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दीपावली पर नैनीताल के बाजारों में उकेरी गई ऐपण कला, मोमबत्तियों में दिखा पहाड़ी संस्कृति का रंगउत्तराखंड
3 नव॰ 2026, 12:32 pm (4 मिनट पहले)· 0

दीपावली पर नैनीताल के बाजारों में उकेरी गई ऐपण कला, मोमबत्तियों में दिखा पहाड़ी संस्कृति का रंग

दीपावली की सजावट और तोहफों के लिए नैनीताल के बाजारों में कुमाऊं की पारंपरिक ऐपण कला तथा मिठाई के स्वरूप वाली डिजाइनर मोमबत्तियों की विस्तृत शृंखला पेश की गई है।

त्योहारी सीजन शुरू होते ही हिल स्टेशन नैनीताल के व्यावसायिक क्षेत्रों में ग्राहकों का तांता लगने लगा है। इस बार दीपावली पर अपने परिचितों को उपहार देने और आवास परिसर को रोशन करने के इच्छुक खरीदारों के लिए स्थानीय दुकानों में शिल्प कौशल से भरपूर मोमबत्तियां प्रस्तुत की गई हैं। इन सजावटी उत्पादों की बनावट में इतना बारीक काम किया गया है कि प्रथम दृष्टि में इन्हें मोम की वस्तु मानना कठिन प्रतीत होता है।

कुमाऊंनी लोककला का मोमबत्तियों पर सजीव अंकन

सरोवर नगरी की दुकानों में इस समय उत्तराखंड की ऐतिहासिक लोककला ऐपण पर आधारित मोमबत्तियों को केंद्र में रखा गया है। पहाड़ी अंचल में मांगलिक उत्सवों, पर्वों तथा घरेलू पूजा अनुष्ठानों के समय गृह प्रवेश द्वार, मुख्य देहरी और पूजा कक्ष के फर्श पर ऐपण उकेरने की प्राचीन परंपरा रही है। कारीगरों ने इसी पारंपरिक धरोहर को वैक्स शिल्प पर उतारते हुए मोमबत्तियों की बाहरी सतह पर रेखांकित किया है। ये कलात्मक मोमबत्तियां केवल प्रकाश का साधन न रहकर क्षेत्रीय विरासत को प्रसारित करने का भी जरिया बन रही हैं।

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मिठाइयों और देवी-देवताओं के प्रारूप में ढाली गईं आकृतियां

बुधलाकोटी कैंडल्स के संचालक राजीव बुधलाकोटी ने जानकारी दी कि दीपोत्सव के मद्देनजर खास तौर पर लड्डू और मोदक के ढांचों में मोमबत्तियां बनाई गई हैं। इन कृतियों का रंग-रूप हूबहू पारंपरिक मिठाइयों से मेल खाता है। इसके अतिरिक्त दुर्गा माता, भगवान बुद्ध के शीश और विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूपों में भी मोमबत्तियों की खेप तैयार की गई है। इन प्रतिमा-रूपी मोमबत्तियों का बाहरी लेप धातु की चमक लिए हुए है, जिससे वे तांबे की मूर्तियों जैसी आभा प्रकट करती हैं।

जेल वैक्स, बीयर मग और सुगंधित जलती बत्तियां

पारंपरिक सांचों से परे आधुनिक युवा वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए जेल वैक्स से तैयार की गई विशिष्ट मोमबत्तियां भी प्रदर्शित की गई हैं। पारदर्शी कांच के मग में बीयर के झाग और रंग जैसी दिखने वाली कैंडल्स आगंतुकों के बीच विशेष कौतूहल पैदा कर रही हैं। इसके अलावा विभिन्न फलों के आकार, प्राकृतिक सुगंधों से युक्त मोमबत्तियां और पानी की सतह पर तैरने वाली फ्लोटिंग कैंडल्स भी अलमारियों की शोभा बढ़ा रही हैं।

लागत का ढांचा और ग्राहकों के लिए दरें

कारीगरी और आकार के आधार पर इन सजावटी सामग्रियों के दाम तय किए गए हैं। राजीव बुधलाकोटी ने बताया कि मोदक एवं लड्डू के आकार वाली मोमबत्तियों का प्रारंभिक मूल्य 100 रुपये रखा गया है। वहीं देवी-देवताओं के विग्रहों के रूप में गढ़ी गई प्रतिमा मोमबत्तियां 250 रुपये से मिलना शुरू होती हैं। ग्राहक अपने बजट और उपयोगिता के अनुरूप इनका चुनाव कर सकते हैं।

पर्यटन के बदलते रुख से स्थानीय व्यापार पर प्रभाव

नैनीताल में बीते कई दशकों से मोमबत्ती निर्माण का घरेलू उद्योग अपनी साख बनाए हुए है। पहले सादे मोम के बेलनाकार स्वरूप ही बनते थे, जिन्हें कालांतर में नवोन्मेषी शिल्पकला से बदल दिया गया। हालांकि राजीव बुधलाकोटी के अनुसार हाल के दौर में कैंडल कारोबार में पूर्व की तुलना में मंदी देखी गई है। पूर्व के वर्षों में महाराष्ट्र, गुजरात तथा पश्चिम बंगाल से भारी संख्या में आने वाले सैलानी इन कलाकृतियों को स्मृति चिन्ह के तौर पर खरीद कर ले जाते थे। अब सैलानियों का रुझान मुनस्यारी और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की घाटियों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। वर्तमान समय में नैनीताल पहुंचने वाले पर्यटकों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यात्री शामिल हैं।

सवाल-जवाब

नैनीताल में इस बार दीपावली पर कौन सी खास मोमबत्तियां मिल रही हैं?
बाजारों में पारंपरिक ऐपण कला से सजी मोमबत्तियों के अलावा लड्डू, मोदक, बीयर मग, फल और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं वाली मोमबत्तियां मिल रही हैं।
लड्डू और मोदक के आकार वाली कैंडल्स की शुरुआती कीमत क्या है?
लड्डू और मोदक के आकार में तैयार की गई मोमबत्तियों की शुरुआती कीमत 100 रुपये तय की गई है।
देवी-देवताओं की आकृतियों वाली कैंडल्स किस दर पर उपलब्ध हैं?
दुर्गा माता और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा रूपी मोमबत्तियां 250 रुपये की शुरुआती कीमत पर मिल रही हैं।
ऐपण कला क्या है और इसे मोमबत्तियों पर क्यों उकेरा गया है?
ऐपण उत्तराखंड की लोककला है जिसे शुभ अवसरों पर देहरी और पूजा स्थलों पर बनाया जाता है; इसे संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कैंडल्स पर उकेरा गया है।
नैनीताल के कैंडल व्यापार में क्या बदलाव देखने को मिल रहा है?
कारोबारियों के अनुसार महाराष्ट्र और गुजरात के पर्यटकों की कमी तथा मुनस्यारी व हिमाचल की ओर रुख के कारण व्यापार पहले से घटा है।
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