गंभीर बीमारी से जूझने वाले मरीजों के लिए शारीरिक उपचार के साथ-साथ मानसिक संबल भी बेहद जरूरी होता है। कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी के असर से मरीजों के सिर के बाल पूरी तरह झड़ जाते हैं, जिससे खासकर महिलाओं को गहरे भावनात्मक तनाव और आत्मसम्मान में कमी का सामना करना पड़ता है। राजस्थान के भीलवाड़ा की निवासी मंजू धाबाई ने इस मूक पीड़ा को करीब से महसूस किया और इन पीड़ित महिलाओं का खोया हुआ भरोसा लौटाने के उद्देश्य से एक सराहनीय कदम उठाया। उन्होंने पिछले दो साल से अपने बाल नहीं कटवाए थे, जिनकी कुल लंबाई बढ़कर लगभग 50 इंच तक पहुंच गई थी। अब उन्होंने अपने इन लंबे और घने बालों में से 30 इंच हिस्सा कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए विग तैयार करने हेतु दान कर दिया है।
दो साल पहले लिया था बाल बढ़ाने का दृढ़ संकल्प
मंजू धाबाई के अनुसार लगभग दो वर्ष पहले उनका सामना ऐसी कैंसर पीड़ित महिलाओं से हुआ था, जो इलाज के दौरान अपने बाल खो चुकी थीं। उन महिलाओं के चेहरों पर पसरी मायूसी और मानसिक पीड़ा ने उनके दिल को गहराई से झकझोर दिया। उसी क्षण उन्होंने मन बना लिया कि वह इन महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान लौटाने के लिए कुछ ठोस प्रयास करेंगी। इसके बाद उन्होंने अपने बालों को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने का फैसला किया। अगले दो सालों तक उन्होंने कैंची को अपने बालों के पास भी नहीं फटकने दिया। उनका एकमात्र उद्देश्य यही था कि जब बाल पर्याप्त लंबे हो जाएं, तो उन्हें दान कर दिया जाए ताकि जरूरतमंद महिलाओं के लिए प्राकृतिक विग तैयार की जा सके और वे समाज में दोबारा पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़ी हो सकें।
दान किए गए बालों से तैयार होंगी दो उच्च गुणवत्ता वाली विग
विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, मंजू द्वारा दान किए गए 30 इंच लंबे बालों से उच्च गुणवत्ता की लगभग दो विग आसानी से बनाई जा सकती हैं। आम तौर पर बाजार में प्राकृतिक बालों से बनने वाली अच्छी विग काफी महंगी होती हैं। ऐसे में दान किए गए असली बाल सीधे उन मरीजों तक पहुंचते हैं, जो आर्थिक तंगी के कारण इन्हें खरीद पाने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं।
हेयर स्टाइलिस्ट राजेश सेन की प्रेरणा और मुहिम
मंजू धाबाई के इस परोपकारी संकल्प को पूरा करने में भीलवाड़ा के जाने-माने हेयर और मेकअप आर्टिस्ट राजेश सेन ने अहम भूमिका निभाई है। राजेश सेन लंबे समय से समाज के लोगों, विशेषकर महिलाओं को कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए हेयर डोनेशन से जोड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस नेक कार्य को अपने जीवन का एक बड़ा लक्ष्य बना रखा है। अपनी इस सामाजिक पहल के जरिए वह अब तक 100 से अधिक महिलाओं के बाल कैंसर पीड़ितों के उपयोग हेतु दान करवा चुके हैं। राजेश सेन ने बताया कि जब मंजू उनके पास पहुंचीं, तो उनके 50 इंच लंबे बाल देखकर वह भी चकित रह गए। उन्होंने मंजू के इस विचार की सराहना की और उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रेरित किया, जिसके बाद उनके 30 इंच बाल विग निर्माण के लिए सुरक्षित किए गए।
महंगे विग के दौर में आर्थिक और मानसिक सहारा
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का चिकित्सकीय इलाज पहले ही अत्यधिक लंबा और बेहद खर्चीला होता है। इसके चलते अधिकांश परिवारों का बजट पहले से ही चरमरा जाता है। इलाज के दौरान कीमोथेरेपी की भारी दवाओं के प्रभाव से जब बाल गिरते हैं, तो महिलाओं पर इसका बहुत गहरा मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है। बाजार में प्राकृतिक दिखने वाले एक अच्छे विग की कीमत करीब 30 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। किसी भी सामान्य आय वर्ग वाले परिवार के लिए इलाज के भारी खर्च के बीच 30 हजार रुपये अतिरिक्त जुटाकर विग खरीदना संभव नहीं होता। ऐसे में बिना किसी स्वार्थ के बालों का दान करना जरूरतमंद महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा सहारा बन जाता है। भीलवाड़ा शहर से शुरू हुआ यह संवेदनशील प्रयास समाज में नई प्रेरणा जगा रहा है और पीड़ित महिलाओं के सम्मान को पुनर्स्थापित कर रहा है।




















