राजस्थान के अलवर जिले में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती और वरिष्ठ मतदाताओं के प्रति सम्मान की एक बेहद प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है. मालाखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जमालपुर गांव में सौ वर्ष से अधिक आयु की मतदाता शरबती देवी को सम्मानित करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधि सीधे उनके आवास पर पहुंचे. इस मौके पर बुजुर्ग महिला के आंगन में उनके परिजनों की चार पीढ़ियां एक साथ एकत्रित थीं, जिसने इस प्रशासनिक पहल को एक भावनात्मक पारिवारिक उत्सव में बदल दिया.
वृद्ध जन दिवस पर शतायु मतदाताओं के लिए विशेष पहल
वृद्ध जन दिवस के उपलक्ष्य में राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत प्रशासन ने उन मतदाताओं को चिन्हित किया है, जिन्होंने अपनी उम्र के सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस अभियान की मुख्य मंशा ऐसे वरिष्ठ नागरिकों तक स्वयं पहुंचकर उनकी दीर्घकालिक लोकतांत्रिक सहभागिता के प्रति आभार व्यक्त करना है. इसी क्रम में जमालपुर की बीएलओ सुनीता मीणा ने शरबती देवी के घर दस्तक दी. उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से शतायु महिला को औपचारिक प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया.
एक ही छत के नीचे चार पीढ़ियों का अनूठा संगम
सम्मान समारोह के दौरान शरबती देवी के परिवार की एकजुटता और स्नेह का माहौल देखने लायक था. आधुनिक दौर में जहां संयुक्त परिवारों की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है, वहीं शरबती देवी के आवास पर चार पीढ़ियां एक साथ खड़ी नजर आईं. इस खास घड़ी में शरबती देवी के साथ उनके पुत्र, पुत्रवधू और पड़पोती मौजूद रहे. परिवार के सदस्यों ने इस पल को अपनी कुल परंपरा के लिए गौरवशाली बताते हुए कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर बुजुर्ग मातृशक्ति का यह सम्मान पूरे परिवार के लिए एक अविस्मरणीय उपलब्धि है.
जमालपुर में दो बुजुर्ग महिलाओं ने पूरी की उम्र की सेंचुरी
प्रशासनिक अधिकारियों और बीएलओ सुनीता मीणा के अनुसार, लोकतंत्र में निरंतर मतदान के जरिए व्यवस्था को मजबूत करने वाले ऐसे नागरिकों का योगदान अमूल्य है. आयोग का मानना है कि बुजुर्ग मतदाताओं को घर पर जाकर सम्मानित करने से न केवल उन्हें अपने योगदान का महत्व महसूस होता है, बल्कि नई पीढ़ी को भी मताधिकार के प्रति प्रेरणा मिलती है. जमालपुर क्षेत्र में सौ वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग में दो मतदाता दर्ज हैं, जिनमें शरबती देवी के साथ-साथ जमुना देवी का नाम भी शामिल है. आयोग की ओर से इन दोनों ही शतायु मतदाताओं के घर पहुंचकर सम्मान प्रदान करने की प्रक्रिया तय की गई है.
प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह से लोकतंत्र की लंबी भागीदारी को नमन
शतायु महिला को मिला यह सम्मान केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा. जब आयोग की टीम प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह सौंप रही थी, तब परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े होकर लोकतंत्र के प्रति अपने बुजुर्ग की निष्ठा के साक्षी बने. सौ वर्ष की उम्र पार करना अपने आप में एक बड़ा पड़ाव है और इस पूरी अवधि में मतदाता के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहना लोकतांत्रिक परंपराओं की सच्ची मिसाल पेश करता है. शरबती देवी के घर का यह आयोजन परिवार के अटूट साथ और नागरिक कर्तव्य दोनों का सुंदर प्रतीक बन गया.




















