त्योहारी सीजन शुरू होते ही हिल स्टेशन नैनीताल के व्यावसायिक क्षेत्रों में ग्राहकों का तांता लगने लगा है। इस बार दीपावली पर अपने परिचितों को उपहार देने और आवास परिसर को रोशन करने के इच्छुक खरीदारों के लिए स्थानीय दुकानों में शिल्प कौशल से भरपूर मोमबत्तियां प्रस्तुत की गई हैं। इन सजावटी उत्पादों की बनावट में इतना बारीक काम किया गया है कि प्रथम दृष्टि में इन्हें मोम की वस्तु मानना कठिन प्रतीत होता है।
कुमाऊंनी लोककला का मोमबत्तियों पर सजीव अंकन
सरोवर नगरी की दुकानों में इस समय उत्तराखंड की ऐतिहासिक लोककला ऐपण पर आधारित मोमबत्तियों को केंद्र में रखा गया है। पहाड़ी अंचल में मांगलिक उत्सवों, पर्वों तथा घरेलू पूजा अनुष्ठानों के समय गृह प्रवेश द्वार, मुख्य देहरी और पूजा कक्ष के फर्श पर ऐपण उकेरने की प्राचीन परंपरा रही है। कारीगरों ने इसी पारंपरिक धरोहर को वैक्स शिल्प पर उतारते हुए मोमबत्तियों की बाहरी सतह पर रेखांकित किया है। ये कलात्मक मोमबत्तियां केवल प्रकाश का साधन न रहकर क्षेत्रीय विरासत को प्रसारित करने का भी जरिया बन रही हैं।
मिठाइयों और देवी-देवताओं के प्रारूप में ढाली गईं आकृतियां
बुधलाकोटी कैंडल्स के संचालक राजीव बुधलाकोटी ने जानकारी दी कि दीपोत्सव के मद्देनजर खास तौर पर लड्डू और मोदक के ढांचों में मोमबत्तियां बनाई गई हैं। इन कृतियों का रंग-रूप हूबहू पारंपरिक मिठाइयों से मेल खाता है। इसके अतिरिक्त दुर्गा माता, भगवान बुद्ध के शीश और विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूपों में भी मोमबत्तियों की खेप तैयार की गई है। इन प्रतिमा-रूपी मोमबत्तियों का बाहरी लेप धातु की चमक लिए हुए है, जिससे वे तांबे की मूर्तियों जैसी आभा प्रकट करती हैं।
जेल वैक्स, बीयर मग और सुगंधित जलती बत्तियां
पारंपरिक सांचों से परे आधुनिक युवा वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए जेल वैक्स से तैयार की गई विशिष्ट मोमबत्तियां भी प्रदर्शित की गई हैं। पारदर्शी कांच के मग में बीयर के झाग और रंग जैसी दिखने वाली कैंडल्स आगंतुकों के बीच विशेष कौतूहल पैदा कर रही हैं। इसके अलावा विभिन्न फलों के आकार, प्राकृतिक सुगंधों से युक्त मोमबत्तियां और पानी की सतह पर तैरने वाली फ्लोटिंग कैंडल्स भी अलमारियों की शोभा बढ़ा रही हैं।
लागत का ढांचा और ग्राहकों के लिए दरें
कारीगरी और आकार के आधार पर इन सजावटी सामग्रियों के दाम तय किए गए हैं। राजीव बुधलाकोटी ने बताया कि मोदक एवं लड्डू के आकार वाली मोमबत्तियों का प्रारंभिक मूल्य 100 रुपये रखा गया है। वहीं देवी-देवताओं के विग्रहों के रूप में गढ़ी गई प्रतिमा मोमबत्तियां 250 रुपये से मिलना शुरू होती हैं। ग्राहक अपने बजट और उपयोगिता के अनुरूप इनका चुनाव कर सकते हैं।
पर्यटन के बदलते रुख से स्थानीय व्यापार पर प्रभाव
नैनीताल में बीते कई दशकों से मोमबत्ती निर्माण का घरेलू उद्योग अपनी साख बनाए हुए है। पहले सादे मोम के बेलनाकार स्वरूप ही बनते थे, जिन्हें कालांतर में नवोन्मेषी शिल्पकला से बदल दिया गया। हालांकि राजीव बुधलाकोटी के अनुसार हाल के दौर में कैंडल कारोबार में पूर्व की तुलना में मंदी देखी गई है। पूर्व के वर्षों में महाराष्ट्र, गुजरात तथा पश्चिम बंगाल से भारी संख्या में आने वाले सैलानी इन कलाकृतियों को स्मृति चिन्ह के तौर पर खरीद कर ले जाते थे। अब सैलानियों का रुझान मुनस्यारी और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की घाटियों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। वर्तमान समय में नैनीताल पहुंचने वाले पर्यटकों में मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के यात्री शामिल हैं।



















