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गलता तीर्थ का 2 करोड़ से होगा कायाकल्प, बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों और हेरिटेज पार्कों से निखरेगा स्वरूपराजस्थान
4 अक्तू॰ 2026, 2:26 pm (23 मिनट पहले)· 0

गलता तीर्थ का 2 करोड़ से होगा कायाकल्प, बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों और हेरिटेज पार्कों से निखरेगा स्वरूप

जयपुर विकास प्राधिकरण अगले 6 से 8 महीनों में गलता तीर्थ का जीर्णोद्धार करेगा, जिसमें फाउंटेन पार्क, बंसी पहाड़पुर का पिंक सैंड स्टोन और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार शामिल है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित ऐतिहासिक गलता तीर्थ को नए सिरे से संवारने की व्यापक योजना तैयार की गई है। उत्तर भारत में श्री वैष्णव रामानुज संप्रदाय की प्रधानपीठ के रूप में विख्यात इस पावन स्थल के समग्र विकास और जीर्णोद्धार पर जयपुर विकास प्राधिकरण लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। इस पूरी विकास परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर के प्राचीन ऐतिहासिक वैभव को अक्षुण्ण रखते हुए यहां आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करना है। विकास कार्यों की समयसीमा अगले 6 से 8 महीने तय की गई है, जिसके दौरान मंदिर को पारंपरिक जयपुर हेरिटेज शैली में तराशा जाएगा।

पारंपरिक जयपुर शैली में होगा नक्काशी और संरक्षण का काम

गलता तीर्थ के मूल ऐतिहासिक ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए निर्माण में पारंपरिक जयपुर वास्तुकला तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। मंदिर परिसर में गोला, गरदाना, कंगूरा और बारीकी से सजावटी लाइनिंग का काम कराया जाएगा। दीवारों की मजबूती और उनके ऐतिहासिक आकर्षण को लौटाने के लिए रफ कास्ट प्लास्टर के साथ पारंपरिक पीले और गुलाबी रंग का एक्सटीरियर पेंट तथा डिस्टेंपर लगाया जाएगा। इसके अलावा गलता तीर्थ आने वाले श्रद्धालुओं के विश्राम और आनंद के लिए विशेष लैंडस्केपिंग पार्क और आकर्षक फाउंटेन पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां व्यवस्थित हॉर्टिकल्चर और हरियाली से पूरे वातावरण को सुरम्य बनाया जाएगा।

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बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थर और कडप्पा स्टोन से सजेगा फर्श

मंदिर की भव्यता में इजाफा करने के लिए बंसी पहाड़पुर के खास 30-35 एमएम मोटाई वाले पिंक सैंड स्टोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। रास्तों, खुले आंगनों और परिसर के रास्तों पर आकर्षक पैटर्न डिजाइन में ब्लैक कडप्पा कोबल स्टोन की मजबूत फ्लोरिंग बिछाई जाएगी। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सीढ़ियों व अलग-अलग हिस्सों के फर्श पर कोटा स्टोन लगाया जाएगा। वहीं दीवारों और प्रसाधन क्षेत्रों में मार्बल और ग्रेनाइट शेड वाली प्रीमियम टाइल्स लगाई जाएंगी। भक्तों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे परिसर में एंगल आयरन पोस्ट के साथ मजबूत चेन लिंक फेंसिंग भी स्थापित की जाएगी।

बुनियादी ढांचे की मजबूती, नई पाइपलाइन और दिशा सूचक बोर्ड

जीर्णोद्धार कार्य के तहत गलता मंदिर परिसर में मौजूद सभी छोटे-बड़े मंदिरों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त किया जाएगा। इसमें मंदिरों की नींव को मजबूती देना, दीवारों की आवश्यक मरम्मत और एक सुव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम तैयार करना शामिल है। छतों को बारिश और सीलन से सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक वाटरप्रूफिंग के साथ कॉरुगेटेड जीएस शीट रूफिंग की जाएगी। श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए नए टॉयलेट ब्लॉक का निर्माण होगा, जिसे पीवीसी पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही परिसर के रास्तों पर यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए आईआरसी मानकों के अनुरूप रेट्रो-रिफ्लेक्टिव दिशा सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि रात के समय भी रास्ता खोजने में कोई परेशानी न हो। बैठने के लिए छायादार और आकर्षक पौधों से सजे भव्य ग्रीन लॉन तैयार किए जाएंगे।

15 से अधिक मंदिरों का समूह और गो मुख कुंड का धार्मिक महत्व

गलता तीर्थ जयपुर के अन्य धार्मिक स्थलों की तुलना में बेहद अनूठा और विशिष्ट है। यहां एक ही विशाल परिसर में 15 से अधिक मंदिर स्थापित हैं। यह स्थल हिंदू देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं और विवाह प्रसंगों पर आधारित अपने दुर्लभ भित्तिचित्रों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। मंदिर परिसर का सबसे प्रमुख आकर्षण पहाड़ियों के बीच से निकलने वाला प्राकृतिक जल स्रोत और विशाल गो मुख कुंड है। इस प्राचीन कुंड में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। विशेषकर कार्तिक मास, मकर संक्रांति, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण जैसे पावन अवसरों पर यहां डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।

राजस्थान का मंकी टेंपल और वन्यजीवों का विशेष आकर्षण

गलता तीर्थ को दुनिया भर में राजस्थान के 'मंकी टेंपल' के नाम से भी प्रसिद्धि हासिल है। इस पहाड़ी परिसर में विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों और हजारों की संख्या में बंदर स्वच्छंद रूप से निवास करते हैं। हाल ही में इस स्थल को मंकी टेंपल के रूप में पहचान देते हुए बंदरों के संरक्षण और देखभाल के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया था। यहां के बंदर पर्यटकों के साथ अपने बेहद सहज और सादगीपूर्ण व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। बंदरों के इसी अनूठे व्यवहार और जीवनशैली पर नेशनल ज्योग्राफिक चैनल ने एक पूरी डॉक्यूमेंट्री सीरीज तैयार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित की थी। विकास कार्यों से इस ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और भी मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

गलता तीर्थ के जीर्णोद्धार पर कुल कितना खर्च किया जाएगा?
जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा गलता तीर्थ के विकास और कायाकल्प पर लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस विकास परियोजना को पूरा होने में कितना समय लगेगा?
इस पूरे प्रोजेक्ट को अगले 6 से 8 महीनों की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंदिर परिसर के निर्माण में कौन से खास पत्थरों का उपयोग होगा?
परिसर में बंसी पहाड़पुर का 30-35 एमएम मोटाई वाला पिंक सैंड स्टोन, ब्लैक कडप्पा कोबल स्टोन और कोटा स्टोन लगाया जाएगा।
गलता तीर्थ को मंकी टेंपल क्यों कहा जाता है?
यहां विभिन्न प्रजातियों के हजारों बंदर रहते हैं जो पर्यटकों से सहज व्यवहार करते हैं, जिस पर नेशनल ज्योग्राफिक चैनल ने एक पूरी सीरीज भी प्रसारित की थी।
गो मुख कुंड का क्या धार्मिक महत्व है?
पहाड़ियों से निकलने वाले इस पावन जल कुंड में कार्तिक मास, मकर संक्रांति, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण पर पवित्र स्नान का विशेष महत्व है।
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