन्होंने उसे अपने निजी उपयोग में लेने के बजाय तालाबों के जीर्णोद्धार में झोंक दिया। स्थानीय ग्रामीणों और समाज के लोगों के आर्थिक सहयोग को जोड़कर उन्होंने दर्जनों ऐतिहासिक और पारंपरिक तालाबों की मरम्मत करवाई।
शेखावाटी और मारवाड़ में 350 जल संरचनाएं और वाटर हार्वेस्टिंग
शेखावाटी और मारवाड़ के शुष्क अंचलों में बजरंग लाल जेठू का यह कार्य 50 से अधिक तालाबों के पुनरुद्धार तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने भूजल स्तर सुधारने के लिए करीब 350 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण करवाया। इसके साथ ही 50 से ज्यादा स्थानों पर आधुनिक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करवाए ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन के भीतर जा सके। उनका मानना है कि जल संरक्षण केवल शासन या प्रशासन का दायित्व नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। समाज में चेतना जगाने के लिए उन्होंने छात्र-छात्राओं के बीच करीब 60 आलेख प्रतियोगिताएं कराईं। लोगों को प्रेरित करने के मकसद से उन्होंने छह लघु फिल्में भी तैयार कीं और उन्हें यूट्यूब पर प्रसारित किया ताकि युवा पीढ़ी इस अभियान से जुड़ सके।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार और राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजे गए
जल संरक्षण में दशकों के निस्वार्थ और जमीनी योगदान के लिए केंद्र सरकार ने उन्हें साल 2025 में ‘राष्ट्रीय जल पुरस्कार’ प्रदान किया। इससे पहले उन्हें राज्य स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार के अलावा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई प्रतिष्ठित मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। सम्मान मिलने के बाद भी उनका यह जमीनी काम थमा नहीं है। बजरंग लाल का कहना है कि जब तक पुराने तालाब सुरक्षित रहेंगे, तभी तक बरसात का पानी बचेगा, और पानी सुरक्षित रहने पर ही भावी पीढ़ियों का कल सुरक्षित हो सकेगा।
























