राजस्थान के हिण्डौन इलाके से रोजी-रोटी कमाने संयुक्त अरब अमीरात गए दो कामगार गंभीर संकट में घिर गए हैं। बेहतर पगार, नियमित ओवरटाइम और सुरक्षित माहौल के वादे पर भरोसा करके खाड़ी देश पहुंचे इन मजदूरों को वहां पहुंचकर हकीकत बिल्कुल उलट मिली। तय समझौते के अनुसार कमाई न होने और काम के हालात बेहद कठिन होने के कारण अब दोनों ने अपनी पीड़ा साझा की है। सोशल मीडिया मंचों पर वीडियो साझा करते हुए दोनों युवकों ने भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन से उन्हें सुरक्षित वतन वापस बुलाने की गुहार लगाई है, जबकि उनके गांव में रह रहे परिजन अनहोनी की आशंका से गहरे तनाव में हैं।
सपनों के सौदे से दुबई के निर्माण स्थल तक का सफर
इस पूरे मामले में शिकार बने मजदूरों की पहचान कोटरा ढहर निवासी महेंद्र जाटव और संतोष नगर निवासी बब्लेश जाटव के रूप में सामने आई है। रोजगार की तलाश में बब्लेश 14 जुलाई 2026 को रवाना हुआ था, जबकि महेंद्र 23 जुलाई 2026 को यूएई पहुंचा। दोनों को खाड़ी देश भेजने की व्यवस्था वजीरपुर क्षेत्र के पावटा गांव के निवासी एजेंट प्रेम सिंह ने की थी। विदेश जाने के लिए बब्लेश ने एजेंट को 56,500 रुपए की रकम सौंपी थी। एजेंट ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वहां उन्हें हर महीने 1,595 दिरहम का बुनियादी वेतन मिलेगा और ओवरटाइम के जरिए उनकी कुल आमदनी 42 से 50 हजार रुपए प्रति माह तक पहुंच जाएगी। इस संबंध में बाकायदा एक लिखित अनुबंध भी तैयार कराया गया था।
वादे से आधी मजदूरी मिलने पर छोड़ना पड़ा काम
दुबई की धरती पर कदम रखने के बाद दोनों युवकों को सोनपुर इलाके में निर्माण कार्य से जुड़ी मजदूरी में झोंक दिया गया। काम शुरू करते ही बब्लेश को अहसास हुआ कि जो वादे भारत में किए गए थे, वे पूरी तरह छलावा थे। वहां उन्हें महज 20 से 25 हजार रुपए के बराबर राशि ही हाथ में दी जा रही थी, जो एजेंट द्वारा किए गए वादों से आधी से भी कम थी। अत्यंत कम पारिश्रमिक और प्रतिकूल कार्य परिस्थितियों से तंग आकर बब्लेश ने निर्माण स्थल पर काम करना बंद कर दिया और वह जल्द से जल्द स्वदेश लौटना चाहता है।
बीमारी और वापसी के नाम पर एक लाख रुपए की अतिरिक्त ठगी
दूसरी ओर महेंद्र जाटव की परेशानी और भी विकट है। उसने इंटरनेट पर वीडियो संदेश प्रसारित कर बताया कि वह इस समय अस्वस्थ चल रहा है और परदेस में इलाज व देखभाल के बिना कठिन दौर से गुजर रहा है। अपनी बिगड़ती हालत को देखते हुए उसने घर लौटने की गुहार लगाई थी। भारत वापस लाने की व्यवस्था करने के एवज में एजेंट प्रेम सिंह ने उससे एक लाख रुपए अतिरिक्त ऐंठ लिए। एजेंट ने भरोसा दिया था कि 10 से 15 दिन के भीतर उसे टिकट दिलाकर भारत पहुंचा दिया जाएगा। इसके बावजूद समय बीत जाने पर एजेंट ने उसका फोन उठाना पूरी तरह बंद कर दिया।
एजेंट और कंपनी ने तोड़ा संपर्क, परिजनों में गहराया रोष
मजदूरों का आरोप है कि दुबई की जिस कंपनी में उन्हें तैनात किया गया था, उसके स्थानीय प्रतिनिधियों और भारत स्थित एजेंट दोनों ने ही अब उनसे किनारा कर लिया है। फोन कॉल का जवाब न मिलने से दोनों कामगार वहां बेसहारा महसूस कर रहे हैं। इधर राजस्थान में उनके परिवारों की आर्थिक कमर पहले ही टूट चुकी है। विदेश भेजने के लिए कर्ज लेकर बड़ी रकम चुकाने वाले परिजनों के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। परिवारों ने पुलिस-प्रशासन से मांग की है कि धोखेबाज एजेंट के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और दुबई में लाचार पड़े दोनों श्रमिकों को तत्काल भारत वापस लाया जाए।



















