राजस्थान के अलवर जिले में उपभोक्ता अधिकारों और ऑटोमोबाइल सेवा से जुड़ा एक बेहद अनूठा वाकया सामने आया है। अपनी नई कार में बार-बार आ रही गंभीर तकनीकी खामियों से त्रस्त एक ग्राहक ने नाराजगी जताने के लिए ऐसा तीखा रास्ता चुना कि कंपनी प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए। हताश कार मालिक ने अपनी गाड़ी के ऊपर बड़े अक्षरों में व्यंग्यात्मक पोस्टर चिपकाया और पूरे परिवार के साथ शोरूम के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। सड़क पर आते-जाते लोगों और स्थानीय नागरिकों के बीच यह अनोखा विरोध प्रदर्शन तेजी से चर्चा का केंद्र बन गया।
प्रशासनिक अधिकारी ने परिजनों के साथ शोरूम पर दिया धरना
यह अप्रत्याशित घटना अलवर शहर के हनुमान चौराहा स्थित टाटा क्लासिक मोटर्स शोरूम के बाहर घटी। रैणी उपखंड कार्यालय में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी पद पर तैनात दीपक शर्मा ने यह कड़ा कदम उठाया। मंगलवार की सुबह करीब 9 बजे दीपक शर्मा अपनी पत्नी और बच्चों को अपनी टाटा टियागो कार में बैठाकर सीधे उक्त शोरूम पहुंचे। उन्होंने अपनी गाड़ी को शोरूम के प्रवेश द्वार के ठीक सामने तिरछा खड़ा कर दिया ताकि आवाजाही पूरी तरह बाधित हो जाए। इसके तुरंत बाद वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ वहीं जमीन पर धरने पर बैठ गए। काम के शुरुआती घंटों में सरकारी बाबू को परिजनों समेत जमीन पर बैठा देख शोरूम कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
कार पर चिपकाया तीखा तंज भरा बैनर
दीपक शर्मा ने अपने विरोध को प्रभावी बनाने के लिए कार के बोनट तथा सामने वाले कांच पर एक बड़ा सा बैनर लगा रखा था। इस बैनर पर लिखी इबारत ने हर राहगीर को ठिठकने पर मजबूर कर दिया। अधिकारी ने बड़े अक्षरों में लिखवाया था कि उन्होंने टाटा क्लासिक मोटर्स अलवर से बारह लाख रुपये देकर यह गधा खरीदा है। बैनर में कटाक्ष करते हुए आगे लिखा गया था कि इस कंपनी की गाड़ी खरीदने से कहीं बेहतर एक गधा पालना है, जो कम से कम वजन उठाने के काम तो आता है। इस तीखे सार्वजनिक व्यंग्य ने कार निर्माता कंपनी की निर्माण गुणवत्ता और बिक्री के बाद दी जाने वाली सर्विस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।
तीन साल पहले खरीदी थी गाड़ी, ढाई साल से झेल रहे थे मानसिक तनाव
मौके पर जमा हुई भीड़ को आपबीती सुनाते हुए दीपक शर्मा ने बताया कि उन्होंने तकरीबन तीन साल पहले इसी शोरूम से बारह लाख रुपये की गाढ़ी कमाई खर्च कर यह टाटा टियागो कार खरीदी थी। उनका सपना था कि परिवार के साथ आरामदायक सफर का आनंद लेंगे, मगर डिलीवरी के कुछ ही महीने बीतने के बाद गाड़ी में गंभीर समस्याएं उभरने लगीं। कभी कार की महंगी बैटरी रास्ते में अचानक पूरी तरह जवाब दे जाती, तो कभी भीषण गर्मी के मौसम में उसका एयर कंडीशनर पूरी तरह काम करना बंद कर देता था। इसके अलावा गाड़ी के अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों और सहायक पुर्जों में भी आए दिन कोई न कोई तकनीकी फॉल्ट आता रहता था।
बार-बार चक्कर काटने पर भी नहीं मिला स्थायी समाधान
दीपक शर्मा का सीधा आरोप था कि उन्होंने विगत ढाई वर्षों के भीतर दर्जनों बार शोरूम के अधिकृत सर्विस सेंटर में लिखित शिकायतें दर्ज करवाईं। जब भी वे गाड़ी सर्विस सेंटर लेकर पहुंचते, तकनीकी कर्मचारी हर बार खराबी पूरी तरह दूर करने का भरोसा देते थे। मगर हर बार रिपेयरिंग के कुछ ही दिन बाद गाड़ी में वही पुरानी दिक्कतें दोबारा पैदा हो जाती थीं। कंपनी का सर्विस नेटवर्क इस तकनीकी खामी का कोई स्थायी समाधान तलाशने में पूरी तरह नाकाम साबित रहा। ढाई साल तक लगातार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने, पैसे खर्च करने और मानसिक प्रताड़ना सहने के बाद उनका सब्र पूरी तरह टूट गया।
जनदबाव के आगे झुका प्रबंधन, दोपहर में लौटाए पूरे बारह लाख रुपये
मंगलवार सुबह नौ बजे से शुरू हुआ यह धरना दोपहर तक लगातार चलता रहा। दीपक शर्मा अपनी इस मांग पर पूरी तरह अड़े रहे कि जब तक डीलरशिप के शीर्ष अधिकारी सामने आकर इन निरंतर खराबियों का ठोस जवाब नहीं देते और उनकी समस्या का तत्काल निपटारा नहीं करते, वे वहां से नहीं हटेंगे। शोरूम के मुख्य दरवाजे पर प्रदर्शन, सड़क पर भारी भीड़ का जमावड़ा और सोशल मीडिया पर ब्रांड की किरकिरी होते देख शोरूम प्रबंधन भारी दबाव में आ गया। दोपहर करीब डेढ़ बजे कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने दीपक शर्मा को बातचीत की मेज पर बुलाया। विस्तृत चर्चा के बाद प्रबंधन ने अपनी नाकामी स्वीकार करते हुए अभूतपूर्व फैसला लिया। डीलरशिप ने उस विवादित कार को तुरंत वापस ले लिया और दीपक शर्मा को उनकी पूरी बारह लाख रुपये की धनराशि उसी समय लौटा दी। अपने पूरे पैसे वापस मिलने के बाद अधिकारी ने संतोष जताया और परिवार समेत अपना धरना समाप्त कर दिया।



















