राजस्थान में उदयपुर जिले के भींडर क्षेत्र स्थित एक सरकारी विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया जब कक्षा की छत का प्लास्टर भरभराकर नीचे आ गिरा। यह दुखद घटना वाणियातलाई ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले नारदा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को घटित हुई। रोजमर्रा की तरह कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहे नन्हे विद्यार्थियों पर अचानक भारी मलबा गिर पड़ा। मलबे की चपेट में आने से तीन बच्चे लहूलुहान हो गए और उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। हादसे की जोरदार आवाज सुनते ही पूरे स्कूल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
लहूलुहान हालत में खुद पैदल चलकर घर पहुंचे घायल बच्चे
इस हादसे में कक्षा में मौजूद सात वर्षीय काजल, सात वर्षीय कृष्णा और आठ वर्षीय ललित गंभीर रूप से चोटिल हो गए। घटना के समय प्रशासनिक और शैक्षणिक लापरवाही का सबसे बुरा रूप देखने को मिला, क्योंकि उस वक्त कमरे में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था। सिर से लगातार खून बहने और गंभीर दर्द के बावजूद किसी ने बच्चों की सुध नहीं ली। मजबूरी में ये तीनों घायल मासूम बच्चे स्कूल से खुद पैदल चलकर अपने घर पहुंचे।
जब परिजनों ने अपने जिगर के टुकड़ों को खून से सने कपड़ों में बदहवास हालत में देखा, तो उनके होश उड़ गए। परिजनों ने बिना कोई समय गंवाए फौरन बच्चों को भींडर स्थित जिला चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकों ने तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू कर उनके सिर के घावों की मरहम-पट्टी की।
कक्षा के भीतर टूटा फर्नीचर और बाहर निकले जंग लगे सरिये
छत से गिरा मलबा इतना भारी था कि उसने कक्षा में रखे मजबूत सामान को भी तबाह कर दिया। प्लास्टर का बड़ा हिस्सा सीधे अध्यापक की टेबल और कुर्सी पर गिरा, जिससे वे पूरी तरह टूटकर चकनाचूर हो गए। पुरानी और खस्ताहाल हो चुकी छत की हालत इतनी बदतर है कि प्लास्टर उखड़ने के बाद छत के भीतर मौजूद लोहे के जंग लगे सरिये साफ नजर आने लगे हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार इस विद्यालय में कुल 37 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है। बच्चों को पढ़ाने के लिए एक नियमित शिक्षक और एक संविदा शिक्षक की तैनाती की गई है। इस गंभीर घटना की सूचना मिलने के बाद जब अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया, तो वहां एक शिक्षक अनुपस्थित पाया गया।
मरम्मत के नाम पर केवल रंग-रोगन करने का आरोप
हादसे की खबर फैलते ही विद्यालय परिसर में स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का भारी जमावड़ा लग गया। लोगों में शिक्षा विभाग के प्रति गहरा रोष दिखाई दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2020 में छत पर प्लास्टर का काम करवाया गया था। उनका आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों ने भवन की बुनियादी मजबूती को सुधारने के बजाय केवल ऊपर से रंग-रोगन और पुताई करवाकर औपचारिकता पूरी कर ली थी।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस स्कूल भवन की जीर्ण-शीर्ण हालत को लेकर पूर्व में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक चेतावनियां दी गई थीं, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। यदि उस वक्त पूरी छत गिर जाती तो नुकसान कहीं अधिक भयावह हो सकता था।
प्रशासन ने जर्जर भवन कराया बंद, नए स्थान की तलाश जारी
घटना की भयावहता सामने आने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। बच्चों की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए अधिकारियों ने तुरंत प्रभाव से इस जर्जर स्कूल भवन को बंद करने के निर्देश जारी कर दिए। विद्यालय बंद होने के बाद अब प्रशासन विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए गांव में किसी सुरक्षित वैकल्पिक स्थान की तलाश कर रहा है ताकि कक्षाएं दोबारा शुरू कराई जा सकें।



















