राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ एक बेहद दिलचस्प भौगोलिक संरचना भी समेटे हुए है। राज्य के सुदूर पूर्व में स्थित धौलपुर जिला एक ऐसी अनोखी विशेषता रखता है जो इसे समूचे प्रदेश में अलग पहचान दिलाती है। जब भोर का उजाला रेगिस्तानी राज्य की धरती पर उतरता है, तो उसकी सबसे पहली चमक धौलपुर की सीमा में ही दस्तक देती है। इस खास प्राकृतिक घटना की वजह से यह जिला पूरे प्रदेश में कौतूहल और चर्चा का केंद्र बना रहता है।
धौलपुर जिले के राजाखेड़ा उपखंड क्षेत्र में बसा सिलावट गांव वह स्थान है, जहां राज्य में सुबह की पहली किरण पड़ती है। मध्य और पश्चिमी राजस्थान के तमाम जिलों के मुकाबले यहां दिन का उजाला सबसे पहले फैलता है। इसी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण धौलपुर को राजस्थान की सनराइज सिटी भी कहा जाता है। राज्य के नक्शे में रोशनी का प्रवेश द्वार यही इलाका माना जाता है।
अरुणाचल प्रदेश के डोंग गांव जैसी भौगोलिक समानता
अगर पूरे भारत के पैमाने पर देखा जाए, तो देश में सूर्य की पहली किरण अरुणाचल प्रदेश के डोंग गांव पर पड़ती है। पूर्वोत्तर का वह इलाका भारत के सबसे पूर्वी छोर पर होने की वजह से सबसे पहले सवेरे का दीदार करता है। ठीक उसी तर्ज पर राजस्थान के दायरे में धौलपुर की स्थिति बनती है। राज्य की सीमाओं के भीतर धौलपुर ही वह पहला कोना है, जहां सूर्य की किरणें सबसे पहले धरा को छूती हैं।
पृथ्वी का घूर्णन और देशांतर रेखाओं का खेल
भूगोल के विशेषज्ञों और व्याख्याता गौरव पाराशर के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे दो बुनियादी कारण काम करते हैं। इनमें पहला कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर लगातार घूमना है और दूसरा कारण धौलपुर की वह भौगोलिक स्थिति है जो देशांतर रेखाओं के जरिए निर्धारित होती है। पृथ्वी निरंतर पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर घूमती रहती है। इस घूर्णन के दौरान धरती का जो भाग घूमते हुए सूर्य के ठीक सामने आता है, वहां दिन निकल आता है। चूंकि धौलपुर राजस्थान के सबसे पूर्वी छोर पर मौजूद है, इसलिए धरती के घूमने के क्रम में यह क्षेत्र सूर्य के सम्मुख सबसे पहले पहुंचता है।
धौलपुर और जैसलमेर के बीच 35 मिनट का बड़ा फासला
राजस्थान का देशांतरीय फैलाव पूर्व से पश्चिम तक काफी व्यापक है। राज्य का यह विस्तार पश्चिम में जैसलमेर के कटरा गांव से शुरू होकर पूर्व में धौलपुर के सिलाना अथवा सिलावट गांव तक फैला हुआ है। इन दोनों छोरों के बीच की कुल जमीनी दूरी लगभग 869 किलोमीटर बैठती है। देशांतर रेखाओं की गणना के मुताबिक, पृथ्वी को एक डिग्री देशांतर घूमने में 4 मिनट का समय लगता है। इसी देशांतरीय अंतर के चलते धौलपुर में जैसलमेर के मुकाबले लगभग 35 मिनट पहले सुबह हो जाती है। जब तक धरती घूमकर पश्चिमी छोर को सूर्य के सामने लाती है, तब तक बीच के जिलों से गुजरते हुए रोशनी अंत में जैसलमेर तक पहुंचती है।
शाम ढलने पर भी नजर आता है यही प्राकृतिक नियम
सुबह के समय काम करने वाला यही वैज्ञानिक नियम शाम के वक्त भी पूरी तरह लागू होता है। जिस तरह धौलपुर में सूरज सबसे पहले उगता है, ठीक उसी तरह शाम होते ही यहां दिन भी सबसे पहले ढलता है। इसके विपरीत, पश्चिमी राजस्थान के सरहदी जिलों में काफी देर तक उजाला बना रहता है और वहां सूर्यास्त बाद में होता है। पृथ्वी की अपनी धुरी पर चाल और धौलपुर का पूर्वी नक्शा मिलकर इस पूरे इलाके को सूर्योदय और सूर्यास्त का एक अनूठा केंद्र बना देते हैं।
























