राजस्थान के शहरी इलाकों में निकाय और निगम चुनावों को लेकर जबरदस्त गहमागहमी और उत्साह बना हुआ है। राजनीतिक दलों द्वारा अपने उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाने और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शहर की गलियों में चुनाव प्रचार का शोर गूंज रहा है। खासकर जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा जैसे प्रमुख नगर निगम क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है, जहां प्रत्याशियों और मतदाताओं दोनों को अब सिर्फ मतदान की तारीख का इंतजार है। चुनाव मैदान में उतरे पार्षद और मेयर पद के दावेदारों के साथ-साथ आम जनता में भी खासा जोश देखा जा रहा है, क्योंकि इन चुनावों के जरिए ही हर इलाके को नया पार्षद और पूरे शहर को नया मेयर मिलने वाला है।
इसी चुनावी हलचल के बीच जयपुर की ऐतिहासिक चारदीवारी के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर 114 का माहौल जानने पर पता चला कि स्थानीय लोग चुनाव को लेकर काफी जागरूक हैं। हर नुक्कड़ और चौराहे पर सिर्फ और सिर्फ चुनावी चर्चाएं हो रही हैं। मतदाताओं का साफ कहना है कि बीते पांच साल के दौरान उन्हें अपने चुने हुए प्रतिनिधि से जैसी उम्मीदें थीं, उस स्तर पर धरातल पर काम नहीं हो सका है। यही वजह है कि इस बार जनता पानी, बिजली, सड़क और सीवरेज जैसी बुनियादी और जरूरी सुविधाओं के समाधान के लिए पूरी तरह तैयार है। लोग ऐसे उम्मीदवार को चुनना चाहते हैं जो जमीन से जुड़ा हो और उनके क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दे।
ढोल-नगाड़ों के साथ घर-घर पहुंच रहे प्रत्याशी
जयपुर के विभिन्न वार्डों, विशेष तौर पर वार्ड नंबर 114 के गली-मोहल्लों में चुनाव प्रचार का रंग पूरी तरह जम चुका है। अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर उतरे प्रत्याशियों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। चुनाव प्रचार में जुटे कार्यकर्ता और उम्मीदवार खुद एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और लोगों से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। चुनावी माहौल का रंग ऐसा है कि जीत के नतीजों से पहले ही कई जगहों पर मिठाइयां बंटने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।
प्रत्याशी अपने समर्थकों और ढोल-नगाड़ों के काफिले के साथ हर घर के बाहर रुकते हैं, परिवार के सदस्यों से बातचीत करते हैं और समर्थन मांगने के बाद अगले घर की ओर बढ़ जाते हैं। इसके अलावा जयपुर के अलग-अलग इलाकों में उम्मीदवारों ने जनता से संपर्क साधने और अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए अस्थाई कार्यालय भी बनाए हैं। इन ठिकानों पर सुबह-शाम चाय-नाश्ते के दौर के साथ स्थानीय विकास और चुनाव से जुड़े मुद्दों पर लंबी चर्चाएं होती हैं।
विकास और सहयोग करने वाले प्रतिनिधि की तलाश
वार्ड नंबर 114 के लोगों से बातचीत करने पर यह बात सामने आई कि वे अपने क्षेत्र के लिए एक ऐसा जनप्रतिनिधि चाहते हैं जिसकी भूमिका परिवार के मुखिया जैसी हो। लोगों का मानना है कि पार्षद सिर्फ कागजी विकास कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि रोजमर्रा के सरकारी कामकाज और लोगों के सुख-दुख में भी उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहे। मतदाताओं का कहना है कि उनके मोहल्लों में कई ऐसे लोग भी हैं जो औपचारिक पद पर न होने के बावजूद हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं। जनता इस बार ऐसे ही मददगार और जमीनी स्वभाव के उम्मीदवारों को जयपुर नगर निगम में भेजना चाहती है।
किसकी झोली में जाएगा जनता का वोट?
क्षेत्र के अधिकांश लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने जाति या धर्म जैसे समीकरणों से ऊपर उठकर केवल और केवल विकास के मुद्दों पर वोट देने की बात कही। जानकारी के अनुसार जयपुर के वार्ड नंबर 114 में कुल 6 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं पूरे जयपुर शहर के 150 वार्डों में पार्षद पद के लिए हजारों प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। इन तमाम उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला 11 सितंबर को होने वाले मतदान के दौरान जनता अपने वोट से करेगी, जबकि इसके नतीजे 14 सितंबर को होने वाली मतगणना के बाद सबके सामने आएंगे।



















