जयपुर: राजस्थान में साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाते हुए पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जयपुर दक्षिण पुलिस ने साइबर शील्ड नाम से चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत कुल 21 अंतरराज्यीय साइबर ठगों को धर दबोचा है। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इन सभी आरोपियों के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी के कुल 15 मामले पहले से दर्ज हैं। इसके अलावा जब गहराई से छानबीन की गई तो 101 अलग-अलग शिकायतों से जुड़े करीब 18 करोड़ 60 लाख रुपये के बड़े पैमाने पर हुए साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ है।
भारी मात्रा में नकदी और गैजेट्स बरामद
जयपुर दक्षिण के पुलिस उपायुक्त राजर्षि राज के कुशल निर्देशन में इस विशेष साइबर अभियान को अंजाम दिया गया। इस दौरान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से 2 लाख 4 हजार 500 रुपये की भारतीय नकदी के साथ-साथ थाईलैंड की करेंसी के 12 नोट भी बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त, ठगी के काले कारोबार में इस्तेमाल किए जा रहे 38 मोबाइल फोन, एक लग्जरी कार, 25 बैंक चेकबुक, 20 बैंक पासबुक, 30 एटीएम और डेबिट कार्ड तथा 15 फर्जी पैन व आधार कार्ड भी जब्त किए गए हैं। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ये शातिर ठग फर्जी बैंक खातों और म्यूल अकाउंट का जाल बिछाकर ठगी की पूरी रकम को अलग-अलग चैन के जरिए ट्रांसफर किया करते थे।
विभिन्न राज्यों से जुड़ी हैं शिकायतें
आरोपियों के पास से बरामद की गई चेकबुक्स और पासबुक्स में दर्ज खाता नंबरों की जब नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल 1930 पर तस्दीक की गई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में पता चला कि ये खाते देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़ी 101 साइबर शिकायतों से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए लगातार अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित कर रही है ताकि इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जल्द से जल्द शिकंजे में लिया जा सके।
ठगी के अलग-अलग हथकंडे अपनाते थे अपराधी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये अंतरराज्यीय साइबर ठग भोले-भाले लोगों को फंसाने के लिए कई तरह के शातिर तरीके इस्तेमाल करते थे। इनमें ऑनलाइन मार्केटप्लेस ओएलएक्स पर बेहद सस्ती दरों पर गाड़ियां बेचने का झांसा देकर लोगों से एडवांस में पैसे ऐंठना, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देना, अपनी फर्जी पहचान बताकर हवाला कारोबार के नाम पर ठगी करना और विभिन्न बैंक खातों का उपयोग करके अवैध रकम को आगे ठिकाने लगाना शामिल है। इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन साइबर अपराधियों के बैंक खातों में मौजूद ठगी की भारी-भरकम राशि को तुरंत होल्ड करवाने की प्रभावी कार्रवाई भी की है।
विभिन्न अभियानों के जरिए करोड़ों की रिकवरी
पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 17 अक्टूबर 2026 तक जयपुर दक्षिण जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चली मुहिम के दौरान कुल 8 करोड़ 84 लाख 86 हजार 566 रुपये की अवैध राशि को समय रहते होल्ड करवाया गया। इसके साथ ही, ऑपरेशन वज्र प्रहार 2.0 के तहत की गई कार्रवाई में साइबर फ्रॉड की शिकायतों से जुड़े 1 करोड़ 77 लाख 11 हजार 362 रुपये की नकदी सफलतापूर्वक रिकवर कर सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में वापस रिफंड करवाई गई। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्रालय के एमएचए पोर्टल पर दर्ज कुल 1,045 शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 9 करोड़ 83 लाख 84 हजार रुपये की राशि पीड़ितों को वापस लौटाई जा चुकी है।
बरामद मोबाइल और जनजागरूकता अभियान
वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 17 अक्टूबर तक की अवधि के दौरान जयपुर दक्षिण जिले के विभिन्न पुलिस थानों द्वारा चलाए गए विशेष अभियानों के तहत कुल 542 एंड्रॉइड व अन्य मोबाइल फोन बरामद किए गए। इन सभी बरामद मोबाइल फोन्स की कुल अनुमानित कीमत लगभग 1.05 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए इन सभी मोबाइलों को उनके असली मालिकों तक सुरक्षित वापस पहुंचाने का काम किया है। इसके साथ ही, आम जनता को साइबर ठगी के नए तौर-तरीकों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कुल 20 स्कूल और कॉलेजों में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें 7,000 से अधिक विद्यार्थियों और नागरिकों को सतर्क रहने की सीख दी गई। समन्वय पोर्टल के माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों में छिपे बैठे 944 वांछित साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कानूनी शिकंजा कसने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस की आम जनता से विशेष अपील
जयपुर दक्षिण पुलिस ने प्रदेश और देश की आम जनता से अपील की है कि वे ऑनलाइन माध्यमों से किसी भी प्रकार की खरीदारी या बिक्री करते समय पूरी तरह सतर्क रहें। अनजान लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और कभी भी किसी के कहने पर एडवांस में भुगतान न करें। किसी भी संदिग्ध फोन कॉल, लुभावने लिंक या फर्जी निवेश योजना के झांसे में बिल्कुल न आएं। यदि किसी के साथ किसी भी प्रकार की साइबर ठगी हो जाती है, तो वे बिना किसी देरी के तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं और आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर भी अपनी सूचना दर्ज करवाएं। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ठगी की गई रकम को तुरंत होल्ड करवाने और पीड़ित को वह पैसा वापस मिलने की संभावनाएं काफी हद तक बढ़ जाती हैं।




















