दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में एक भयानक संकट के बीच अदम्य साहस दिखाते हुए 180 यात्रियों को सकुशल बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर का नाम इस समय वैश्विक स्तर पर गूंज रहा है। विमान के सह-पायलट द्वारा अचानक किए गए जानलेवा हमले के बाद भी लहूलुहान हालत में नियंत्रण साधने और सभी मुसाफिरों की जान सुरक्षित रखने के उनके पराक्रम की प्रशंसा दुनिया के कई प्रमुख नेताओं ने की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जैसे शीर्ष वैश्विक राजनेताओं ने उनकी तत्परता और बहादुरी को खुले दिल से सराहा है। हालांकि, भारत के घरेलू राजनीतिक गलियारों में इस साहसिक घटनाक्रम ने एक नया सियासी टकराव पैदा कर दिया है, जिसकी गूंज आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य तक पहुंचने के संकेत दे रही है।
शीर्ष नेतृत्व के रुख पर उठाए गए तीखे सवाल
इस पूरे मामले में राजनीतिक विवाद तब गहराया जब कांग्रेस पार्टी के सबसे प्रमुख नेताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर सीधे सवाल खड़े किए गए। 4 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के रुख पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि 180 निर्दोष लोगों की जान बचाने वाले एक भारतीय जांबाज के सम्मान में कांग्रेस के गांधी परिवार की तरफ से कोई सीधा वक्तव्य अथवा सोशल मीडिया संदेश सामने क्यों नहीं आया। इस दौरान यह आरोप भी लगाया गया कि कांग्रेस के नेता गाजा, फलस्तीन अथवा बाटला हाउस से जुड़े मामलों पर तो निरंतर मुखर रहते हैं और बयान जारी करते हैं, परंतु जब एक देशवासी अपनी जान की बाजी लगाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाता है, तब उस पर वैसी तत्परता नहीं दिखाई जाती।
राष्ट्रवाद बनाम तुष्टीकरण का छिड़ा मुकाबला
इस पूरे घटनाक्रम को अब राष्ट्रवाद बनाम तुष्टीकरण की व्यापक वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश किया जाने लगा है। सवाल उठाने वाले पक्षों का तर्क है कि एक तरफ वे लोग हैं जो गंभीर जोखिम उठाकर मुल्क का नाम रोशन करते हैं, जबकि दूसरी तरफ कथित वोट बैंक की चिंता के कारण एक बहादुर नागरिक के अभिनंदन में संकोच किया जा रहा है। सुधांशु त्रिवेदी ने इस मुद्दे को विशुद्ध सहानुभूति तक सीमित न रखते हुए इसे चयनात्मक संवेदनशीलता करार दिया। उनका कहना था कि जब अंतरराष्ट्रीय और संवेदनशील मुद्दों पर शीर्ष नेतृत्व तुरंत सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाता है, तो फिर कैप्टन स्मित के पराक्रम पर उसी स्तर की सीधी प्रतिक्रिया क्यों नदारद रही।
कांग्रेस की ओर से सामने आए आधिकारिक बयान
इस राजनीतिक हमले के बीच कांग्रेस खेमे की ओर से स्थिति स्पष्ट करने के प्रयास भी हुए। पार्टी के वरिष्ठ महासचिव जयराम रमेश ने 2 अक्टूबर को ही कैप्टन स्मित मच्छर के शौर्य की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी। जयराम रमेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि स्मित की असाधारण बहादुरी, त्वरित सूझबूझ और विपरीत परिस्थितियों में उठाया गया दृढ़ कदम देश और समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। इस आधिकारिक बयान के आधार पर यह तर्क दिया गया कि पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया न आने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। हालांकि, विरोधी पक्ष का सारा ध्यान इस बात पर केंद्रित बना हुआ है कि यह बयान संगठन के स्तर पर आया, जबकि गांधी परिवार के शीर्ष चेहरे व्यक्तिगत रूप से इस विषय पर सामने नहीं आए। विवाद अब इस बात पर उलझ गया है कि किसने क्या कहा और बयान किस स्तर के नेता की ओर से जारी किया गया।
उत्तर प्रदेश के नेताओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक मायने
विवाद बढ़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश से जुड़े नेताओं की आवाजें भी इस विमर्श में शामिल हो गईं। कांग्रेस सांसद और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने कैप्टन स्मित मच्छर के साहस की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर रूप से जख्मी होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह अपनी और सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की, वह अत्यंत प्रशंसनीय है। इसके साथ ही उन्होंने पायलट के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। हालांकि, इमरान मसूद ने इस बात पर कड़ा एतराज जताया कि हर साहसिक या मानवीय घटना को एक राजनीतिक आयोजन में तब्दील करने का प्रयास किया जाता है। चूंकि इमरान मसूद प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे अहम पद पर हैं, इसलिए उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में पार्टी के आधिकारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
2027 के चुनाव और नैरेटिव वॉर की संभावना
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, और उससे पहले समाजवादी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी के बीच विधान परिषद यानी एमएलसी चुनावों में भी सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि कैप्टन स्मित मच्छर के इस प्रकरण को आने वाले विधानसभा चुनावों में एक औपचारिक या आधिकारिक घोषणापत्र जैसा मुद्दा बनाया जाएगा या नहीं। लेकिन उत्तर प्रदेश का चुनावी इतिहास गवाह रहा है कि यहां की राजनीति में राष्ट्रवाद, आंतरिक व बाह्य सुरक्षा, तुष्टीकरण, आतंकवाद और हिंदुत्व जैसे बड़े नैरेटिव मतदाताओं की लामबंदी में बेहद असरदार भूमिका निभाते रहे हैं।
आने वाले समय में यदि इस मुद्दे को लगातार उठाया जाता है, तो जोर केवल कैप्टन स्मित के पराक्रम पर नहीं होगा, बल्कि कांग्रेस के विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रियाओं में दिखने वाले अंतर को रेखांकित करने पर रहेगा। 2027 का दंगल केवल सीटों के गणित या प्रत्याशियों के चयन तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि यह विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अपनी-अपनी विचारसरणी और नैरेटिव को स्थापित करने की एक बड़ी जंग साबित हो सकता है। जहां एक पक्ष इसे भारतीय जांबाज के शौर्य और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक लाभ के लिए गढ़े जा रहे विवाद से बचाने की कोशिश में जुटा है।



















