राजस्थान के धौलपुर जिले में वार्ड नंबर 9 स्थित पंचवटी कॉलोनी के निवासी भारी जलभराव और जर्जर सीवर व्यवस्था के कारण गंभीर नागरिक संकट से जूझ रहे हैं। बीते 15 दिनों से जलभराव इतना विकराल हो चुका है कि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है और मासूम घर में कैद होने को मजबूर हैं। कॉलोनी की बदहाली और बच्चों के दर्द को बयां करते हुए एक मासूम बच्चे ने जिला कलेक्टर से भावुक गुहार लगाई: "कलेक्टर साहब, मैं भी आपकी तरह पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बनना चाहता हूं, लेकिन कॉलोनी में भरे पानी की वजह से 15 दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहा हूं।" निवासियों की बार-बार शिकायत के बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे लोग गंदगी और खतरे के बीच जीने को मजबूर हैं।
चार सालों से सीवर और नाले जाम, सड़कों पर जमा हुआ 2 से 3 फीट पानी
पंचवटी कॉलोनी में जलभराव की यह विकराल समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले करीब 4 वर्षों से यहां के लोग इस नारकीय स्थिति का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वार्ड नंबर 9 की मुख्य सीवर लाइन और जल निकासी नाले पूरी तरह गाद और कचरे से पटे पड़े हैं। बारिश के दिनों में, खासकर जुलाई से सितंबर के महीनों के दौरान, स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है। इन तीन महीनों में सड़कों पर 2 से 3 फीट तक गहरा पानी भर जाता है, जिससे पूरी कॉलोनी का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है और सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं।
हर साल मानसून के दौरान बच्चों की शिक्षा पर सबसे बुरा असर पड़ता है। पहले कई बच्चे मजबूरी में गंदे पानी और कीचड़ के बीच से गुजरकर किसी तरह स्कूल पहुंचते थे। लेकिन पिछले 15 दिनों से स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ चुकी है कि रास्तों पर चलना भी असंभव हो गया है। इसके चलते कई बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह छूट गई है और उनके अभिभावक बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं।
सांपों का खौफ, मकानों में दरारें और संक्रामक बीमारियों की आहट
कॉलोनी में जमा सड़े हुए पानी ने निवासियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासी रामदुलारा गोस्वामी ने बताया कि पिछले 3 से 4 सालों से जलभराव की समस्या बनी हुई है और बारिश के मौसम में 2 से 3 फीट पानी जमा रहता है। 15 दिनों से बच्चों के स्कूल न जा पाने के अलावा, घरों के चारों तरफ पानी भरा रहने के कारण मकानों की नींव कमजोर हो रही है। फर्श नीचे धंस रहे हैं और दीवारों में गहरी दरारें आने लगी हैं, जिससे किसी भी समय मकान गिरने का खतरा बना हुआ है।
सूरज ढलते ही पूरी कॉलोनी में सन्नाटा पसर जाता है। निवासी राजेश गुधैनिया के अनुसार शाम 5 बजे के बाद घरों से बाहर निकलना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं होता। पानी में विषैले सांप तैरते हुए दिखाई देते हैं, जो कई बार घरों के भीतर घुस आते हैं। इसके साथ ही हफ्तों से रुके गंदे पानी के कारण लोगों के पैरों की त्वचा सड़ने लगी है और घाव हो रहे हैं। इस दूषित वातावरण की वजह से इलाके में गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने की पूरी संभावना बनी हुई है।
पानी में छिपे जानलेवा गड्ढे और 181 पोर्टल पर कागजी समाधान का खेल
सड़कों पर हुए बड़े-बड़े गड्ढों ने आवाजाही को बेहद खतरनाक बना दिया है। निवासी रजनीश शर्मा ने बताया कि सीवर और नालियों के जाम होने से पानी निकासी का कोई रास्ता नहीं बचा है। सड़कों पर बने गहरे गड्ढे जलभराव के कारण दिखाई नहीं देते। इसके चलते कई राहगीर और दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होकर घायल हो चुके हैं, जिनमें से कई लोगों के हाथ और पैर में फ्रैक्चर तक हो चुका है।
नागरिकों की शिकायतों पर प्रशासनिक रवैया बेहद निराशाजनक रहा है। स्थानीय निवासी बच्चू सिंह ठाकुर ने बताया कि निवासियों ने मुख्यमंत्री 181 शिकायत पोर्टल पर कई बार अपनी समस्याएं दर्ज कराई हैं। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे बिना ही दफ्तर में बैठकर शिकायतों का निस्तारण क्लोज कर देते हैं। हाल ही में एक निवासी ने एक दिन पहले शिकायत दर्ज कराई और उसे समाधान का संदेश भी मिल गया, लेकिन मौके पर जलभराव और गंदगी जस की तस बनी हुई है। अधिकारी केवल कागजों पर कार्रवाई पूरा दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
प्रशासनिक निरीक्षण और स्थायी जल निकासी की पुरजोर मांग
प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित पंचवटी कॉलोनी के निवासियों ने धौलपुर जिला प्रशासन, नगर परिषद और जनप्रतिनिधियों से तुरंत राहत देने की मांग की है। स्थानीय लोगों की अपील है कि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर आकर जमीनी हकीकत देखें और निवासियों को इस दलदल से बाहर निकालें। लोगों ने मांग की है कि जाम पड़ी सीवर लाइनों और नालों की तत्काल मशीन लगाकर सफाई कराई जाए, पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए और क्षतिग्रस्त सड़कों की तुरंत मरम्मत की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव सिर्फ रास्ते की रुकावट नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सुनहरे भविष्य और लोगों की जान-माल से जुड़ा मामला है। निवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया है ताकि जलभराव समाप्त हो सके और बच्चे एक बार फिर बिना किसी डर के नियमित रूप से स्कूल जा सकें।



















